दूसरी "एशिया-यूरोप सहयोग वार्ता" छोंगछिंग में शुरू
2 दिसंबर को बोआओ एशिया फोरम की दूसरी "एशिया-यूरोप सहयोग वार्ता" छोंगछिंग में शुरू हुई। एशिया-यूरोप सहयोग शासन के नए पैटर्न पर चर्चा करने के लिए 21 देशों, क्षेत्रों और तीन अंतरराष्ट्रीय संगठनों के 400 से अधिक प्रतिनिधियों ने वार्ता में भाग लिया।
आज की दुनिया भू-राजनीतिक संघर्ष, व्यापार घर्षण,जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा और कई अन्य पारंपरिक व गैर-पारंपरिक खतरों का सामना कर रही है। इसने वैश्विक आर्थिक विकास को गंभीर चुनौतियां दी हैं, और यूरोप व एशिया में इसने व्यापक प्रभाव डाला है।
बोआओ एशिया फोरम के उप निदेशक चो श्याओच्वान ने अपने मुख्य भाषण में कहा, यूरोप में, निर्यात में गिरावट, निराश उपभोक्ता विश्वास, अप्रत्याशित ब्रेक्सिट और कुछ देशों में राजनीतिक अस्थिरता जैसे कारकों ने यूरोपीय अर्थव्यवस्था पर जबरदस्त दबाव डाला है। हालांकि एशिया में 2019 की शुरुआत से घरेलू मांग में वृद्धि जारी है,लेकिन कई देशों में व्यापार की वृद्धि सुस्त रही है, जबकि विदेशी निवेश भी धीरे-धीरे धीमा हो गया है।
एशिया व यूरोप में दुनिया की आबादी का 60 प्रतिशत है, साथ ही इसका आर्थिक उत्पादन भी दुनिया के 60 प्रतिशत से अधिक है। यूरेशिया के अधिकांश देश बहुपक्षीयवाद और खुली विश्व अर्थव्यवस्था के मज़बूत समर्थक हैं। बोआओ एशिया फ़ोरम के अध्यक्ष बान की मून ने कहा, एशिया और यूरोप को एक-दूसरे से सीखना चाहिए, अपने संबंधित लाभ को पूरा करना चाहिए और वैज्ञानिक व तकनीकी क्रांति के एक नए दौर की ओर एक साथ काम करना चाहिए।
अंजली


