(इंटरव्यू) चीन की भौतिक, डिजिटल और सांस्कृतिक संयोजकता करने की कोशिश : डॉ. स्वर्ण सिंह

2019-06-10 15:12:18
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चीन ने दूसरे बेल्ट एंड रोड फोरम की मेजबानी करने के तीन हफ्ते बाद एशियाई सभ्यताओं के बीच आदान-प्रदान और आपसी सीख बढ़ाने को लेकर एशियाई सभ्यताओं का संवाद सम्मेलन आयोजित किया। इस संवाद सम्मेलन में 47 एशियाई देशों और एशिया से बाहर के देशों के प्रतिभागी, सांस्कृतिक विविधता का जश्न मनाने, सांस्कृतिक संबंध बढ़ाने और समुदाय की एक नई भावना को बढ़ावा देने के लिए इकट्ठा हुए।

इस सम्मेलन के दौरान, चाइना रेडियो इन्टरनेशनल (सीआरआई) ने नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में कूटनीति और निरस्त्रीकरण के प्रोफेसर, डॉ. स्वर्ण सिंह के साथ एक खास इन्टरव्यू किया, जिसमें उन्होंने कहा, “यदि बेल्ट एंड रोड एक तरह से ‘हार्डवेयर’ है तो सभ्यताओं का संवाद सम्मेलन उसका ‘सॉफ्टवेयर’ है।” उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में चीन की भौतिक, डिजिटल और सांस्कृतिक संयोजकता करने की कोशिश है। यह भविष्य की ओर सोचने का नतीजा है।

प्रोफेसर स्वर्ण सिंह ने ख़ास इंटरव्यू में यह भी कहा, “जब भी सभ्यताओं के बीच संवाद होने की बात होती है तो उसमें भारत और चीन का उल्लेख जरूर होता है। मानव इतिहास में भारत और चीन के बीच सांस्कृतिक आवाजाही सबसे ज्यादा पुरानी है।” उनका मानना है कि अगर हम चीन और भारत को दो बड़ी सभ्यताओं की दृष्टि से देखें तो दोनों देशों के बीत तालमेल बिठाने में किसी तरह की कोई समस्या नहीं आएगी।

विश्व पर एशियाई सभ्यताओं के प्रभाव के बारे में अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रोफेसर स्वर्ण सिंह ने कहा, “विश्व की अनेक सभ्यताओं की उपज एशिया में हुई है, और उन सभी सभ्यताओं का विश्व पर बड़ा गहरा प्रभाव रहा है।” उनका कहना है कि आज एशियाई सभ्यताओं के बीच तालमेल बढ़ता है, उनके बीच आदान-प्रदान बढ़ता है तो विश्व पर मजबूत प्रभाव होगा, खासतौर पर चीन और भारत का।

प्रोफेसर स्वर्ण सिंह ने सीआरआई को दिए ख़ास इंटरव्यू में चीन में भारतीय फिल्मों की बढ़ती लोकप्रियता, विश्व पर एशिया का अहम रोल आदि अनेक मुद्दों पर भी बात की।

(अखिल पाराशर)

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