चीन में विश्व हिन्दी दिवस मनाया गया

2019-03-05 11:26:54
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सोमवार को चीन स्थित भारतीय दूतावास में विश्व हिन्दी दिवस मनाया गया। इस उपलक्ष्य में एक खास समारोह का आयोजन हुआ जिसमें चीन के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए हिन्दी सीखने वाले चीनी छात्रों, हिन्दी के शिक्षकगणों, और पेइचिंग में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों को आमंत्रित किया गया। वैसे तो यह दिवस हर साल 10 जनवरी को मनाया जाता है, लेकिन उस दौरान चीन में हिन्दी का अध्ययन करने वाले छात्रों और शिक्षकों की व्यस्तता और एग्जाम के चलते भारतीय दूतावास ने मार्च में ही विश्व हिन्दी दिवस मनाया जाना बेहतर समझा।

इस समारोह में चीन में हिन्दी भाषा के वरिष्ठ शिक्षक और पेइचिंग विश्वविद्लय में हिन्दी विभाग के प्रमुख, प्रो. च्यांग जिंगकुई मुख्य अतिथि थे। भारतीय राजदूत विक्रम मिश्री और प्रो. ज्यांग जिंगकुई ने दीप प्रज्वलित कर समारोह की शुरूआत की। इस अवसर पर स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र की ओर से एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में संगीत शिक्षक सुश्री सीमा नितिन दामले और उनकी सहयोगियों ने एक मधुर गीत वंदना प्रस्तुत की। इसके अलावा, वहां हिन्दी पुस्तकों की प्रदर्शनी में लगायी गई, जिसमें चाइना रेडियो इंटरनेशनल (सीआरआई) के संवाददाता अखिल पाराशर की पुस्तक “चीन में अविस्मरणीय पारी” भी मौजूद थी।

भारतीय राजदूत विक्रम मिश्री ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, “विश्व हिन्दी दिवस, न केवल हिन्दी भाषा को विश्व पटल पर बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, बल्कि इस जीवंत भाषा को बेहतर जानने और समझने के लिए एक विशिष्ट अवसर भी प्रदान करता है।”

उन्होंने अपने स्वागत सम्बोधन में यह भी कहा, “हिन्दी भाषा, भारत में विविधताओं में एकता, का एक प्रमुख चिह्न है। यह भारत की आधिकारिक भाषा ही नहीं, बल्कि प्रेम, मैत्री और संवाद की भाषा भी है, जिसने लोगों के भावनात्मक और वैचारिक स्वरूप को निरंतर संगठित और सशक्त बनाया है।”

राजदूत मिश्री का मानना है कि आज विश्व भर मे हिन्दी भाषा की लोकप्रियता निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने चीन और भारत के बीच संबंध पर रोशनी डालते हुए कहा, “भारत और चीन विश्व की दो महान सभ्यताऐं हैं, उनके द्विपक्षीय संबंधों में, विशेषतः सांस्कृतिक क्षेत्र और लोगों के आपसी आदान-प्रदान के क्षेत्र में हिन्दी भाषा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।”

प्रो. ज्यांग जिंगकुई ने अपने व्याख्यान में कहा कि भाषा सभ्यता की आत्मा होती है और राष्ट्र की भावना होती है। हिन्दी एक भाषा नहीं है, बल्कि एक संस्कृति है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्व हिन्दी दिवस एक बहुत महत्वपूर्ण दिवस है जिसका उद्देश्य दुनिया भर में हिन्दी का प्रचार-प्रसार करना है। इस दिवस से उन्हें बहुत प्रेरणा मिलती है। आज चीन में 12 से भी अधिक विश्वविध्यालयों और संस्थानों में हिन्दी भाषा की पढ़ाई हो रही है। हिन्दी भाषा चीन और भारत की संस्कृति के विकास में अहम भूमिका निभा रही है।

इस समारोह के दौरान चीन के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आये हिन्दी सीखने वाले चीनी छात्रों ने हिन्दी में व्याख्यान दिया और कविताओं आदि का भी वाचन किया। कुछ चीनी छात्रों ने हिन्दी में स्वरचित कुछ लेख पढ़ कर भी सुनाये। पेकिंग विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों ने नाटक के जरिए भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के मेहनत, धीरज और ढृढ़ निश्चय के स्वरूप को उजागर किया।

दरअसल, विश्व हिन्दी दिवस की बुनियाद 10 जनवरी, 1975 को पड़ी जब नागपुर में पहले विश्व हिन्दी सम्मेलन का आयोजन किया गया था। लेकिन 10 जनवरी को हर साल विश्व हिन्दी दिवस मनाने की घोषणा साल 2006 में हुई।

बता दें कि हिन्दी भारत की आधिकारिक भाषा है और भारत के अधिकांश हिस्से में यह भाषा बोली जाती है। यह भाषा चौथी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। यह भाषा केवल भारत में ही नहीं बोली जाती, बल्कि विदेशों में बसे भारतीय भी आपस में हिन्दी में बात करना ज्यादा पसंद करते हैं।

(अखिल पाराशर)

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