(इंटरव्यू) भारतीय चाय के लिए एक अच्छा बाजार बन सकता है चीन : टी बोर्ड ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष

2018-10-28 14:38:48
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भारतीय चाय प्रोत्साहन समारोह अरूण कुमार रे भाषण देते हुए

भारतीय चाय प्रोत्साहन समारोह अरूण कुमार रे भाषण देते हुए

“भारतीय चाय से जुड़े औद्योगिक घरानों, निर्यात प्रतिष्ठानों, उत्पादकों आदि के अंदर उम्मीद जगी है कि जिस तरह चीन अपने बाजार का विस्तार कर रहा है, उससे आने वाले समय में भारतीय चाय निर्यातकों के लिए एक बड़ा बाजार साबित होगा”, टी बोर्ड ऑफ इंडिया (भारत सरकार) के उपाध्यक्ष अरूण कुमार रे ने सीआरआई को दिए एक खास इंटरव्यू में कहा।

चीन स्थित भारतीय दूतावास ने टी बोर्ड ऑफ इंडिया और चाइना टी मार्केटिंग एसोसिएशन के सहयोग से पेइचिंग में 24 अक्टूबर को भारतीय चाय प्रोत्साहन समारोह आयोजित किया। इस कार्यक्रम के दौरान, चीन और भारत के शीर्ष चाय खरीदार और विक्रेताओं ने दोनों देशों के बीच चाय व्यापार को बढ़ाने की संभावनाओं के संदर्भ में परस्पर मुलाकात और विचारों का आदान-प्रदान किया।

टी बोर्ड ऑफ भारत भारतीय सरकार की एक नियामक संस्था है जो चाय के भारतीय व्यापार को नियंत्रित करता है। इस संस्था के उपाध्यक्ष अरूण कुमार रे ने देश के शीर्ष चाय व्यापार घरानों वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। उन्होंने चीनी बाजार की संभावनाओं का पता लगाने और निर्यात आधार का विस्तार करने के लिए चीन का दौरा किया।

अरूण कुमार रे सीआरआई संवाददाता को इन्टरव्यू देते हुए

अरूण कुमार रे सीआरआई संवाददाता को इन्टरव्यू देते हुए

अरूण कुमार रे ने सीआरआई को दिए एक खास इंटरव्यू में कहा, “चीन के बाजार में भारतीय चाय की पहले से ही मौजूदगी थी। भारत ने पिछले साल करीब 9 मिलियन टन चाय का निर्यात किया था, और आज अंदाजा हो रहा है कि हम और ज्यादा मात्रा में बेहतरीन किस्म की चाय का निर्यात कर सकते हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कई बार चीन आने के बाद, व्यापार के माहौल में बहुत परिवर्तन आया है। भारतीय चाय व्यापार घरानों में उम्मीद जगी है कि चीन का बाजार उनके लिए एक बड़ा बाजार साबित होगा।

अरूण कुमार रे ने सीआरआई को कहा, “चीन में चाय की खपत भारत से ज्यादा है। चीन हर साल 2500 मिलियन किलोग्राम चाय का उत्पादन करता है, जो करीब 90 प्रतिशत खपत देश के अंदर ही हो जाती है। जबकि भारत 1300 मिलियन किलोग्राम का वार्षिक उत्पादन करता है, और उसमें से 250 मिलियन किलोग्राम निर्यात करता है।”

उनका मानना है कि चीन में भारतीय चाय की मांग है और जिस तरह चीन की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है, और चीन में चाय पीने के शौकिनों की संख्या बहुत ज्यादा है, उसे देखते हुए चीन भारतीय चाय के लिए एक अच्छा बाजार बन सकता है। भारत के बड़े ब्रांड जैसे दार्जिलिंग, असम, नीलगिरी आदि की पहले से ही स्वीकार्यता है।

अरूण कुमार रे सीआरआई संवाददाता को इन्टरव्यू देते हुए

अरूण कुमार रे सीआरआई संवाददाता को इन्टरव्यू देते हुए

अरूण कुमार रे ने बताया कि चीन विश्व का पहला सबसे बड़ा चाय उत्पादक देश है और उसका चाय बाजार विकसित है। भारत चीन को सुनिश्चित करना चाहेगा कि चीन को निर्यात की जाने वाली चाय बेहतरीन गुणवत्ता की होगी।

टी बोर्ड ऑफ के उपाध्यक्ष अरूण कुमार रे ने आगे बताया कि टी बोर्ड ऑफ इंडिया की चीनी चाय कंपनियों के साथ ई-नीलामी प्लेटफॉर्म के बारे में प्राथमिक रूप से बातचीत हुई है। भारत चाय के विपणन को सुव्यवस्थित करने के लिए, ऑनलाइन विक्रेताओं और खरीदारों को एक साथ लाने के लिए चीन में ई-नीलामी करने को तैयार है। टी बोर्ड ऑफ इंडिया भारत में तकरीबन 400 मिलियन किलोग्राम की ई-नीलामी करता है। ई-नीलामी की खास बात यह होती है कि इसमें गारंटीकृत भुगतान होता है।

(अखिल पाराशर)

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