टिप्पणी : चीन के अमेरिकी उद्यमों पर प्रतिबंध लगाने से अपने राष्ट्रीय हितों की दृढ़ता रक्षा करना
अमेरिका ने हाल ही में थाईवान को 2 अरब 22 करोड़ अमेरिकी डॉलर के हथियार बेचने की योजना की घोषणा की। चीनी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि चीन संबंधित अमेरिकी उद्यमों पर प्रतिबंध लगाएगा। यह एक संप्रभु देश द्वारा अपने राष्ट्रीय मूल हितों की रक्षा करने वाला अपरिहार्य कदम है।
यह सर्वमान्य है कि थाईवान चीन की प्रादेशिक भूमि का एक अभिन्न अंग है। अमेरिका के थाईवान को हथियार बेचना न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी नियम का उल्लंघन है, बल्कि एक चीन का सिद्धांत और चीन व अमेरिका के बीच संपन्न तीन संयुक्त विज्ञप्तियों का गंभीर उल्लंघन भी है। अमेरिकी उद्यमों का थाईवान को हथियार बेचना, शुद्ध वाणिज्यिक सौदा नहीं है, बल्कि चीन की प्रभूसत्ता, सुरक्षा और हितों को बड़ा नुकसान पहुंचाने वाली कर्रवाई ही है। चीन ने संबंधित अमेरिकी उद्यमों पर प्रतिबंध लगाया, यह उचित और वैध कदम है। चीन सरकार और चीनी कंपनी अपने राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाने वाले उद्यमों के बीच कोई भी सहयोग और वाणिज्यिक आवाजाही नहीं करेंगी।
चीन और अमेरिका के बीच कूटनीतिक संबंध की स्थापना के बाद पिछले 40 सालों में अमेरिका ने एक तरफ़ चीन-अमेरिका तीन संयुक्त विज्ञप्तियों का पालन करने को कहा और माना कि विश्व में एक चीन है, थाईवान चीन का एक भाग है और चीन लोक गणराज्य की सरकार एक मात्र कानूनी सरकार है। अमेरिका ने वचन दिया कि कदम ब कदम थाईवान को हथियार बेचना कम करेगा और अंत में इस मुद्दे का समाधान करेगा।
लेकिन दूसरी तरफ़ अमेरिका ने “थाईवान के प्रति संबंध कानून” शीर्षक घरेलू कानून पारित किया, और थाईवान के साथ लगातार सरकारी आवाजाही और सैन्य संबंध कायम रखकर चीन के अंदरूनी मामले में हस्तक्षेप किया। हाल में अमेरिकी संसद के दो सदनों ने क्रमशः “2020 वित्तीय वर्ष रक्षा प्राधिकरण अधिनियम” पारित किया, और थाईवान को हथियार बेचने का समर्थन किया। थाईवान को हथियार बेचना हमेशा चीन-अमेरिका संबंध के सामान्य विकास को बाधित करने वाला मुद्दा है।
क्या अमेरिका के थाईवान को हथियार बेचने का मकसद सचमुच थाईवान की सुरक्षा की गारंटी देना चाहता है? अवश्य नहीं। अमेरिका में सरकार और हथियार बेचने वाले ग्रुप के बीच गहरे हितों वाले संबंध मौजूद है। अमेरिका ने अप्रचलित हथियारों को उच्च कीमत से थाईवान को बेच दिया। एक तरफ़ वह “थाईवान से चीन पर नियंत्रण करने” वाली कुचेष्टा का कार्यान्वयन करता है, दूसरी तरफ़ थाईवान को कैश मशीन बनाकर अमेरिकी हथियार व्यापारियों के हितों को पूरा करता है।
इस सत्र की अमेरिकी सरकार के शासन के बाद से लेकर अब तक हथियार व्यापारियों को सामने की ओर धक्का दिया गया, वे सीधे तौर पर हथियार खरीदने वाले के साथ वार्ता करते हैं। मसलन अप्रैल 2018 में, अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी कंपनी को वाणिज्यिक बिक्री वाले तरीके से थाईवान के पनडुब्बी बनाने के लिए संबंधित संवेदनशील तकनीक मुहैया करवाने की मंजूरी दी। यह अमेरिकी सैन्य उद्यम को “प्राधिकरण” देने के बराबर है, और उसके थाईवान के साथ प्रत्यक्ष वार्ता करने की मंजूरी दी गई।
लेकिन अमेरिकी उद्यमों का थाईवान को हथियार बेचना एक शुद्ध वाणिज्यिक बिक्री नहीं है, जो कि चीन की राष्ट्रीय प्रभूसत्ता, देश के अंदरूनी मामले पर हस्तक्षेप करने वाली कार्रवाई बन चुकी है, जिसे चीन कतई स्वीकार नहीं कर सकता। साल 2015 में चीन ने थाईवान को हथियार बेचने वाले अमेरिकी उद्यमों पर प्रतिबंध लगाया था। चार साल बाद चीन ने एक बार फिर थाईवान को हथियार बेचने वाले अमेरिकी उद्यमों पर प्रतिबंध लगाया, जाहिर है कि चीन अपने राष्ट्रीय प्रभुसत्ता की रक्षा वाले मुद्दे पर कोई रियायत नहीं करता और दृढ़ता के साथ देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय अखंडता की रक्षा करता है।
संप्रभुता का उल्लंघन नहीं किया जा सकता, अंदरूनी मामले पर हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। अमेरिका ने इस समय थाईवान को हथियार बेचने की पुष्टि की, जिससे न केवल थाईवान जलडमरुमध्य के क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को नुकसान पहुंचेगा, बल्कि चीन-अमेरिका संबंध और द्विपक्षीय सहयोग को क्षति पहुंचेगी। देश की संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता की रक्षा करने के क्षेत्र में चीन का रूख हमेशा से दृढ़ और स्पष्ट है। अपने हितों के लिए चीन की प्रभूसत्ता, एकता, प्रादेशिक अखंडता और सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी उद्यम या व्यक्ति अंत में अपनी गैर-दूरदर्शी कार्रवाई के लिए जरूर भारी कीमत चुकाएगा।
(श्याओ थांग)