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टिप्पणी : एआईआईबी के सदस्यों की संख्या सौ तक हुई

2019-07-14 14:37:22
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एआईआईबी यानी एशियाई आधारभूत संस्थापन निवेश बैंक ने 13 जुलाई को लक्समबर्ग में आयोजित वार्षिक सम्मेलन में बेनिन, जिबूती और रवांडा तीन अफ्रीकी देशों को सदस्यता स्वीकार की, जिससे इस बैंक में सदस्यों की संख्या सौ तक हो गई है। अंतरर्राष्ट्रीय अर्थतंत्र में अनिश्चितता पैदा होने की स्थिति में एआईआईबी का विस्तार हुआ है जिससे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में इसका विश्वास बढ़ा है।

एआईआईबी जिसका मुख्यालय पेइचिंग में है, की स्थापना 2016 में हुई, तबसे इसका नौ बार विस्तार हुआ है। इसमें अधिकांश सदस्य विकासमान देश होने के बावजूद ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा समेत अनेक विकसित देश भी शामिल हुए हैं। इसका प्रभाव एशिया विकास बैंक से बहुत हद तक बढ़ा है।

इधर के तीन वर्षों में एआईआईबी ने 18 देशों के 46 मुद्दों के लिए 8.5 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है जो यातायात, ऊर्जा, संचार और शहरीय विकास से जुड़े हैं। ये मुद्दे मुख्य रूप से एशिया में विद्यमान हैं। दूसरी तरफ विकसित देशों की निवेश जरूरतों को भी पूरा किया गया है। अनुमान है कि भविष्य में एशिया में बुनियादी उपकरणों के निवेश की कमी प्रति वर्ष 14 खरब अमेरिकी डॉलर तक रहेगी। अफ्रीका में प्रति वर्ष 68 से 108 अरब अमेरिकी डॉलर का अभाव रहेगा। विकसित देशों को एशिया और अफ्रीका में बुनियादी उपकरणों के निर्माण में पूंजी लगाने से इनके आर्थिक विकास का लाभ मिलेगा।

उधर, एआईआईबी ने विश्व के आर्थिक शासन के लिए अपना योगदान पेश किया है। यह माना जाता है कि विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ आदि ने नव उभरती शक्तियों व बाजारों की वृद्धि के प्रति प्रतिक्रियाएं नहीं दीं। जबकि एआईआईबी में विकासमान देशों को अधिकाधिक शेयर और बोलने का अधिकार प्राप्त है। यह विश्व के आर्थिक शासन को निष्पक्ष और प्रभावी बनाने के लिए मददगार है। लेकिन एआईआईबी केवल मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय संरचना में सुधार लाएगा, वह दूसरे बहुपक्षीय विकास बैंकों का स्थान नहीं लेना चाहता है। कभी कभी वह दूसरे बैंकों के साथ सहयोग करता है। मिसाल है कि एआईआईबी और विश्व बैंक ने इंडोनेशिया में बस्ती उन्नयन परियोजना पूरी की।

एआईआईबी चीन के अनुमोदन में स्थापित है और वह चीन द्वारा विश्व के लिए प्रस्तुत की गयी सार्वजनिक उत्पादन वस्तु है। चीन ने एआईआईबी को अविचल रूप से समर्थन दिया है और इस बैंक के संचालन के लिए बड़ी मात्रा में पूंजी लगायी है। चीन ने बैंक के रोजाना काम में हस्तक्षेप नहीं किया और बैंक के निर्णय में भी कोई दखल नहीं दिया। बैंक के उपाध्यक्ष, जर्मनी के जोआचिम वॉन एम्सबर्ग ने कहा कि चीन एक जिम्मेदारना शेयरधारी है।

एआईआईबी के सदस्यों की संख्या सौ तक पहुंचने से बैंक के विकास में मील का पत्थर माना जाता है। बैंक के भूतपूर्व अध्यक्ष रॉबर्ट बी. ज़ॉलिक ने कहा था कि एआईआईबी ने शासन, पारदर्शिता, अंतर्राष्ट्रीय मानक तथा सहयोग के संदर्भ में मिसाल कायम की है। भविष्य में एआईआईबी उच्च मानक के स्तर पर काम करेगा और विश्व वृद्धि तथा आर्थिक शासन के लिए नया योगदान पेश करेगा।

( हूमिन )



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