चीन में सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी का प्रमोशन इवेंट

2019-09-18 15:27:44
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भारतीय दूतावास के मिशन प्रमुख एक्विनो विमल संबोधन करते हुए

साल 2018 में भारतीय विदेश मंत्रालय के सहयोग से भारत के मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एचआरडी) ने भारत में उच्च शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए विदेशी छात्रों को आकर्षित करने के लिए “भारत में अध्ययन” कार्यक्रम की मंजूरी दी। यह कार्यक्रम ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, सिंगापुर और कनाडा द्वारा शुरू की गई पहल के समान है। इसका लक्ष्य देश में अंतरराष्ट्रीय छात्रों को शिक्षा हेतु बढ़ावा देना और भारतीय शैक्षणिक संस्थानों की वैश्विक प्रतिष्ठा और रैंकिंग में सुधार करना है।

वर्तमान में, भारत सरकार उच्च शिक्षा में विदेशी छात्रों के लिए 10% से 15% सीटों के प्रावधान की अनुमति देती है। यह प्रावधान विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में काफी हद तक कम है। मौजूदा स्थिति पर नजर डालें तो देखेंगे कि भारत शिक्षा हेतु 45,000 अंतर्राष्ट्रीय छात्रों का हिस्सेदार है, जो वैश्विक छात्र हिस्सेदारी का सिर्फ 1% है।

दरअसल, भारतीय शिक्षा प्रणाली ने अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर एक सशक्‍त स्‍थान हासिल कर लिया है। भारत विदेशी छात्रों के लिए उच्‍चतर शिक्षा हेतु एक लोकप्रिय स्‍थान बन गया है, क्‍योंकि इस देश के कई शैक्षिक पाठ्यक्रम अन्य देशों में उपलब्ध अवसरों से अधिक बेहतर हैं। हर वर्ष दुनिया के सभी देशों से बड़ी संख्‍या में छात्र अध्‍ययन के लिए भारत आते हैं और अपनी अधिक सीखने की इच्‍छा को पूरा करते हैं। भारत में अध्‍ययन, विश्‍व में दूसरा सबसे बड़ा शिक्षा नेटवर्क है जो अपने आप में समृद्ध अनुभव है।

अभी कुछ दिनों पहले चीन स्थित भारतीय दूतावास में भारत की जानी-मानी यूनिवर्सिटी सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी का एक प्रमोशन इवेंट हुआ। इस इवेंट में सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के विशिष्ठ प्रोफेसर गौतम बंबावाले और यूनिवर्सिटी के डीन डॉ. केतन कोटेचा ने चीनी विद्यार्थियों, चीन की शैक्षिक एजेंसियों के प्रतिनिधियों, मीडियाकर्मियों आदि को “भारत में अध्‍ययन” कार्यक्रम तथा सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी की विशेषताओं से अवगत करवाया।

अनुभवी राजनयिक गौतम बंबावाले भूटान, पाकिस्तान और चीन में भारतीय राजदूत रह चुके हैं, और अब पश्चिमी भारत के महाराष्ट्र राज्य के पुणे शहर में स्थित सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में एक विशिष्ठ प्रोफेसर हैं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारत में अध्ययन करना अमेरिका, यूके, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा आदि की तुलना में सस्ता है, और उच्च शिक्षा अंग्रेजी भाषा में ही होती है।

प्रोफेसर गौतम बंबावाले ने यह भी बताया कि सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में अकादमिक अध्ययन की पूरी श्रृंखला उपलब्ध है और इंजीनियरिंग के अलावा मैनेजमेंट कोर्स और लॉ स्कूल बहुत प्रसिद्ध हैं। उन्होंने पूरी उम्मीद जतायी कि आने वाले कुछ वर्षों में सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में चीनी छात्रों की संख्या में बढ़ोत्तरी होगी।

भारतीय दूतावास के मिशन प्रमुख एक्विनो विमल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और चीन दोनों ही देश सांस्कृति देश हैं, और दोनों देशों के बीच 3000 से अधिक वर्षों पुराना एक मजबूत सांस्कृतिक और व्यापारिक आदान-प्रदान है। शैक्षिक आदान-प्रदान का मूल्य कुछ ऐसा है जिसे हमारे पूर्वजों ने सदियों पहले महसूस किया था। चीनी बौद्ध भिक्षु श्वान जांग ने भारत की यात्रा की थी, और बौद्ध सूत्र लेकर आये थे।

उन्होंने यह भी कहा कि आज, भारत और चीन दोनों एक-दूसरे को, विशेष रूप से शिक्षा के क्षेत्र में, कुछ बेहतरीन शैक्षिक सुविधाएं विश्व स्तर पर उपलब्ध करवा सकते हैं। आज की तारीख में, चीन में 23 हजार भारतीय छात्र हैं। इससे यह जाहिर होता है कि भारतीय लोगों में चीन में अध्ययन करने के प्रति काफी रुचि है।

सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के डीन डॉ. केतन कोटेचा ने कहा कि उनकी यूनिवर्सिटी में आकर्षक माहौल, भेदभावरहित व्यवहार और सुनिश्चित शैक्षिक और करियर उत्थान के अवसर होने की वजह से दुनिया भर के विद्यार्थी उनकी यूनिवर्सिटी की ओर आकर्षित होते हैं। उनकी यूनिवर्सिटी इंजीनियरिंग, लॉ, कम्प्यूटर कॉर्स, कला, पत्रकारिता, समाज सेवा, व्‍यापार, वाणिज्‍य आयोजन, वास्‍तुकला, और अन्य विशेषीकृत अध्‍ययनों पर बल देती है। उनकी यूनिवर्सिटी अंग्रेजी माध्‍यम से शिक्षा देती है और अंग्रेजी में कमजोर बच्चों के लिए विशेष भाषा की कक्षाएं भी चलाती है।

सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के विशिष्ठ प्रोफेसर गौतम बंबावाले और यूनिवर्सिटी के डीन डॉ. केतन कोटेचा ने चाइना रेडियो इंटरनेशनल को एक संयुक्त साक्षात्कार दिया। सुनिए संयुक्त साक्षात्कार के मुख्य अंश-



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