​चीन के इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ाई जा रही है हिंदी

2019-01-16 15:54:47
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चीन के इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ाई जा रही है हिंदी

स्कूल का टीचिंग स्टाफ

चीन में लंबे समय से विश्वविद्यालयों में हिंदी सिखाई जा रही है। लेकिन शायद ही आपने सुना या पढ़ा होगा कि चीन में किसी स्कूल या विद्यालय स्तर पर हिंदी का अध्यापन करवाया जा रहा है। पर हकीकत में चीन में मौजूद एक अंतर्राष्ट्रीय स्कूल में हिंदी पढ़ाई जाती है। यह स्कूल स्थित है पूर्वी चीन के चच्यांग प्रांत की शाओशिंग काउंटी में खछयाओ नामक शहर में। शाओशिंग इंटरनेशनल नामक इस स्कूल में हिंदी एक विषय के तौर पर शामिल की गयी है। यह स्कूल केंब्रिज इंटरनेशनल एग्ज़ामिनेशन यू.के. का एक एजुकेशन बोर्ड है, जो केंब्रिज यूनिवर्सिटी से संबंद्ध है।

गौरतलब है कि टेक्सटाइल सिटी के नाम से मशहूर खछ्याओ में बड़ी तादाद में विदेशी लोग रहते हैं, जिनमें भारतीयों की संख्या लगभग तीन-चार हजार है। लेकिन अंतर्राष्ट्रीय स्कूल न होने से उन्हें बच्चों की शिक्षा आदि में बहुत मुश्किल आती थी। इसी जरूरत को देखते हुए साल 2010 में इस स्कूल की शुरूआत हुई। हालांकि शुरू से यहां हिंदी पढ़ाए जाने की योजना थी, लेकिन औपचारिक तौर पर हिंदी की क्लास 2013 से चालू हुई। हिंदी को 8वीं क्लास तक वैकल्पिक विषय के रूप में पढ़ाया जाता है। वर्तमान में इस स्कूल में 65 बच्चे हिंदी सीख रहे हैं। जिनमें तीन चीनी बच्चे भी शामिल हैं, जिन्होंने इस बार प्रवेश लिया है।

शाओशिंग इंटरनेशनल स्कूल के प्रिंसिपल आशीष भट्नागर ने सीआरआई के साथ बातचीत की। जिसके मुख्य अंश हम पेश कर रहे हैं।

दाएं से स्कूल के प्रिंसिपल अशीष भट्नागर, शिक्षिका शैली त्गागी व भारतीय कौंसुलेट के अधिकारी प्रशांत

दाएं से स्कूल के प्रिंसिपल अशीष भट्नागर, शिक्षिका शैली त्गागी व भारतीय कौंसुलेट के अधिकारी प्रशांत

भट्नागर कहते हैं कि वे इस बात से बहुत खुश हैं कि चीन में स्थित एक अंतर्राष्ट्रीय स्कूल में हिंदी पढ़ाई जा रही है। क्योंकि हिंदी भारतीय संस्कृति की आत्मा है। चीन में हिंदी पढ़ाया जाना हम सभी भारतीयों के लिए गर्व की बात है। मुझे जब शाओशिंग इंटरनेशनल स्कूल के बारे में पता चला कि यहां पर हिंदी का अध्यापन करवाया जा रहा है तो काफी गर्व की अनुभूति हुई। आज यहां पर मैं प्रधानाचार्य के तौर पर काम कर रहा हूं और हमारे स्कूल में हिंदी विभाग है, जहां बच्चे हिंदी सीख सकते हैं। जैसा कि हम जानते हैं कि चीन में विश्वविद्यालय स्तर पर हिंदी तो पढ़ाई जाती है। लेकिन स्कूल लेवल पर हिंदी का अध्यापन मेरे लिए सच में बहुत खुशी की बात है।

यह स्कूल चच्यांग प्रांत की शाओशिंग काउंटी के एक छोटे से शहर खछ्याओ में मौजूद है। जो केंब्रिज यूनिवर्सिटी से संबद्ध अंतर्राष्ट्रीय स्कूल है। इसकी स्थापना वर्ष 2010 में चीनी और भारतीय लोगों ने मिलकर की। स्कूल के चेयरमेन चीनी व्यक्ति हैं ग्वो थोंगछन। उन्होंने अपनी बेटी स्टेसी छन के साथ खछ्याओ में अंतर्राष्ट्रीय स्कूल का सपना देखा। स्कूल की स्थापना में तीन भारतीय, राजेश सहगल, हेमंत दिया और संजय सुखनानी ने भी अहम भूमिका निभायी। जो स्कूल के आधिकारिक बोर्ड में शामिल हैं। यह चच्यांग प्रांत का एकमात्र स्कूल है, जो केंब्रिज यूनिवर्सिटी से संबद्ध है। भट्नागर बताते हैं कि पहले खछ्याओ में कोई भी इंटरनेशनल स्कूल नहीं था, और यहां रहकर बिजनेस करने वाले विदेशियों के पास अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलवाने का बेहतर विकल्प नहीं था। लेकिन स्कूल शुरू होने के बाद यह कमी पूरी हो गयी। ध्यान रहे कि खछ्याओ टेक्सटाइल संबंधी काम के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। जिसकी वजह से यहां तमाम भारतीय और अन्य देशों के व्यापारी रहते हैं। साथ ही विदेशी व्यापारी यहां टेक्सटाइल की खरीददारी के लिए भी आते हैं।

मूल रूप से उदयपुर राजस्थान के रहने वाले आशीष चीन आने से पहले सऊदी अरब,मलावी और भारत में काम कर चुके हैं। वह कहते हैं खछ्याओ में शुरुआत के बाद से यह स्कूल लगातार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देते हुए तरक्की कर रहा है। इस स्कूल में 3 वर्ष से 18-19 वर्ष की आयु तक के विद्यार्थी पढ़ने आते हैं, जिन्हें केंब्रिज यूनिवर्सिटी के तमाम पाठ्यक्रम पढ़ाए जाते हैं। जिसमें चार अलग-अलग स्तर है, केंब्रिज प्राइमरी, केंब्रिज मिडिल स्कूल, केंब्रिज लोअर सेकेंडरी और केंब्रिज सेकेंडरी। स्कूल में अध्यापकों की नियुक्ति केंब्रिज पाठ्यक्रम के आधार पर होती है और समय-समय पर उन्हें ट्रेनिंग आदि भी दी जाती है।

स्कूल में 18 देशों के बच्चे पढ़ने आते हैं। लेकिन हिंदी मुख्यतौर पर भारतीय बच्चे ही पढ़ते हैं, पर इस बार तीन चीनी बच्चों ने भी हिंदी का विकल्प चुना है। विदेश में रहने वाले प्रवासी भारतीयों के लिए यह बड़े गौरव की बात है कि उनके बच्चे हिंदी सीख रहे हैं। स्कूल में हिंदी एलकेजी से आठवीं क्लास के बच्चों को वैकल्पिक विषय के तौर पर पढ़ाई जाती है। वैसे स्कूल में कुल 268 छात्र-छात्राएं हैं, जिनमें से 60 बच्चे हिंदी पढ़ रहे हैं। पहले हिंदी पहली कक्षा से पढ़ाई जाती थी। इस साल से एलकेजी और यूकेजी के बच्चों को भी हिंदी सीखने का मौका मिल रहा है। इससे पहले कुछ छात्र-छात्राएं नवीं और दसवीं हिंदी विषय से पास कर चुके हैं। हालांकि केंब्रिज यूनिवर्सिटी में हिंदी से 12वीं क्लास तक की पढ़ाई हो सकती है, शाओशिंग में अभी यह विकल्प थोड़ा मुश्किल लगता है। इस स्कूल में कुछ 50 शिक्षकों का स्टाफ है, जिनमें से सात शिक्षक भारतीय हैं। हिंदी के अलावा चीनी और स्पेनिश भाषा भी वैकल्पिक रूप में यहां छात्रों के लिए उपलब्ध है। आशीष कहते हैं कि धीरे-धीरे हिंदी की लोकप्रियता बढ़ रही है, उम्मीद है कि आने वाले समय में चीन और अन्य देशों के बच्चे भी हमारे स्कूल में हिंदी सीखेंगे।

चीन के इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ाई जा रही है हिंदी

स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थी

वहीं इस स्कूल में हिंदी पढ़ा रही शैली त्यागी ने सीआरआई को बताया कि उन्हें विदेश में हिंदी पढ़ाते हुए बहुत गर्व महसूस होता है। शैली के मुताबिक विदेश में हिंदी सीखने का मौका हासिल होने पर बच्चों के परिजन बहुत खुश हैं, हिंदी सीखने वाले अधिकांश भारतीय बच्चे हैं। यहां हिंदी की पढ़ाई का स्तर भारत के किसी अच्छे स्कूल से कम नहीं है। हिंदी सीखने के साथ-साथ बच्चे भारत की संस्कृति और अन्य जानकारियों से भी रूबरू होते हैं। शैली क्लास में बच्चों को हिंदी के अक्षर ज्ञान के साथ-साथ लेखनी में भी निपुण बना रही हैं। बच्चों को मुहावरे, लोकोक्तियां और कविता आदि बहुत रोचक लगते हैं।

शैली के अनुसार चीनी बच्चे बहुत रुचि के साथ हिंदी पढ़ रहे हैं, लेकिन उन्हें उच्चारण संबंधी कुछ परेशानी आती हैं, जिन्हें अभ्यास से दूर कराया जाता है। लेकिन उनके परिजन बहुत खुश हैं उनके बच्चे इतनी कम उम्र से एक विदेशी भाषा सीख पा रहे हैं। इतना ही नहीं वे अकसर बच्चों को हिंदी सीखने में आने वाली परेशानियों और शब्दों को लेकर शिक्षिका के साथ चर्चा भी करते हैं।

(अनिल आज़ाद पांडेय)


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