तिब्बत में लोकतांत्रिक सुधार की 60वीं वर्षगांठ के प्रति श्वेत पत्र

2019-03-27 17:32:10
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चीनी राज्य परिषद के सूचना कार्यालय का संवाददाता सम्मेलन

चीनी राज्य परिषद के सूचना कार्यालय ने 27 मार्च को "ग्रेट लीप: तिब्बत में लोकतांत्रिक सुधार के 60 साल" शीर्षक से श्वेत पत्र प्रकाशित किया। जिसमें सामंती भूदास व्यवस्था का खात्मा, उत्पादन शक्तियों की मुक्ति, विभिन्न कार्यों का विकास, पारिस्थितिक सभ्यता का निर्माण, धार्मिक विश्वास की स्वतंत्रता, जातीय समानता और तिब्बत विकास का नया युग आदि भाग शामिल हैं।

श्वेत पत्र के अनुसार वर्ष 2019 तिब्बत में लोकतांत्रिक सुधार की 60वीं वर्षगांठ है। लोकतांत्रिक सुधार से तिब्बत के इतिहास में सबसे गहन सामाजिक परिवर्तन हुआ है। इससे तिब्बत में अँधेरी सामंती भूदास व्यवस्था खत्म की गयी और तिब्बती जनता देश व समाज की मालिक बनी। लोकतांत्रिक सुधार करने से तिब्बत का शानदार विकास करने का भविष्य तय हुआ। केंद्र और देश के दूसरे क्षेत्रों की सहायता से तिब्बती जनता ने अथक प्रयासों के जरिये अपनी जन्मभूमि को समृद्ध, प्रगतिशील, बेहतर वातावरण प्राप्त और सुखमय नया तिब्बत बनाया है।

श्वेत पत्र में कहा गया है कि लोकतांत्रिक सुधार तिब्बत में विभिन्न जातियों ने देश की तमाम जनता के साथ साथ समानता, आपसी लाभ और सामंजस्य के जातीय संबंधों का निर्माण किया है। वर्तमान में शी चिनफिंग के नये युग में चीनी विशेषता वाली समाजवादी विचारधारा के मार्गदर्शन में तिब्बती जनता और अधिक सुखमय और सुन्दर जीवन तथा चीनी राष्ट्र के महान पुनरुद्धार के लिए संघर्ष कर रही है। तिब्बत का और शानदार भविष्य सुनिश्चित होगा।

श्वेत पत्र के मुताबिक चीन सरकार ने सन 1988 में जूमूलांगमा चोटी यानी एवेरेस्ट पर्वत का प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र स्थापित किया। उस समय से अभी तक तिब्बत में कुल 47 प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र स्थापित किये गये हैं जिन के कुल क्षेत्रफल 4.1 लाख वर्ग किलोमीटर है। तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के पारिस्थितिक वातावरण निगरानी विभाग के पदाधिकारी च्या श्याओ ह्वा ने कहा, “प्राकृतिक संरक्षण के अनेक कदम उठाने से तिब्बत विश्व में सबसे श्रेष्ठ प्राकृतिक वातावरण प्राप्त क्षेत्र बना रहता है। तिब्बत में निगरानी की गयी सभी झीलों और नदियों में जल गुणवत्ता शत प्रतिशत श्रेष्ठ साबित है। वर्ष 2018 में ल्हासा समेत सात शहरों और क्षेत्रों में जलवायु की श्रेष्ठता भी 98.2 प्रतिशत तक जा पहुंची है।”

शिक्षा के संदर्भ में श्वेत पत्र ने कहा कि पुराने समय में तिब्बत में केवल कुलीन परिवार के बच्चों को शिक्षा लेने का अधिकार प्राप्त था। उन भूदास, जिन की जनसंख्या कुल जनसंख्या का 95 प्रतिशत भाग रही थी, को शिक्षा लेने का मौका नहीं था। तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की पार्टी कमेटी के एक उच्च अफसर तावा ने कहा कि वर्तमान में तिब्बत में एक संपूर्ण आधुनिक शिक्षा व्यवस्था कायम हो चुकी है। विभिन्न जातियों के लोगों के शिक्षा लेने वाले अधिकार की गारंटी की गयी है। तावा ने कहा, “सन 2017 तक तिब्बत में कुल 1239 किंडर-गार्टन, 806 प्राइमरी स्कूल, 132 मिडिल स्कूल तथा सात उच्च शिक्षालय स्थापित किये गये हैं। विभिन्न स्तरीय स्कूलों में से स्नातक छात्रों की संख्या भी सन 1959 की 18 हजार से 5.3 लाख तक जा पहुंची है।”

श्वेत पत्र में यह भी कहा गया है कि 60 सालों के विकास के बाद तिब्बत को पिछड़ी चिकित्सीय स्थिति से मुक्ति हुई, आम तौर पर देश के दूसरे प्रांतों और स्थलों के साथ-साथ विकास साकार हुआ। तिब्बत में विभिन्न जातियों के लोगों के स्वास्थ्य अधिकार को कारगर रूप से गाटंरी दी गई है। तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के विकास और सुधार समिति के उप प्रधान रन चिंगतोंग ने कहा,“20वीं शताब्दी के 70 के दशकों के अंत में नागरिकों को पीड़ित संक्रमण रोग बुनियादी तौर पर काबू में आ गया। विभिन्न संक्रमण रोग मामले और मृत्यु दर काफी हद तक घट गई।”

श्वेत पत्र से पचा चला कि वर्तमान में तिब्बत में 1787 धार्मिक स्थल उपलब्ध हैं, जहां 46 हज़ार से अधिक भिक्षु और भिक्षुणी रहते हैं। तिब्बती जाति और दूसरे अल्पसंख्यक जाति के लोग अपनी इच्छा के अनुसार धार्मिक गतिविधियों में भाग लेते हैं। इसकी चर्चा करते हुए तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के स्थाई मामले पर उपाध्यक्ष नोर्बू डोन्ड्रुप ने कहा,“कानून में हर व्यक्ति का धार्मिक विश्वास की गारंटी दी जाती है। लोग इस धर्म का विश्वास कर सकते हैं और उसी धर्म के अनुयायी बन सकते हैं। नागरिकों के धार्मिक विश्वास की मुक्ति पर सीमित नहीं रहता।”

श्वेत पत्र के अनुसार, 60 सालों के विकास के चलते तिब्बत में जनसंख्या वर्ष 1959 की 12.28 लाख से साल 2018 की 34.382 लाख तक पहुंच गई। तिब्बत वासियों की औसतन आयु साल 1959 की 35.5 से बढ़कर वर्तमान की 68.2 तक पहुंच गई है।




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