सीमा मामलों के समाधान में चीनी बुद्धिमत्ता का योगदान - प्रथम अंतर्राष्ट्रीय सीमा सहयोग संगोष्ठी चीन में समाप्त

2019-10-31 10:21:59
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प्रथम अंतर्राष्ट्रीय सीमा सहयोग संगोष्ठी 30 अक्तूबर को चीन के पेइचिंग में समाप्त हुई। संगोष्ठी में भाग लेने वाले 15 देशों के प्रतिनिधियों ने इस बात पर सहमति जतायी कि सीमा सवाल के समाधान में चीन का अनुभव क्षेत्रीय और विश्व की शांति, स्थिरता और विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

चीन के उप विदेश मंत्री लो चाओ ह्वेई ने कहा कि सन 1959 में चीन ने भारत और म्यांमार के साथ मशहूर पंचशील सिद्धांत पेश किया था। चीन सरकार ने हमेशा अपने पड़ोसी देशों के साथ यह सिद्धांत लागू किया है। चीन ने वार्ता व मशविरा करने के ढ़ंग से अपने अधिकांश पड़ोसी देशों के साथ सीमा समस्याओं का समाधान किया।

चीन की विश्व में सबसे लम्बी सीमा है और चीन के सबसे ज्यादा पड़ोसी देश भी हैं। 70 साल पहले जब नये चीन की स्थापना हुई थी, तब चीन और पड़ोसी देशों के बीच सीमाएं रेखांकित नहीं की गयी थीं। अभी तक चीन ने 12 पड़ोसी देशों के बीच बीस हजार किलोमीटर लम्बी सीमा को रेखांकित किया है। भारत और भूटान, जिनके साथ चीन ने सीमा तय नहीं की है, के प्रति लो चाओ ह्वेई ने कहा कि चीन ने इन दो पड़ोसी देशों के साथ शांति समझौता संपन्न किया है और इस का कार्यांवयन अच्छी तरह किया जा रहा है।

चीनी सोशल विज्ञान अकादमी के फ्रंटियर रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रधान शींग क्वांग छंग ने कहा कि सन 1990 के दशक में चीन ने रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान के साथ वार्ता से सीमा सवाल का समाधान किया और इसी दौरान शांघाई सहयोग संगठन की स्थापना की। दूसरे प्रतिनिधियों ने भी कहा कि बेल्ट एंड रोड पहल की प्रस्तुति से अनेक परियोजनाएं अलग देशों के बीच सीमाओं से पारकर कायम की गयी हैं, जिनसे चीन और दूसरे देशों के साथ जोड़ा गया है।

( हूमिन )

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