चीनी बाजार में बड़ी मात्रा में जल्द पहुंचेगा भारतीय चावल

2018-10-29 16:38:28
Comment
शेयर
शेयर Close
Messenger Messenger Pinterest LinkedIn
1/5
सेमिनार के दौरान भारतीय निर्यातक और पट्टाभी एग्रो फूड्स के प्रबंध निदेशक कृष्णराव सवाल का जवाब देते हुए

दुनिया के 130 देशों में अपनी धाक जमाने के बाद भारतीय चावल अब चीन में भी बड़ी मात्रा में दस्तक देने को तैयार है। जून महीने में दोनों देशों के बीच गैर-बासमती चावल को लेकर हुए समझौते के बाद स्थिति बदलने लगी है। हाल में ही 24 भारतीय चावल की मिलों को चीन में चावल के निर्यात के लिए अधिकृत किया गया है। इसी बीच सोमवार 29 अक्तूबर को पेइचिंग में भारत के निर्यातकों और चीन के आयातकों के बीच सेमिनार का आयोजन हुआ। इस दौरान चीनी खरीददारों ने भारतीय चावल के प्रति बहुत रुचि दिखाई। शायद यह पहला मौका था जब चीनी आयातकों को भारतीय चावल की तमाम किस्मों के बारे में इतने विस्तार से जानने का मौका मिला। भारत के विभिन्न राज्यों में चावल के लगभग एक हज़ार प्रकार मौजूद हैं। हालांकि चीनी लोग इस बारे में वाकिफ नहीं हैं। चीनी आयातकों को लगता था कि भारत में सिर्फ लांग ग्रेन राइस ही उगाया जाता है। इस सेमिनार के दौरान उन्हें पता चला कि भारत में चिपचिपा चावल भी पैदा होता है, जो चीनी उपभोक्ताओं की पसंद बन सकता है। इसके साथ ही भारतीय चावल से नूडल आदि भी बनाए जा सकते हैं। यहां बता दें कि भारत एग्रो उत्पादों के आयात-निर्यात के मामले में विश्व में शीर्ष दस स्थानों पर है। दुनिया में वार्षिक तौर पर 490 मिलयन मीट्रिक टन चावल का उत्पादन होता है। इसमें भारत और चीन का अहम स्थान है।  

भारतीय दूतावास के काउंसलर प्रशांत लोखांडे ने कहा कि दोनों देशों के नेताओं ने हाल के दिनों में संबंधों को बेहतर बनाने के लिए व्यापक प्रयास किए हैं। वूहान में वार्ता हो, छिंगताओं की भेंट या फिर जोहानिसबर्ग में मुलाकात। चीनी राष्ट्रपति और भारतीय प्रधानमंत्री की कीशिशों से व्यापारिक रिश्ते मजबूत होने लगे हैं। इसी कड़ी में जून महीने में दोनों के बीच गैर-बासमती चावल के चीन में प्रवेश की बाबत समझौता भी हुआ।

वहीं इस मौके पर भारतीय दल के प्रमुख और एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडेक्ट्स एक्सपोर्ट डिवेलपमेंट अथॉरिटी(एपीडा) के निदेशक ए.के.गुप्ता ने सीआरआई से बातचीत में कहा कि भारत और चीन के बीच व्यापार की बड़ी संभावना है, चावल इसमें अहम भूमिका निभा सकता है। चीन विश्व में चावल का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। इसके बावजूद चीन पाँच मिलयन टन चावल का आयात करता है। वहीं भारत उत्पादन के मामले में दूसरे नंबर पर है। भारत पिछले सात सालों से दुनिया में चावल(बासमती और गैर बासमती) का सबसे बड़ा निर्यातक रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारतीय चावल के चीनी बाजार में प्रवेश से दोनों देशों के बीच मौजूद व्यापार घाटा कम होगा।

पट्टाभी एग्रो फूड्स के प्रबंध निदेशक कृष्णराव ने भारतीय चावल को चीन में प्रवेश दिलाने के लिए भारत और चीन सरकार का धन्यवाद दिया। जबकि निर्यातक हितेन भिमानी ने कहा कि भारत में चीनी फ्राइड राइस बहुत लोकप्रिय है। आज के वैश्वीकरण के दौर में फ्यूज़न फूड की मांग बढ़ने लगी है। ऐसे में भारतीय चावल चीनी लोगों के खाने का स्वाद बढ़ा सकता है, इसमें कोई दोराय नहीं है।

सेमिनार में भारत की ओर से श्रीराम फूड इंडस्ट्री,पट्टाभी एग्रो फूड्स,श्री ललिथा इंटरप्राइजेज,ग्रीटा ग्रुप,श्री गजानन इंडस्ट्रीज समेत छह निर्यातकों और चीन में कॉफ्को के नेतृत्व में 42 आयातकों ने हिस्सा लिया। भारतीय दल का नेतृत्व एपीडा के निदेशक ए.के.गुप्ता कर रहे हैं। यह दल बीजिंग के बाद शंघाई में भी चीनी आयातकों के साथ बैठक करेगा। कार्यक्रम का आयोजन बीजिंग के फोर सीजन्स होटल में हुआ।

(लेखक:अनिल आज़ाद पांडेय)

 

 

शेयर