टिप्पणी:चीनी राष्ट्र के पुनरुत्थान में ताइवान अनुपस्थित नहीं रहेगा

2019-01-02 18:42:50
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चीनी राष्ट्र के पुनरुत्थान में ताइवान अनुपस्थित नहीं रहेगा

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 2 जनवरी को "ताइवान के देशबंधुओं को सूचना पत्र" की 40वीं वर्षगांठ पर दिये अपने भाषण में देश के शांतिपूर्ण पुनरेकीकरण के पाँच सूत्रीय सुझाव पेश किया और कहा कि देश का पुनरेकीकरण जरूर किया जाएगा, ताइवान चीनी राष्ट्र के पुनरुत्थान में अनुपस्थित नहीं रहेगा और चीन के पुनरेकीकरण से विश्व के दूसरे देशों को विकास के अधिक मौके तैयार होंगे।

शी चिनफिंग के भाषण में देश के शांतिपूर्ण एकीकरण के लिए सबसे ज्यादा ईमानदारी और सद्भावना भेजी गयी है और ताइवानी स्वतंत्रता वाले बल तथा बाह्य शक्तियों को गंभीरता से चेतावनी दी गयी है। चालीस साल पहले जब चीनी राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा की स्थायी कमेटी ने "ताइवान के देशबंधुओं को सूचना पत्र" जारी किया था, तब संयुक्त राष्ट्र संघ में चीन लोक गणराज्य के सभी कानूनी अधिकारों की बहाली की गयी थी और ताइवान चीन का एक हिस्सा होने पर व्यापक तौर पर अंतर्राष्ट्रीय मान्यता भी मिली थी। उसी स्थिति में प्रकाशित "ताइवान के देशबंधुओं को सूचना पत्र" में एक चीन के रुख पर जोर दिया गया और दोनों तटों के बीच आदान प्रदान का विस्तार करने और शांतिपूर्ण पुनरेकीकरण को बढ़ाने का सुझाव पेश किया गया। शी चिनफिंग ने अपने भाषण में बीते 70 सालों में एक चीन के सिद्धांत के आधार पर दोनों तटों के बीच आदान प्रदान करने और ताइवानी स्वतंत्रता का विरोध करने के बारे में प्राप्त प्रगतियों का सिंहावलोकन किया । उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला है कि ताइवान चीन का एक भाग होने और चीनी राष्ट्र के पुनरेकीकरण होने के तथ्य व प्रवृत्ति को किसी भी व्यक्तियों के द्वारा नहीं बदला जाएगा।

चीनी राष्ट्र के पुनरुत्थान में ताइवान अनुपस्थित नहीं रहेगा

चालीस साल पहले ताइवान का आर्थिक विकास चीन की मुख्य भूमि से कहीं बेहतर था। चालीस साल बाद चीनी मुख्य भूमि विश्व का दूसरा बड़ा अर्थतंत्र बना है और वह भी ताइवान का सबसे बड़ा व्यापारी सहपाठी, निर्यात बाजार और निवेश गंतव्य बना है। दोनों तटों के बीच संलयन विकास का स्तर बढ़ा है और आम नागरिकों को संतोष है। वर्ष 2018 के जनवरी से नवम्बर तक दोनों तटों के बीच व्यापार रकम दो खरब अमेरिकी डालर तक जा पहुंची है, जो पिछले साल से 16 प्रतिशत अधिक रही। इसी के साथ-साथ अधिकाधिक देशों ने ताइवान के साथ अपने तथाकथित राजनयिक संबंधों को छोड़ कर चीन लोक गणराज्य के साथ राजनयिक संबंधों की स्थापना की। एक चीन के सिद्धांत का विश्व में व्यापक समर्थन किया गया है।

शी चिनफिंग ने अपने भाषण में चीनी लोग दूसरे चीनी लोगों को नहीं मारने और दोनों तटों के बीच आर्थिक सहयोग व्यवस्था कायम करने आदि सुझावों से थाइवानी देशबंधुओं को सद्भावना व्यक्त की। और यह आशा भी जतायी गयी है कि थाइवानी देशबंधु मुख्य भूमि के सुधार व खुलेपन के मौके को साझा करेंगे। एक देश में दो व्यवस्थाएं के जरिये देश के शांतिपूर्ण पुनरेकीकरण का सबसे अच्छा विकल्प होगा। और साथ ही इस बात पर भी जोर दिया गया कि चीन किसी भी स्वरूप वाली थाइवानी स्वतंत्रता के लिए गुंजाइश तैयार नहीं करेगा। और बल का प्रयोग करने का विकल्प, थाइवानी देशबंधुओं के खिलाफ नहीं, बल्कि बाह्य शक्तियों और थाइवानी स्वतंत्रता वालों तथा इन की विभाजन कार्यवाहियों के खिलाफ ही है।

चीनी राष्ट्र के पुनरुत्थान में ताइवान अनुपस्थित नहीं रहेगा

चालीस सालों के सुधार और खुलेपन के माध्यम से चीन का विकास एक नये युग में प्रवेश कर चुका है। चीनी राष्ट्र का पुनरुत्थान होने का लक्ष्य इतिहास के किसी भी वक्त पर नजदीक होने वाला है। दोनों तटों के शांतिपूर्ण एकीकरण का आधार और शर्तें भी पहले से कहीं अधिक तौर पर तैयार हैं। आज चीनी जनता अपने स्वप्न के लिए दौड़ रही है। ताइवानी देशबंधु राष्ट्र के पुनरुत्थान में अनुपस्थित नहीं रहेंगे। राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कहा कि ताइवान का भाग्य देश के एकीकरण पर निर्भर होगा और ताइवानी देशबंधुओं का कल्याण भी राष्ट्र के पुनरुत्थान पर निर्भर रहेगा।

( हूमिन )

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