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चीनी और भारतीय कलाकार बिखेरेंगे सांस्‍कृतिक छठा के रंग

2019-11-12 11:19:35
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दक्षिण चीन के क्वांगचो शहर में चीनी और भारतीय कलाकार एकसाथ मिलकर सांस्‍कृतिक छठा के रंग बिखेरेंगे। इस महीने की 23 तारीख को चीन और भारत के जाने-माने कलाकार क्वांगचो के पेइलेइ थियेटर में गीत-संगीत से सजी संध्या में अपना रंग जमाएंगे। इस कार्यक्रम में भारत के कलाकार अवधी, बंगाली, गुजराती, हिन्दी, मराठी, मलयालम, पंजाबी, सिंधी और तमिल 9 भाषाओं में अपनी आवाज का जादू बिखेरेंगे। वहीं, चीनी गायक और चीन की सुविख्यात गुझेंग ओपेरा कलाकार अपने कौशल का प्रदर्शन कर लोगों को अभिभूत करने का प्रयास करेंगे।

चीन में प्रवासी भारतीयों के एक संगठन, सीएनआरआई की ओर से इस सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जा रहा है। इस संगठन के संस्थापक तथा कार्यक्रम के आयोजक राजेश पुरोहित ने चाइना रेडियो इंटरनेशनल (सीआरआई) के साथ खास बातचीत में बताया कि कि मौजूदा समय में भारत और चीन के रिश्ते बेहतर हो रहे हैं और दोनों देशों के शीर्ष नेता बेहतर संबंध बनाने की कोशिश कर रहे हैं। "वुहान भावना" और "चेन्नई कनेक्ट" दोनों नेताओं द्वारा किए जा रहे प्रयासों का एक बड़ा उदाहरण है।

चीन में भारतीय संस्कृति की अलख जगाने वाले राजेश पुरोहित ने सीआरआई को बताया कि भारत अनेक रंगों का देश है, जहां विविध संस्कृतियों और कई भाषाओं का संगम है। उन्होंने अपने सांस्कृतिक कार्यक्रम का नाम भी “रंग” रखा है, जहां भारत के कलाकार एक ही स्थान पर 9 भाषाओं में सांस्‍कृतिक छठा का रंग बिखेरेंगे। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के माध्यम से जहां मनोरंजन का खजाना लोगों को मिलेगा, वहीं भारत और चीन के सांस्कृतिक संबंध को और प्रगाढ़ बनाने का एक शानदार मौका भी होगा।

पिछले 5 सालों से चीन में मौजूद प्रवासी भारतीयों को आपस में जोड़ने, और अपने कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार करने वाले राजेश पुरोहित ने बताया कि इस कार्यकम में जाने-माने कवि दिनेश रघुवंशी, लोकप्रिय पंजाबी गायक और रेडियो जॉकी हनी वी, प्रसिद्ध सिंधी गायक निर्मल मीरचंदानी, भारत के लोकप्रिय कीबोर्ड कलाकर प्रशांत मिस्र आदि कलाकारों को आमंत्रित किया गया है। वहीं, चीनी गायक और चीन की सुविख्यात गुझेंग ओपेरा कलाकार को भी मौका दिया गया है।

उन्होंने सीआरआई को यह भी बताया कि इस कार्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल किया जाएगा, जहां वास्तविक समय में आवाजों का अनुवाद किया जाएगा।

(अखिल पाराशर)

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