रूस की "पूर्व की ओर देखो" नीति का उज्ज्वल भविष्य

2018-09-11 17:00:25
शेयर
शेयर Close
Messenger Messenger Pinterest LinkedIn
4/5

चौथे पूर्वी आर्थिक मंच का आयोजन 11 सितंबर को रूस के सूदूरपूर्व शहर व्लादिवोस्तोक में हुआ। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग समेत अनेक राजनेताओं,शासनाध्यक्षों और साठ देशों के प्रतिनिधियों ने मंच में भाग लिया।

वर्ष 2015 में रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने पूर्वी आर्थिक मंच का आयोजन करने का सुझाव पेश किया। यह भी रूस की "पूर्व की ओर देखो" नीति का परिणाम है। इधर के वर्षों में "पूर्व की ओर देखों" नीति रूस की दीर्घकालीन रणनीति बनाने का रूझान भी दिखता है।

चीन रूस का सबसे बड़ा व्यापार सहपाठी है। वर्ष 2015 से चीन ने सभी पूर्वी आर्थिक मंच में भाग लिया। चीनी राष्ट्रपति ने इस बार भी खुद मंच में भाग लिया। इससे यह जाहिर है कि चीन रूस के सूदूरपूर्व सहयोग में सक्रियता से भाग लेने को तैयार है। चीन ने रूस के सूदूरपूर्व में चार अरब अमेरिकी डालर पूंजी लगायी है और कुल 26 चीनी कारोबार व्लादिवोस्तोक शहर के उन्नत विकास क्षेत्र और स्वतंत्र बंदरगाह में प्रविष्ट हुए हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि चीन-रूस सहयोग "पूर्व की ओर देखो" नीति का मुख्य भाग है।

पूर्व उत्तरी एशिया में समृद्ध संसाधन और परिपक्व बाजार मौजूद है। चौथे पूर्वी आर्थिक मंच में भाग लेने वाले विदेशी नेताओं में मंगोलियाई राष्ट्रपति, जापानी प्रधानमंत्री और दक्षिण कोरिया के प्रधानमंत्री भी शामिल हैं। वर्तमान में चीन-रूस-मंगोलिया आर्थिक गलियारे का निर्माण किया जा रहा है, चीन-जापान-दक्षिण कोरिया स्वतंत्र व्यापार समझौते पर वार्ता की जा रही है, और कोरियाई प्रायद्वीप के दोनों पक्षों के बीच भी आर्थिक सहयोग पुनः शुरू हो जाएगा।   

रूस के सूदूरपूर्व क्षेत्र में आर्थिक विकास के पीछे एशिया व प्रशांत क्षेत्रों में आर्थिक विकास की गति दी गयी है। एशिया व प्रशांत क्षेत्र रूस के लिए बाजार और पूंजीनिवेश स्रोत भी है। सूदूरपूर्व का विकास करने से रूस के आर्थिक विकास करने के लिए महत्वपूर्ण है। अब रूस और एपेक देशों के बीच व्यापार रकम रूस के वैदेशिक व्यापार में 31 प्रतिशत भाग बनता है। जबकि रूस और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार फिर भी रूस के वैदेशिक व्यापार का 40 प्रतिशत भाग बनता है। इसलिए रूस हमेशा से पूर्व और पश्चिम दोनों तरफ से आर्थिक सहयोग खोजने की कोशिश करेगा।

 ( हूमिन ) 

शेयर