टिप्पणी:मानव सभ्यता की अच्छाई और बुराई में कोई फ़र्क नहीं

2019-05-15 20:39:14
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टिप्पणी:मानव सभ्यता की अच्छाई और बुराई में कोई फ़र्क नहीं

टिप्पणी:मानव सभ्यता की अच्छाई और बुराई में कोई फ़र्क नहीं

“एशियाई सभ्यताओं के बीच आदान-प्रदान व आपसी सीख और साझे भाग्य वाला समुदाय”थीम वाला एशियाई सभ्यताओं का संवाद सम्मेलन (सीडीएसी) 15 मई को पेइचिंग में उद्घाटित हुआ। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने अपने दिए गए मुख्य भाषण में एशियाई सभ्यता और मानव सभ्यता के बीच आदान-प्रदान और आपसी सीख पर चीन की विचारधारा पेश की। उन्होंने बल देते हुए कहा कि मानव के बीच केवल रंग और भाषा का फर्क है, सभ्यता का अच्छाई और बुराई में कोई फ़र्क नहीं है। उनकी इस विचारधारा को सम्मेलन में उपस्थित प्रतिनिधियों की सक्रिय प्रतिक्रिया मिली।

हाल में कुछ पश्चिमी राजनीतिज्ञों ने नए चरण की“सभ्यताओं के बीच विवाद वाली विचारधारा”और“भिन्न-भिन्न सभ्यताओं के बीच अवश्य ही संघर्ष पैदा होगा”वाला विचार पेश किया। ऐसी पृष्ठभूमि में पाँच साल पहले राष्ट्रपति शी चिनफिंग के आह्वान पर सीडीएसी सम्मेलन ठीक समय पर आयोजित हो रहा है। एशियाई सभ्यताओं के आदान-प्रदान और संवाद का शानदार सम्मेलन में राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने विभिन्न एशियाई सभ्यताओं के बीच, एशियाई सभ्यताओं और वैश्विक सभ्यताओं के बीच संबंध, एशियाई और मानव जाति के साझे भाग्य वाले समुदाय के निर्माण को आगे बढ़ाने के बारे में उन्होंने चार सूत्रीय सुझाव पेश किए। जिस पर लोगों का व्यापक ध्यान केंद्रित हुआ है।

मानव जाति के समान चुनौतियों के मुकाबले में संस्कृति और सभ्यता की शक्ति जरूरत है। विश्व में बहुध्रुवीकरण, आर्थिक भूमंडलीकरण, सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक सूचनाकरण के युग में प्रभुत्ववाद और व्यापारिक दादागिरी होती है। मानव जाति की संस्कृति और सभ्यता की शक्ति को कभी-कभार अनदेखा किया जाता है। एशिया में शांति, अमनचैन, समान समृद्धि, खुलेपन और एकता की प्राप्ति के लिए आर्थिक वैज्ञानिक तकनीकी शक्ति की आवश्यकता है। इसके साथ ही संस्कृति और सभ्यता की शक्ति की भी जरूरत है। शी चिनफिंग ने बल देते हुए कहा कि सभ्यताओं के बीच आपसी सम्मान और समानता होनी चाहिए। हरेक सभ्यता की अपनी मौजूदगी का मूल्य होता है। सभ्यता का अच्छाई और बुराई का कोई फ़र्क नहीं है। खुद की जाति और सभ्यता को दूसरे की जाति और सभ्यता से ऊँचा मानना, दूसरे की सभ्यता को बदलना, यहां तक कि उसका स्थान लेना, इस प्रकार का विचार मूर्खतापूर्ण है, जिसकी कार्रवाई विपत्ति जैसी है। अगर मानव की सभ्यता एक ही रंग, एक ही नमूना हो गया, तो विश्व बहुत सरल होगा और उबाऊ भी।

राष्ट्रपति शी चिनफिंग का यह निष्कर्ष कुछेक पश्चिमी राजनीतिज्ञों के तथाकथित“सभ्यताओं के बीच विवाद वाली विचारधारा”का जबरदस्त जवाब है।“आपसी सम्मान और समान व्यवहार पर कायम रहना, दूसरे की अच्छाई से सीखते हुए साथ-साथ बेहतर होना, खुलेपन व समावेश और आपसी सीख व एक दूसरे से सबक लेना, युग के साथ आगे बढ़ते हुए नवाचार और विकास करना”ये राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा प्रस्तुत चार सूत्रीय विचार हैं।

चीन और एशियाई देशों के बीच सभ्यताओं के आदान-प्रदान को मजबूत करने के लिए शी चिनफिंग ने अपने भाषण में सिलसिलेवार कदम उठाए, जिनमें एशियाई सांस्कृतिक अवशेषों के संरक्षण, एशियाई उत्कृष्ट रचनाओं के एक दूसरी भाषा में अनुवाद, एशियाई फिल्म और टीवी आदान-प्रदान सहयोग, थिंक-टैंक आदान-प्रदान सहयोग नेटवर्क की स्थापना और एशिया में पर्यटन संवर्धन योजना का कार्यान्वयन आदि शामिल हैं।

“हम खुद की सभ्यता में जीवन शक्ति से भरकर दूसरे देश की सभ्यता के विकास को अनुकूल स्थिति तैयार करें, ताकि विश्व की सभ्यता वाले उद्यान में रंगबिरंगे फूल खिल सके।”यह राष्ट्रपति शी चिनफिंग के भाषण में व्यापक मान्यता वाला विचार है। क्योंकि उनकी नजर में आज का चीन न केवल चीन का चीन है, बल्कि एशिया, यहां तक विश्व का चीन ही है। इस प्रकार का चीन भविष्य में अवश्य ही और खुले रवैये से दुनिया को गले लगाएगा और ज्यादा जीवित शक्ति होने वाली सभ्यता की उपलब्धियों से विश्व को योगदान देगा।

(श्याओ थांग)


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