चीन में प्रकाशित पहली हिंदी पत्रिका‘समन्वय हिंची’ का लोकार्पण दिल्ली और चीन में

2019-01-27 18:42:40
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चीनी और भारतीय लेखकों की संयुक्त कोशिश से प्रकाशित पहली हिंदी पत्रिका समन्वय हिंची का लोकार्पण गणतंत्र दिवस के मौके पर शांगहाई और दिल्ली में किया गया। इस दौरान सैंकड़ों की संख्या में लोगों की मौजूदगी ने आयोजकों का उत्साह दोगुना कर दिया। कवर सहित 108 पृष्ठों वाली पत्रिका के प्रवेशांक में कई चीनी और भारतीय लेखकों की रचनाएं शामिल हैं। यह अपने तरह की पहली पत्रिका है जिसमें संपादक और लेखक मंडल न केवल भारतीय और चीनी हैं, बल्कि उन्होंने अपनी अभिव्यक्ति के लिए हिन्दी को ही माध्यम बनाया है।

शांगहाई में गणतंत्र दिवस पर कोंसलावास के प्रधान कोंसुल अनिल कुमार राय ने सभी भारतीयों को बधाई दी। इसके साथ ही उन्होंने हिंदी पत्रिका समन्वय हिंची का लोकार्पण पत्रिका के संपादक मंडल के सदस्यों नवीन चन्द्र लोहनी, पल्लवी गोरे, अनीता शर्मा के साथ किया। कार्यक्रम में पत्रिका का क्यूआर कोड भी जारी किया गया।

पत्रिका के प्रधान संपादक एवं सिसु में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद पीठ के आचार्य नवीन चन्द्र लोहनी ने कहा कि दुनिया में तमाम देशों में हिन्दी भाषी पहुँच रहे हैं और वे अपनी भाषा को अभिव्यक्ति के साथ साथ रचनात्मक लेखन में भी उतार रहे हैं। पत्रिका ने भारतीयों को ही नहीं बल्कि दुनिया भर के हिंदी प्रेमियों को एक मंच सुलभ कराया है। इसके साथ ही उन्होंने सभी से भविष्य में पत्रिका के साथ जुड़ने का आग्रह करते हुए कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि हम हिंदी के प्रचार-प्रसार में अपना योगदान दें।

शांगहाई में भारतीय कौंसलावास के अधिकारियों कर्मचारियों सहित भारतीय समुदाय के लगभग 4 सौ से अधिक लोग उपस्थित थे।कार्यक्रम का संचालन एचओसी अपर्णा गणेशन ने किया और पुरस्कार वितरण हर्षिता राय ने।

उधर दिल्ली में भी पत्रिका का जवाहर-लाल नेहरू विश्वविद्यालय में लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में पूर्वी एशिया अध्ययन केंद्र के अध्यक्ष प्रो. श्रीकान्त कोंडापल्ली, पेइचिंग विश्वविद्यालय चीन के च्यांग चिंगख्वेई, चीन अध्ययन केंद्र के प्रो. बीआर दीपक, शांगहाई विश्वविद्यालय के डॉ. राजीव रंजन, हिंदी विभाग जेएनयू के डॉ. राजेश पासवान, संपादक मंडल की सदस्य रीना गुप्ता सहित दर्जनों लोग शामिल थे। कार्यक्रम में लोगों ने पत्रिका की आवश्यकता और सामग्री पर चर्चा की, साथ ही भविष्य में पत्रिका को जारी रखने के लिए मिलकर काम करने पर जोर दिया।

गौरतलब है कि पत्रिका में बीजिंग, बंगलौर, सूचो, हांगचो, बनारस, लंदन, शिआन, क्वांगचो, खुनमिंग, क्वांगतोंग, शाओशिंग, शांगहाई आदि तमाम जगहों से लेखक जुड़े हैं। पत्रिका में सांस्कृतिक, व्यावसायिक, सामाजिक, विज्ञान, खेल,पर्यावरण, चीन की हाइस्पीड रेल, चाइना रेडियो इंटरनेशनल के इतिहास, भारत-चीन के अनुभव, चीनी शहरों के संबंध में गंभीर विश्लेषणात्मक लेख, संस्मरण, यात्रा वृतांत और सूचनापरक आलेखों के साथ कहानी, मूल व अनूदित उपन्यास अंश और चीनी कविताओं के अनुवाद भी हैं। जबकि भारतीय कोंसलावास सहित शांगहाई स्थित कुछ भारतीय संस्थाओं की सांस्कृतिक गतिविधियों पर लेख और चीन के प्रमुख शहरों के हिंदी नाम, चीन में हिंदी शिक्षा व हिंदी मीडिया और चीन की आधी आबादी पर पर भी विशेष सामग्री है।


अनिल आज़ाद पांडेय








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