चीन-भारत मैत्री की कोई सीमा नहीं

2019-08-14 14:49:24
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12 अगस्त को चीनी सार्वजनिक राजनयिक सोसाइटी द्वारा आयोजित चौथी चीन-भारत उच्च स्तरीय मीडिया फॉरम पेइचिंग में आयोजित हुआ। भारत स्थित भूतपूर्व चीनी राजदूत स्वन यूशी ने कहा कि चीन और भारत पड़ोसी देश हैं। दोनों देशों के बीच संबंध का गहरा आधार है। चीन-भारत मैत्रीपूर्ण आवाजाही की कोई सीमा नहीं है। आशा है कि दोनों देशों की मीडिया संस्थाएं आदान प्रदान व सहयोग को मजबूत कर द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए पुल का निर्माण करेंगे।

वर्तमान फॉरम में चाइना मीडिया ग्रुप, पीपल्स डैली, चाइना डैली, टाइम्स ऑफ़ इंडिया, अमर उजाला, हिन्दूस्तान, रिपब्लिक भारत टीवी स्टेशन, विओन टीवी स्टेशन आदि चीन और भारत की प्रमुख मीडिया संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने गहन रूप से विचारों का आदान प्रदान किया।

भारत स्थित भूतपूर्व चीनी राजदूत स्वन यूशी ने अपने भाषण में कहा कि चीन और भारत के पास समान ऐतिहासिक कर्तव्य है और ये भी दोनों देशों की मीडिया का समान कर्तव्य भी है। चीन और भारत के बीच समानताएं समान हितों का आधार है, साथ ही यह दोनों देशों की मीडिया द्वारा चीन-भारत संबंध का मार्गनिर्देशन करने का विचार भी है। स्वन ने चीन-भारत मैत्रीपूर्ण संबंध के विकास में तीन अहम मुद्दों की चर्चा की। प्राचीन काल में दोनों देशों ने बौद्ध धर्म के आधार पर आदान प्रदान किया। जातीय स्वतंत्रता और जन मुक्ति के संघर्ष में दोनों देशों ने एक दूसरे का समर्थन किया था। स्वतंत्रता व मुक्ति के बाद दोनों देशों के नेताओं ने शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के पाँच सिद्धांत को अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के मापदंड बनाने का आह्वान किया। स्वन के मुताबिक, चीन और भारत का लम्बा इतिहास है। दोनों एक दूसरे पर असर पड़ते हैं। आज दोनों देश आर्थिक विकास करने और जन-जीवन में सुधार करने का भारी मिशन निभाते हैं। चीन और भारत की मीडिया संस्थाओं को 2.6 अरब लोगों के बीच मैत्रीपूर्ण आदान प्रदान के लिए पुल का निर्माण करना चाहिए। और इसे चीन-भारत मैत्रीपूर्ण सहयोग का चौथा उत्कर्ष बनाना चाहिए। यह चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा पेश किया गया मानव साझे भाग्य वाले समुदाय की रचना है।

भारत का समाचारपत्र अमर उजाला उत्तरी भारत का प्रमुख हिन्दी अख़बार है। इस के प्रमुख संपादक विनोद अग्निहोत्री ने अपने भाषण में चीन-भारत मैत्रीपूर्ण विकास के इतिहास का सिंहावलोकन किया और 21वीं शताब्दी में चीन और भारत के हाथ मिलाकर विकास करने की आशा जताई। उन के मुताबिक, अगर भारत और चीन हाथ मिलाकर सहयोग करते हैं तो पूरे एशिया यहां तक सारी दुनिया की शांति व विकास के लिए लाभदायक होगा। भारत में हम अकसर यह कहते हैं कि एक जमा एक ग्यारह बनेगा, जबकि एक घटा एक तो शून्य बनेगा। भारत और चीन के बीच सहयोग को शून्य नहीं होने देना चाहिए। 21वीं शताब्दी चीन और भारत की सदी है। अगर ड्रैगन व हाथी हाथ मिलाकर सहयोग कर सकते तो और बड़ा विकास पा सकेंगे।

चीनी स्टेट काउंसलर एवं विदेश मंत्री वांग यी और भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने एक साथ फॉरम के समापन समारोह में हिस्सा लिया। मौके पर वांग यी ने कहा कि मीडिया दोनों देशों की जनता के बीच समझ व मैत्री को प्रगाढ़ करने की अहम बेल्ट है। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों की मीडिया के आदान-प्रदान को बड़ा महत्व देते हैं और मीडिया द्वारा द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए अच्छे लोकमत वातावरण की तैयारी करने को प्रोत्साहन भी देते हैं। वांग यी ने कहा, हमें दोनों देशों के नेताओं द्वारा प्राप्त सहमतियों का कार्यान्वयन कर मीडिया संस्थाओं के बीच आदान-प्रदान व सहयोग को मजबूत करना चाहिए, ताकि चीन-भारत मैत्री प्रमुख लोकमत धारा बन सकेगी और चीन-भारत सहयोग में सकारात्मक ऊर्जा डाल सकेगी। आशा है कि दोनों देशों की मीडिया संस्थाएं चीन-भारत संबंध की प्रमुख धारा व दिशा को पकड़कर चीन-भारत मैत्री का प्रसार कर सकेंगी, आपसी लाभ वाले सहयोग को आगे बढ़ा सकेंगे, संतुलित रूप से चीनी कहानी और भारतीय कहानी को अच्छी तरह सुना सकेंगी, ताकि द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए नया योगदान दिया जा सके।

भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि स्थिर द्विपक्षीय संबंध दोनों देशों के विकास के लिए अति महत्वपूर्ण है। भविष्य में दोनों देश सांस्कृतिक व मानवीय क्षेत्र में और अधिक गतिविधियों का आयोजन करेंगे। इस क्षेत्र में मीडिया की भूमिका अति महत्वपूर्ण है। आशा है कि मीडिया के बीच आदान-प्रदान द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ा सकेगा।

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