तिब्बत में ल्वोपा संस्कृति का संरक्षण और उत्तरवर्तन

2019-04-03 19:12:28
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दक्षिण पूर्वी तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के न्यिंग-ची शहर में मीलिन काउंटी के नानई ल्वोपा जातीय जिले में 132 परिवार के 553 लोग बसे हुए हैं, जिनमें 98 परिवार के 417 लोग ल्वोपा जाति के हैं। इस जिले के अधीन छ्योंगलिन गांव और छाईचाओ गांव चीनी अल्पसंख्यक जाति ल्वोपा जाति बहुल गांव है। स्थानीय सरकार ल्वोपा जातीय संस्कृति के संरक्षण और पर्यटन विकास को जोड़कर ल्वोपा संस्कृति का लगातार उत्तरवर्तन करने में प्रयासरत है।

छ्योंगलिन गांव में ल्वोपा जाति का युवक तान्यांग पहले माता-पिता के साथ पहाड़ पर रहता था, जो तीरंदाजी से शिकार करने में जीवन बिताता था। बाद में वह गांव में स्थानांतरित हुआ और धीरे-धीरे खेती करना सीखा। तान्यांग ने कहा कि देश में ल्वोपा जातीय संस्कृति पर बहुत महत्व दिया जाता है। इधर के सालों में स्कूलों में ल्वोपा भाषा की कक्षा होती है। तान्यांग के पास तीन बच्चे हैं। घर वाले ल्वोपा भाषा से बातचीत करते हैं। ल्वोपा जातीय भाषा की लिखित भाषा नहीं है।

छाईचाओ गांव में रहने वाला तावा ल्वोपा जातीय वस्त्र का उत्तराधिकारी है। वह अपने चार शिष्यों के साथ पारंपरिक ल्वोपा वस्त्र आभूषण बनाता है। सरकार उन्हें कच्ची सामग्री देती है और वे बुनाई और सिलाई करके कपड़ा बनाते हैं। वर्तमान में तावा के पास एक ल्वोपा जातीय वस्त्र कारखाना है, सालाना आय 60 हज़ार युआन से अधिक है।

साल 2007 में“मीलिन ल्वोपा जाति की कपड़ा बुनाई तकनीक”को तिब्बत स्वायत्त प्रदेश स्तरीय दूसरे खेप वाली गैर-भौतिक सांस्कृतिक विरासतों की सूची में शामिल किया गया। साल 2008 में“मीलिन ल्वोपा वस्त्र और आभूषण”को दूसरे खेप वाले राष्ट्र स्तरीय गैर-भौतिक सांस्कृतिक विरासतों की सूची में शामिल हुआ। साल 2017 में“ल्वोपा के पूर्वज की कहानी”को तीसरे खेप वाले राष्ट्र स्तरीय गैर-भौतिक सांस्कृतिक अवशेष की सूची में शामिल किया गया। वर्तमान में ल्वोपा जाति के पारंपरिक बांसुरी बुनाई, कपड़ा बुनाई और ल्वोपा तलवार नृत्य आदि संस्कृति और पर्यटन के विकास को जोड़ा जाता है, जिससे स्थानीय जातीय विशेषता वाले पर्यटन उद्योग के विकास को आगे बढ़ाया गया, बल्कि पर्यटन से ल्वोपा संस्कृति के संरक्षण और विकास को भी संवर्धन मिला।

(श्याओ थांग)


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