टिप्पणी:"कर्ज़ का जाल" या "विकास का सुअवसर"

2018-10-11 16:12:13
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टिप्पणी:"कर्ज़ का जाल" या "विकास का सुअवसर"

श्रीलंका में चीन के पूंजीनिवेश से निर्मित हम्बनटोटा बंदरगाह 

हाल ही में अमेरिका के उप राष्ट्रपति माइक पेंस ने अपने एक बयान में कहा कि चीन ने एशिया, अफ्रीका, यूरोप और लातीन अमेरिका के देशों में बुनियादी उपकरणों के निर्माण में निवेश लगाकर इन देशों को "कर्ज़ का जाल" में फंसा दिया है। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका इन देशों के लिए एक नया विकल्प तैयार करेगा। 

लेकिन चीन द्वारा कुछ विकासमान देशों में लगाये गये निवेश से "कर्ज़ का जाल" या विकास का सुअवसर तैयार हुआ है, यह चर्चा करने योग्य है। मिसाल के तौर पर श्रीलंका में चीन के पूंजीनिवेश से निर्मित हम्बनटोटा बंदरगाह आजकल कभी कभी पश्चिमी मीडिया की रिपोर्टों का टाइटल बना है। पेंस ने कहा कि श्रीलंका को हम्बनटोटा बंदरगाह के निर्माण से कर्ज का भारी बोझ पड़ा है। और बाद में यह बंदरगाह चीन का एक सैन्य अड्डा बनेगा। लेकिन तथ्य यह है कि श्रीलंका पर सभी ऋण में केवल 10 प्रतिशत चीन से संबंधित है। और चीन के कर्ज में 61.5 प्रतिशत भाग अंतरराष्ट्रीय बाजार दर के नीचे रियायती ऋण है। श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने कहा कि श्रीलंका किसी भी चीनी "कर्ज़ का जाल" में नहीं फंसा हुआ है। हम्बनटोटा बंदरगाह का समझौता चीन और श्रीलंका के बीच समानता व आपसी लाभ के आधार पर संपन्न सहयोग मुद्दा है। इस बंदरगाह के निर्माण का उद्देश्य है हिंद महासागर रसद केंद्र बनाना और श्रीलंका के आर्थिक विकास को बढ़ावा देना। अनुमान है कि वर्ष 2020 तक इस बंदरगाह की आय श्रीलंका सरकार की वार्षिक आय में 40 प्रतिशत भाग रहेगी और दस हजार प्रत्यक्ष तथा 60 हजार अप्रत्यक्ष रोजगार मौका तैयार किया जाएगा।

लेकिन पेंस की आंखों में हम्बनटोटा बंदरगाह समझौता कोई जबरन समझौता है और यहां तक कि इस के निर्माण के पीछे सैन्य उद्देश्य भी है। अमेरिका ने खुद विश्व के 70 से अधिक देशों में आठ सौ से अधिक सैनिक अड्डे बना रखे हैं। इसी से वह हमेशा असामान्य दृष्टि से दूसरे देशों के बीच सहयोग को देखते रहे हैं। श्रीलंका के अलावा पाकिस्तान, फिलिफिंस, वेनेज़ुएला, जिबूती, पापुआ न्यू गिनी आदि देशों ने भी सक्रियता से चीन के एक पट्टी एक मार्ग के निर्माण में भाग लिया है। लेकिन पश्चिमी मीडिया की रिपोर्ट में ये देश चीन के "कर्ज़ का जाल" में फंसे हुए हैं। वास्तव में चीन और दूसरे विकासमान देशों के बीच सहयोग की परियोजनाएं "कर्ज़ का जाल" होने के बजाये विकास अवसर हैं। सितंबर तक चीन ने एक पट्टी एक मार्ग के तटस्थ देशों के साथ 149 सहयोग दस्तावेज़ संपन्न की हैं। वर्ष 2013 से वर्ष 2017 तक चीन और इन देशों के बीच व्यापार रकम 332 खरब युआन तक रहा है।

( हूमिन ) 

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