एसेक्स दुःखद घटना राजनीति से संबंधित नहीं
इधर के दिनों में ब्रिटेन में 39 लोगों की मौत होने वाली एसेक्स दुःखद घटना की जांच जारी है। मृतकों की राष्ट्रीयता पर मीडिया की रिपोर्टिंग पर संदेह पैदा होने लगा है। लेकिन मीडिया की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए।
घटना के तुरंत बाद एसेक्स की पुलिस ने कहा कि ये सभी मृतक चीनी नागरिक थे, लेकिन अपने कथन को जल्दी वापस ले लिया। अभी तक सोशल मीडिया में इस घटना से संबंधित जो रिपोर्टिंग हैं, वह भी अलग-अलग हैं। मीडिया को हमेशा याद रखना चाहिए कि समाचार की सामयिकता और तथ्य दोनों ही महत्वपूर्ण होते हैं। लेकिन एसेक्स दुःखद घटना पर कुछ विदेशी मीडिया ने गैर-जिम्मेदारना भरी रिपोर्टिंग की। मिसाल के तौर पर ब्रिटेन के टीवी कार्यक्रम में कुछ संवाददाताओं ने जानबूझकर या अनजाने में एसेक्स दुःखद घटना को चीन के साथ जोड़ दिया और यहां तक कि किसी टीवी होस्ट ने अपने कार्यक्रम में मेहमान के जरिये यह बताया कि चीन सरकार के दबाव से एसेक्स दुःखद घटना के पीड़ित परिवारों में बाहर सच बताने की हिम्मत नहीं थी।
25 अक्तूबर को सीएनएन के एक संवाददाता ने चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से यह पूछा कि नये चीन की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ पर क्यों इतने चीनी लोग खतरनाक तरीके से देश से रफू-चक्कर हो रहे हैं। लेकिन प्रवक्ता ने इस प्रश्न का खंडन किया और कहा कि सच अभी तक सामने नहीं आया है। पर इसके बावजूद सीएनएन ने अपने कार्यक्रम में चीन के "विशाल" आव्रजन ज्वार तथा अमीर और गरीब के बीच बढ़ती खाई पर खूब टिप्पणी की। बेशक चीनी लोगों ने ऐसी रिपोर्टिंग का व्यापक विरोध किया गया। बहुत-सी विदेशी मीडिया सदैव चीनी समाज के काले पक्ष की रिपोर्टिंग करने में सक्रिय रहती हैं, लेकिन उन्हें भी अपनी पेशेवर प्रतिष्ठा को बनाये रखने की आवश्यकता है। जब पुलिस अभी भी तथ्यों की पुष्टि कर रही है, तब हमें मृतकों को शोक देने के लिये मौन रहना चाहिये।
( हूमिन )


