इंटरव्यू- लेज़ और नाचोज़ चिप्स को टक्कर दे रहे हैं देसी खाकरा चिप्स

2018-11-15 16:18:23
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भारतीय लोगों को पसंद आ रहे हैं खाकरा चिप्स

भारतीय लोगों को पसंद आ रहे हैं खाकरा चिप्स

सात्विको ब्रांड भारत का सबसे तेजी से उभरता हुआ फूड पैकेजिंग ब्रांड है। जो कि परंपरागत भारतीय चीजों को बिना प्रिज़र्वटिव्स और आर्टिफ़िशियल चीजों के पैकेज्ड फूड के रूप में आकर्षक ढंग से ग्राहकों के सामने पेश करता है। पिछले दो साल में इस कंपनी ने लंबी छलांग लगाई है, अब इनके द्वारा तैयार चीजें इंडिया के लगभग हर बड़े शहर में मिलती हैं। कंपनी के फाउंडर और निदेशक प्रसून गुप्ता के साथ सीआरआई संवाददाता अनिल आज़ाद पांडेय ने ख़ास बातचीत की।

प्रसून गुप्ता कहते हैं कि सात्विको ब्रांड इंडिया का तेजी से उभरता हुआ फूड पैकेजिंग ब्रांड है। पिछले दो सालों में हमने देश के सभी बड़े शहरों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। हम लेज़ और अमेरिका, मैक्सिको के नाचोज़ चिप्स आदि को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। ये सभी कंपनियां हमें इंडिया के सबसे तेजी से बढ़ते हुए ब्रांड के तौर पर देख रही हैं।

चीन आने का मकसद यह है कि चीनी लोगों ने अपने देश में इस तरह की कई बड़ी कंपनियां खड़ी कर रखी हैं। ऐसे में इनके साथ सहयोग करते हुए अगले तीन साल में सात्विको को हिंदुस्तान का सबसे बड़ा ब्रांड बनाना चाहते हैं। फिर इसके बाद इसे दूसरे देशों में भी पहुंचाने का लक्ष्य है। यही संभावना तलाशने हम चीन पहुंचे हैं।

सात्विको की शुरुआत कैसे हुई, इस पर प्रसून कहते हैं कि उन्होंने आईआईटी रुड़की से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। लेकिन उन्होंने इंजीनियरिंग करते हुए एक स्टार्ट-अप शुरू किया, जिसे चार साल के बाद बेच दिया। इसी बीच हम सोच रहे थे कि अब क्या किया जाए, वैसे मुझे खाना बनाना बहुत पसंद है। मैं भारतीय खाने का बहुत बड़ा फ़ैन हूं। लेकिन आज के दौर का मॉडर्न उपभोक्ता अपनी जड़ों से जुड़े हुए भोजन को खाना तो चाहता है, लेकिन अपने तरीके से। हमने महसूस किया कि यहां एक गैप है, और पता लगाया कि भारतीय कंज्यूमर क्या चाहता है। इसके साथ-साथ 2014-2015 के दौरान हमने अपने उत्पाद बनाना शुरू किया। जब हमने तैयार चीजों को बाज़ार में लांच किया तो हमें बहुत जबरदस्त फीडबैक मिला। इसके बाद भारत और दुनिया की अन्य प्रमुख कंपनियों ने हमारी कंपनी में निवेश किया। आज हमारी कंपनी में दो सौ से अधिक लोग काम करते हैं, अगले एक साल में दो हजार तक पहुंचने की उम्मीद है।

दरअसल कहानी यह थी कि ऐसा फूड प्रॉडक्ट का ब्रांड तैयार करना, जो आज का उपभोक्ता खाना चाहता है। जो कि स्वास्थ्य के लिए अच्छा हो, शुद्ध हो और जो उनकी भावनात्मक अपील को भी पूरा करता हो। 

प्रसून गुप्ता सीआरआइ संवाददाता अनिल पांडेय को इन्टरव्यू देते हुए

प्रसून गुप्ता सीआरआइ संवाददाता अनिल पांडेय को इन्टरव्यू देते हुए

दूसरे ब्रांड या कंपनियों से सात्विको कितनी अलग है, इसके जवाब में प्रसून कहते हैं, उदाहरण के लिए लेज़ का एक उत्पाद है आलू चिप्स। जिसमें हेल्थ के लिए कोई लाभ नहीं हैं। लोग चिप्स खाना चाहते हैं लेकिन लोग फ्राइड आलू के चिप्स छोड़ना चाहते हैं। तो ऐसे लोगों को क्या विकल्प दिया जाए, तो हमने उनके लिए बेक्ड गेहूं का चिप्स पेश किया। जिसे खाकरा चिप्स भी कहते हैं। खाकरा भारत के राजस्थान और गुजरात आदि राज्यों में सैंकड़ों वर्षों से नाश्ते में खाया जाता है। हमने उस खाकरे को नए माडर्न तरीके से चिप्स के रूप में बाज़ार में पेश किया। जिसे एलेपीनो फ्लेवर, हर्ब एंड चीज़ फ्लेवर जैसे फ्लेवर्स में प्रस्तुत किया। ये आजकल के युवाओं को बहुत पसंद आ रहा है। इसके साथ ही हमारा दूसरा उत्पाद है मखाना। मखाना इंडिया में व्रत के दौरान खाया जाता है। यह ग्लूटन फ्री उत्पाद होने के साथ-साथ इसमें फाइबर बड़ी मात्रा में पाया जाता है। हमने इसका भी एक स्नैक तैयार करवाया। जो कि चाहे बच्चे हो या बड़े, पूरे परिवार के लिए हेल्दी स्नैक है। एक गृहिणी जो यह सोचती है कि वह अपने बच्चों और मां-बाप के साथ बैठकर कौन से स्नैक्स का आनंद ले। हमने उसे आज उस तरह के स्नैक्स ला कर दे दिए हैं।

क्या आपने सोचा था कि आपके स्टार्ट-अप को इतना अच्छा फीडबैक मिलेगा। इस पर प्रसून कहते हैं, जब भी कोई उद्यमी स्टार्ट-अप शुरू करता है, उसके मन में एक इंट्यूशन होती है, जिसको लेकर वह बहुत आश्वस्त होता है। तो शुरू में हमने अपनी इंट्यूशन से जो प्रॉडक्ट मार्केट में उतारने से पहले एक साल तक बड़े निवेशकों, नियमत ग्राहकों आदि के सामने सिर्फ परीक्षण के तौर पर पेश किया। हमने देखा कि ये लोग हमारे द्वारा तैयार चीज़ों को बार-बार मांगने वापस आ रहे थे। अगर हम उस उत्पाद उस वक्त नहीं दे सके, तो उन्होंने कहा कि वे इसके लिए हफ्ते भर इंतज़ार भी कर सकते हैं। उस तरह के प्रॉडक्टस बाज़ार में मौजूद नहीं थे और उन्हें जरूरत थी। हमें इस बारे में रिसर्च करने में एक-डेढ़ साल का वक्त लगा। आज भी हम जब कोई नया उत्पाद लांच करते हैं तो हमें उसे बाजार में पहुंचाने तक आठ से दस महीने का वक्त लग जाता है। इस दौरान हम ग्राहक की जरूरत को समझने में समय लगाते हैं।

जैसा कि अकसर किसी भी बड़ी कंपनी के साथ होता है, सात्विको की शुरूआत में भी लगभग वैसा ही था। जैसा कि इंडिया की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेल कंपनी फ्लिपकार्ट को बिन्नी बंसल और सचिन बंसल ने 2007 में शुरू किया था। उसी तरह प्रसून और उनके दोस्त अंकुश दो लोगों के दिमाग में सात्विको कंपनी को शुरू करने का विचार आया। फिर धीरे-धीरे कई अच्छे लोग हमारे साथ जुड़ते चले गए। आज हमारी कंपनी से लगभग दो सौ लोग जुड़े हैं। जिसमें शीर्ष 20 लोग बहुत अनुभवी, पढ़े-लिखे और अच्छी पृष्ठभूमि के हैं। हमारी टीम इसलिए भी आगे बढ़ती गयी, क्योंकि उन्हें भी इस कांसेप्ट में भरोसा आया। उन्होंने देखा कि मार्केट में ये उत्पाद चल रहे हैं। इसके साथ ही जब उन्होंने हमारे निवेशकों को देखा, तो उनका विश्वास और बढ़ गया कि यह कंपनी भारत की सबसे बड़ी कंपनी बन सकती है। पिछले डेढ़ साल में सात्विको ने तेजी से उभरती हुई कंपनी के तौर पर मार्केट में अपनी जगह बनायी है।

आखिर सात्विको कंपनी का काम क्या होता है, इस बारे में प्रसून विस्तार से बताते हैं, हमने एक तकनीक विकसित की है, उसका नाम है जिगसॉ। अगर आप हमारे बिजनेस में सबसे बड़ी चुनौती देखेंगे, वह है वितरण व्यवस्था की। वितरण के वक्त आपका मुकाबला होता है बड़ी-बड़ी कंपनियों से। जिसमें लेज़ चिप्स आदि शामिल हैं, जो पिछले पचास-साठ साल से बहुत अच्छा वितरण कर रही हैं। हमने जो तकनीक तैयार की है, उसके जरिए वितरण की प्रक्रिया को तेज और प्रभावी तरीके से पूरा कर पा रहे हैं। इसकी वजह से हमारे वितरण का तेजी से विस्तार हो रहा है। अगर पैकेजिंग की बात करें तो हमारे सभी उत्पाद बिना प्रिज़र्वटिव (परिरक्षक), बिना आर्टिफिशियल चीजों से बनते हैं। इसके लिए हमें विशेष ध्यान देना पड़ता है। उत्पाद तैयार करने वाली हमारी सभी यूनिट्स अमेरिका एफडीए सर्टिफाइड हैं। उत्पाद तैयार हो जाने के बाद भी विभिन्न प्रयोगशालाओं में अच्छी तरह उनकी क्वालिटी टेस्टिंग की जाती है। उसके पश्चात् हम उत्पाद को बाज़ार में उतारते हैं।

अगर कीमतों की बात करें तो, हम नहीं चाहते कि हमारे उत्पाद कुछ चुनिंदा अमीर लोगों तक ही सीमित रहें। हम चाहते थे कि जिस कीमत पर लेज़ आदि बाज़ार में पहुंचते हैं, हम उससे 10 फीसदी अधिक दाम पर लाएं। 10 प्रतिशत ज्यादा इसलिए क्योंकि यह हमारी गुणवत्ता के लिए जरूरी है। इन स्थापित कंपनियों के साथ हम अपनी तकनीक और कंपनी को दक्ष बनाकर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।

भारत सरकार ने भी सात्विको जैसी कंपनियों को पहचाना है, इसी क्रम में पिछले साल सात्विको को सबसे बेहतरीन फूड एंड एग्री कंपनी का अवार्ड मिल चुका है। हमें सरकार और निवेशकों की ओर से पूरा प्रोत्साहन मिल रहा है।

भविष्य की योजना की चर्चा करते हुए प्रसून ने बताया कि अगले तीन साल में हम भारत की सबसे बड़ी फूड पैकेजिंग कंपनी बनना चाहते हैं। हम लेज़ जो कि इंडिया में सालाना 4 हज़ार करोड़ का बिजनेस कर रही है, उससे भी बड़ा कारोबार नेटवर्क खड़ा करने का लक्ष्य है। हम इंडिया के अलावा दुनिया के अन्य देशों में भी अपने उत्पादों को पहुंचाना चाहते हैं। हम सात्विको के जरिए हिंदुस्तान के वर्चस्व को सौ मिलयन लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।

(प्रस्तुति-अनिल आज़ाद पांडेय)  

 

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