टिप्पणी: चीन बौद्धिक संपदा अधिकार के संरक्षण में आगे कोशिश करेगा
17 जुलाई को आयोजित चीनी राज्य परिषद की एक मीटिंग में चीन बौद्धिक संपदा अधिकार के संरक्षण में अधिक कदम उठाने का फैसला लिया गया। जिस के मुताबिक चीन मुख्य तौर पर कई क्षेत्रों में बौद्धिक संपदा अधिकार का संरक्षण करेगा। यानी कि पहला, बाजार में सभी इकाइयों को बराबर व्यवहार किया जाएगा। सभी इकाइयों को एकीकृत मानक और कार्यक्रम अपनाया जाएगा। सरकार भी बौद्धिक संपदा अधिकार का उल्लंघन करने वाली कार्रवाइयों के खिलाफ अधिक जबरदस्त कदम उठाएगी।
दूसरा, चीन पेटेंट कानून, कॉपीराइट कानून और ट्रेडमार्क कानून जैसे के संशोधन को बढ़ाएगा और "दंडात्मक मुआवजा" प्रणाली का परिचय भी दिया जाएगा। चीन के पेटेंट कानून और ट्रेडमार्क कानून के संशोधन में पाँच गुणा "दंडात्मक मुआवजा" प्रस्तुत किया गया है। जो अंतर्राष्ट्रीय उच्च स्तर पर जा पहुंचा है। ऐसे कदम से बौद्धिक संपदा अधिकार का उल्लंघन करने वालों को दंडित किया जा सकेगा। इस के साथ चीन बौद्धिक संपदा अधिकार की समीक्षा करने की गुणवत्ता और दक्षता में सुधार करेगी। इस के अतिरिक्त चीन बौद्धिक संपदा अधिकार के अधिकृत पंजीकरण की गुणवत्ता को भी उन्नत करेगा और उच्च मूल्य वाले पेटेंट की मात्रा को बढ़ायेगा। इस तरह चीन बौद्धिक संपदा अधिकार के संदर्भ में ताकत बनेगा।
गौरतलब है कि चीन बौद्धिक संपदा अधिकार के संदर्भ में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग पर जोर देगा। ताकि चीनी कारोबारों को विदेशों में अपने हितों की रक्षा करने में मदद मिल सके। पता चला है कि गत वर्ष चीनी कारोबारों को अमेरिका में 12.5 लाख पेटेंट प्राप्त हुए जो पिछले साल से 12 प्रतिशत अधिक रही। विश्व बौद्धिक संपदा संगठन के आंकड़ों के मुताबिक ह्वावेई कंपनी ने गत वर्ष 5400 अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट आवेदन पेश किया है। लेकिन चीनी कंपनियों के पेटेंट का विदेशों में काफी संरक्षण नहीं किया गया है। यहां तक कि अमेरिकी सीनेट के सदस्य मार्को रूबियो ने ह्वावेई कंपनी की पेटेंट मांग को मना करने का प्रस्ताव पेश किया।
वर्तमान में मानव नये दौर की तकनीकी और औद्योगिक क्रांति के द्वार पर खड़ा है। बौद्धिक संपदा अधिकार का संरक्षण करने से ही नवाचार की रक्षा ही की जाएगी। चीन रुपांतर और खुलेपन के विस्तार में कड़ाई से बौद्धिक संपदा अधिकार का संरक्षण करेगा ताकि उच्च गुणवत्ता वाला विकास करने के लिए सतत शक्ति तैयार की जाए।
( हूमिन )