टिप्पणी :बाह्य दबाव के सामने चीनी जनता अपना सिर नहीं झुकाएगी
अमेरिका ने हाल ही में "हांगकांग मानवाधिकार और लोकतंत्र विधेयक" के माध्यम से चीन के अन्दरूनी मामलों में हस्तक्षेप किया और हांगकांग मुद्दे की आड़ में चीनी विकास को रोकने की साजिश रची, लेकिन इससे हांगकांग वासियों समेत तमाम चीनी जनता को डराया नहीं जा सकेगा।
बीते पाँच महीनों में बड़े पैमाने पर हिंसक कार्यवाहियों से हांगकांग को बेहद खतरनाक स्थिति में फंसा दिया गया है। बदमाशों ने हांगकांग की सड़कों को बन्द किया, आग जलायी, पुलिस और आम लोगों पर हमला बोला, लेकिन हांगकांग में हिंसा को रोकने और सामान्य व्यवस्था की बहाली के कुंजीभूत समय में अमेरिका ने "हांगकांग मानवाधिकार और लोकतंत्र विधेयक" को मंजूरी दी, जिससे हिंसक अपराधियों को सहारा दिया गया है। अमेरिका ने इससे हांगकांग की समृद्धि को नष्ट करना और चीनी राष्ट्र के पुनरेकीकरण को बाधित करना चाहा। चीनी जनता इसकी इजाजत बिल्कुल नहीं देगी।
अमेरिका ने दीर्घकाल तक हांगकांग के आंतरिक मामलों में टाँग अड़ाने का प्रयास किया है। वर्ष 1984 से 2014 तक अमेरिकी संसद ने हांगकांग संबंधित कुल 60 से अधिक विधेयक पास किये। एनईडी यानी अमेरिकी राष्ट्रीय जनवादी कोष ने वर्ष 2014 के हांगकांग उपद्रव का साथ दिया। अनेक अमेरिकी राजनीतिज्ञों ने हांगकांग स्वतंत्रता के नेताओं से भेंट की। अमेरिका में बहुत-सी गैर-सरकारी संस्थाओं ने हांगकांग के दंगाइयों का समर्थन किया। अमेरिका ने जनवादी और मानवाधिकार के बहाने से चीन के अन्दरूनी मामलों में हस्तक्षेप किया।
बाह्य दबाव के सामने चीनी जनता ने अपना सिर कभी नहीं झुकाया है। नये चीन की स्थापना की शुरूआत में जब पश्चिमी देशों ने चीन के खिलाफ प्रतिबंध लगाया था, तब चीनी जनता ने एकजुट होकर पश्चिमी देशों की घेराबंदी को तोड़ दिया था। आज अमेरिका ने हांगकांग संबंधी विधेयक पारित कर चीनी जनता पर अपना धौंस जमाया है, लेकिन उन्होंने चीनी जनता की प्रभुसत्ता, सुरक्षा और विकास हितों की रक्षा करने की कल्पना का निम्न मूल्यांकन किया है। विधेयक पारित किये जाने से अमेरिका का आधिपत्यवाद जाहिर हुआ है। यह देखने के बाद चीनी जनता और मजबूती के साथ एकजुट खड़ी रहेगी। हांगकांग चीन का अभिन्न अंग है। हांगकांग के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप की कोई जगह नहीं है। चीन बाहर से आये खतरों और चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है। आशा है कि अमेरिका अपनी गलती को सुधारकर हांगकांग मामले में हस्तक्षेप करना बन्द करेगा, नहीं तो चीन कड़ा रूख अख्तियार करेगा।
( हूमिन )