पेइचिंग : चीन में भारतीय चाय को लोकप्रिय बनाने के लिए सेमिनार का आयोजन

2018-10-25 08:52:46
शेयर
शेयर Close
Messenger Messenger Pinterest LinkedIn
1/5
चीन स्थित भारतीय राजदूत गौतम बंबावाले भाषण देते हुए

चीन में भारतीय चाय को लोकप्रिय बनाने के लिए भारतीय दूतावास, टी बोर्ड ऑफ इंडिया (भारत सरकार) और चाइना टी मार्केटिंग एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से बुधवार को चीन की राजधानी पेइचिंग में सेमिनार और टी टेस्टिंग कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में प्रमुख चीनी चाय आयातकों और चाय विशेषज्ञों ने भाग लिया। टी बोर्ड ऑफ इंडिया (भारत सरकार) के उप-अध्यक्ष अरूण कुमार रे ने भारतीय चाय विक्रेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया और चाय के चीनी आयातकों को भारतीय चाय की 5 बेहतरीन किस्में पेश कीं। वहां मौजूद लोगों ने भारतीय चाय की बेहतरीन किस्मों का स्वाद चखा।

भारत के राजदूत गौतम बंबावाले ने सेमिनार में उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए कहा कि चीन और भारत दोनों देशों में चाय को बहुत ज्यादा पसंद किया जाता है। वास्तव में, चाय की उत्पत्ति चीन में हुई और चीन से ही भारत में आई।

उन्होंने अपने संबोधन यह भी कहा कि भारत और चीन के बीच चाय व्यापार इतिहास से चला आ रहा है। प्राचीन चाय-हॉर्स व्यापार मार्ग ने चीन में युन्नान प्रांत को भारत में चाय उगाने वाले क्षेत्रों पश्चिम बंगाल और असम से जोड़ा। आज, चीन 2550 मिलियन किलोग्राम के वार्षिक उत्पादन के साथ हरी चाय का प्रमुख उत्पादक है, जबकि भारत 1278 मिलियन किलोग्राम के वार्षिक उत्पादन के साथ काली चाय का प्रमुख उत्पादक है। भारत चीन को चाय आयात करने वाला तीसरा प्रमुख देश है, उसका चीन के चाय बाजार में 17 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। पिछले साल, भारत ने चीन को 25 मिलियन अमरीकी डालर की चाय का निर्यात किया था।

टी बोर्ड ऑफ इंडिया (भारत सरकार) के उप-अध्यक्ष अरूण कुमार रे ने सीआरआई के साथ खास बातचीत में कहा कि इस सेमिनार का उद्देश्य चीन में भारतीय चाय को बढ़ावा देना है और चीनी बाजार में भारतीय चाय के आयात और खपत को बढ़ाने के लिए संभावित रणनीति पर प्रतिक्रिया प्राप्त करना है।

उनका यह भी कहना है कि जिस तरह चीन अपने बाजार का विस्तार कर रहा है, उससे आने वाले समय में भारतीय चाय निर्यातकों के लिए एक बड़ा बाजार साबित होगा। उन्होंने कहा, “चीन की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है, और चीन में चाय पीने के शौकिनों की संख्या बहुत ज्यादा है, उनके बीच हमारे बड़े ब्रांड जैसे दार्जिलिंग, असम, नीलगिरी आदि की पहले से ही स्वीकार्यता है।”

2004 से भारतीय चाय व्यापार में संलग्न चीनी बिजनेस महिला श्याओ जुआन ने अपने भाषण में कहा कि भारत मुख्य रूप से सीटीसी (क्रश-टियर-कर्ल) चाय का उत्पादन करता है, जबकि चीनी लोग रूढ़िवादी चाय की किस्में पसंद करते हैं। इसलिए हम चीनी लोगों के बीच भारतीय चाय के ज्ञान को बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।

इस सेमिनार के दौरान भारत की चाय निर्यात कंपनी गोल्डन टिप्स के प्रबंधन निदेशक माधव शारदा ने सीआरआई के साथ बातचीत में कहा कि चीनी आयातकों की प्रतिक्रिया बहुत सकारात्मक है। वे दर्जनों आयातकों से बात कर चुके हैं, और चीनी आयातक उनके उत्पादों में बहुत रुचि ले रहे हैं। उनका कहना है कि चीन में भारतीय चाय खासकर दार्जिलिंग, असम और नीलगिरी जैसी किस्में खासी पसंद की जाती हैं।

(अखिल पाराशर)

शेयर