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(इंटरव्यू-कौंसुल जनरल) भारत को जानने व समझने के लिए उत्सुक हैं चीनी लोग

2019-06-05 15:32:40
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हाल के वर्षों में चीनी लोगों में भारत को जानने और समझने की उत्सुकता बढ़ी है। बात चाहे भारतीय खाने की हो, बॉलीवुड की या फिर आईटी क्षेत्र की। चीनी नागरिक भारत में हो रहे विकास को करीब से देखना चाहते हैं। गौरतलब है कि विश्व में सबसे बड़े पर्यटक समूह चीनी नागरिक हैं। ऐसे में भारत सरकार चाहती है कि ये पर्यटक सिर्फ यूरोप, अमेरिका और अन्य देशों में न जाएं बल्कि भारत भी पहुंचें। इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। चीनी लोगों को पेश आने वाली भाषा संबंधी दिक्कतों को दूर भी किया जा रहा है।

इसी बीच चीन-भारत संबंधों, हिंदी की भूमिका व पर्यटन आदि को लेकर शांगहाई स्थित भारत के कौंसुल जनरल अनिल कुमार राय ने सीआरआई के साथ खास बात की।

राय कहते हैं कि चीन में हिंदी का प्रचार-प्रसार बढ़ने के पीछे दो महत्वपूर्ण बिंदु जिम्मेदार कहे जा सकते हैं। पहला यह कि चीनियों में भारत को जानने और समझने की जिज्ञासा बढ़ी है। खासतौर पर चीन का युवा वर्ग भारत को भारत के नजरिए से देखना चाहता है। इस संदर्भ में हमने देखा कि अगर हम इन लोगों में हिंदी के प्रति रुचि को बढ़ा सके तो इनमें भारत के प्रति मौलिक सोच स्थापित कर सकते हैं। इसके साथ-साथ आप देखेंगे कि चीन के नागरिक विश्व में सबसे बड़े पर्यटन समूह हैं। और हम यह चाहते हैं कि ये पर्यटक सिर्फ यूरोप, अमेरिका और अन्य देशों में न जाएं बल्कि भारत भ्रमण भी करें। जब हमने चीन सरकार के प्रतिनिधियों और लोगों के साथ चर्चा की तो पता चला कि भाषा की चुनौती एक महत्वपूर्ण चुनौती है। जिसके चलते कई लोग भारत नहीं जा पाते हैं। इसके लिए हमने सुझाव मांगे कि इस बाबत क्या किया जाना चाहिए। अधिकतर लोगों ने सर्वे में यह बताया कि अगर हमें चीनी भाषा बोलने वाला व्यक्ति भारत में मिल जाय तो हमारी असुविधा कम हो जाएगी। इस समस्या को सुलझाने के लिए भारत में काम हो रहा है। अधिकतर विश्वविद्यालय चीनी भाषा में शिक्षण को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके साथ ही हमने दूसरी वैकल्पिक व्यवस्था के बारे में सोचा कि क्यों न हम चीन में ही हिंदी को बढ़ावा दें, ताकि चीनी लोग हिंदी पढ़ सकें और समझ सकें। इसके फायदे ये होंगे कि चीनी नागरिक मौलिक रूप से भारत को समझ पाएंगे।

हमें पक्का विश्वास है कि जब कोई भी सभ्यता, कोई भी देश भारतीयता को समझ लेगा तो भारत के प्रति उसके नजरिए में मूलभूत परिवर्तन आ जाएगा। तो हमने यह सोचा कि शंघाई के विश्वविद्यालय में हिंदी पढ़ाई जाती है। यहां पर हमारे पास संसाधन भी उपलब्ध हैं, साथ ही भारतीय समुदाय के लोगों का सहयोग भी हमें मिला हुआ है। तो हम क्यों न इसे एक आंदोलन के रूप में लें, क्यों न हम उनकी ऊर्जा को एक नई दिशा दें। जब मैं नवंबर 2017 में यहां आया, तभी से मेरे दिमाग में यह विचार था कि हिंदी के बारे में हमें कुछ करना चाहिए। थोड़े ही समय में हम लोगों को संगठित कर एक मंच पर लाए।

चीन के बारे में मेरा जो निजी विचार है तो अधिकतर चीनी भारत को महात्मा बुद्ध से जोड़कर देखते हैं। महात्मा बुद्ध के काल के बाद बहुत समय बीत चुका है। हाल के दौर में यहां के लोग भारत को भारतीय फिल्मों के नजरिए से देखते हैं। इसके साथ ही नए दौर में लोगों ने हमें एक आईटी सुपरपावर और दुनिया के प्रसिद्ध दवा निर्माता देश के रूप में भी जाना है। हम चाहते हैं कि भारत के बारे में चीनी लोगों तक जानकारी शुद्ध रूप में पहुंचे। कहने का मतलब है कि यहां के नागरिकों को फर्स्ट हैंड इंफॉर्मेशन सटीक रूप में मिलनी चाहिए।

अनिल आज़ाद पांडेय

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