पंचन अरडेनी च्वोग्यीग्याकॉः लोकतांत्रिक सुधार तिब्बती बौद्ध धर्म के विकास व प्रगति का अहम मोड़

2019-04-03 11:01:31
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पंचन अरडेनी च्वोग्यीग्याकॉः लोकतांत्रिक सुधार तिब्बती बौद्ध धर्म के विकास व प्रगति का अहम मोड़

पंचन अरडेनी च्वोग्यीग्याकॉः लोकतांत्रिक सुधार तिब्बती बौद्ध धर्म के विकास व प्रगति का अहम मोड़

सीपीपीसीसी की स्थायी सदस्य और चीनी बौद्ध धर्म संघ के उपाध्यक्ष 11वें पंचन अरडेनी च्वोग्यीग्याकॉ ने हाल में पेइचिंग में कहा कि चीन में लोकतांत्रिक सुधार लाखों भूदासों की मुक्ति पाने की महान क्रांति है। साथ ही तिब्बती बौद्ध धर्म के विकास व प्रगति का अहम मोड़ भी है।

28 मार्च को तिब्बत में दस लाख भूदासों की मुक्ति की 60वीं वर्षगांठ की संगोष्ठी पेइचिंग के जन वृहद भवन में आयोजित हुई। इस मौके पर पंचन अरडेनी. च्वोग्यीग्याकॉ ने कहा कि तिब्बत में लोकतांत्रिक सुधार से पहले तिब्बती बौद्ध धर्म एक शुद्ध धार्मिक विश्वास नहीं था, बल्कि भूदास-मालिकों द्वारा भूदासों को यातना देने का राजनीतिक माध्यम था। तिब्बत में लोकतांत्रिक सुधार ने तिब्बती समाज के अंधेरे से उज्जवलता की ओर जाने, बंद व गरीबी से खुले और समृद्धि की ओर विकसित होने की प्रक्रिया शुरू की है। लोकतांत्रिक सुधार के बाद तिब्बत में राजनीति को धर्म से अलग किया गया।

पंचन अरडेनी. च्वोग्यीग्याकॉ ने कहा कि चीन एकजुट बहुजातीय देश है। प्राचीन काल में तिब्बत चीन का एक अखंडनीय भाग है। तिब्बती जाति के लोग चीन की विभिन्न अन्य जातियों के लोगों के साथ मिलकर देश के पुनरेकीकरण और जातीय एकता की रक्षा करते हैं। नये युग में तिब्बती बौद्ध धर्म के जीवित बुद्ध होने के नाते उन्होंने यह भी कहा कि वे तिब्बती बौद्ध धर्म की देशभक्ति परम्परा का उत्तराधिकार कर तिब्बती बौद्ध धर्म के समाजवादी समाज के अनुकूल में आगे विकसित करेंगे। देश के पुनरेकीकरण और जातीय एकता की दृढ़ रक्षा करेंगे, ताकि जनता को सुखमय जीवन दे सकें।

(श्याओयांग)

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