टिप्पणीः जीडीपी का 60 प्रतिशत अमेरिका द्वारा बनायी गयी प्रतिद्विंदी के लिए एक लाल रेखा है

2018-08-10 19:21:42
Comment
शेयर
शेयर Close
Messenger Messenger Pinterest LinkedIn

टिप्पणीः जीडीपी का 60 प्रतिशत अमेरिका द्वारा बनायी गयी प्रतिद्विंदी के लिए एक लाल रेखा है

टिप्पणीः जीडीपी का 60 प्रतिशत अमेरिका द्वारा बनायी गयी प्रतिद्विंदी के लिए एक लाल रेखा है

इस हफ्ते में अमेरिका और चीन ने क्रमशः 23 अगस्त से एक दूसरे के 16 अरब यूएस डॉलर मूल्य वाले उत्पादों पर 25 टैरिफ़ बढ़ाने की घोषणा की। देखने में इस बार अमेरिका द्वारा चीन के खिलाफ़ टैरिफ़ बढ़ाने का मकसद दोनों देशों के बीच अन्यायपूर्ण व्यापार को हल करना है, लेकिन इसका गहरा मकसद है कि अमेरिका को तेज़ पुनरुत्थान करने वाले प्रतिद्विंदी पर हमला करना है, ताकि अमेरिकी डॉलर के नायकत्व की रक्षा कर सबसे बड़ा आर्थिक लाभांश पाया जा सके।

हालांकि अमेरिका का इतिहास सिर्फ 200 वर्ष का है, फिर भी प्रतिद्विंदी पर नियंत्रण करने के उपाय अमेरिका के पास ज्यादा हैं। पिछली शताब्दी में सोवियत यूनियन का जीडीपी एक बार अमेरिका के 60 प्रतिशत से ज्यादा पहुंचा, तो अमेरिका ने सोवियत यूनियन के खिलाफ प्रतिबंध लगा दिया। साथ ही सोवियत यूनियन ने खुद ही गलती की, जिसके फलस्वरूप इसका विभाजन हुआ। जापान की जीडीपी ने भी एक बार अमेरिका के 60 प्रतिशत को पार किया था, जिससे अमेरिका ने सतर्कता बरती और जापान पर चॉक समझौते पर हस्ताक्षर करने का दबाव डाला। इसके बाद जापान बीस सालों के लिए आर्थिक मंदी में फंसा रहा।

इन सबसे हम देख सकते हैं कि अमेरिका के लिए उसके जीडीपी की 60 प्रतिशत एक लाल रेखा है। जब भी कोई देश इस रेखा को पार करता है तो अमेरिका इसे रोकने के लिए हरसंभव कोशिश करता है। 2014 में चीन के जीडीपी ने पहली बार अमेरिका के जीडीपी के 60 प्रतिशत को पार किया था। अमेरिका के दृष्टिकोण से देखा जाए तो चीन के आर्थिक विकास की गति और निहित शक्ति पहले के प्रतिद्विंदियों से और तेज़ है। और भविष्य में चीन के जीडीपी के अमेरिका के जीडीपी को पार करने की बड़ी संभावना भी है। इसी पृष्ठभूमि में चीन पर दबाव डालना अमेरिका के लिए जरूरी बात है। 2017 के अगस्त माह में अमेरिका ने औपचारिक रूप से चीन के खिलाफ 301 जांच शुरू की और कई रिपोर्टों में चीन पर प्रतिद्विंता का आरोप थोप दिया।

लेकिन आज का चीन उस समय का जापान नहीं है। आज चीन के पास विशाल घरेलू उपभोक्ता बाजार है। पहला, चीन में व्यापक विचार-विमर्श, साझा सहयोग और सहभागी लाभ और एक पट्टी एक मार्ग आदि नये सहयोग के प्लेटफार्म हैं। जबकि पहले जापान निर्यात और अमेरिका व यूरोप के बाजारों पर बड़ा निर्भर था। इस साल के पहले सात महीनों में एक पट्टी एक मार्ग से जुड़े देशों और क्षेत्रों के साथ चीन की कुल व्यापार राशि 45.7 खरब चीनी युआन तक पहुंची है, जो कुल विदेशी व्यापार राशि के करीब 27.3 प्रतिशत है और चीन-अमेरिका व्यापार राशि से 22.8 खरब चीनी युआन अधिक रही। दूसरा, चीन के पास स्थिर राजनीतिक तंत्र और लम्बे विकास की रणनीति है। जबकि पहले जापान राजनीतिक माहौल और आर्थिक नीति का अभाव था। सिर्फ 1989 से 2000 के बीच जापान ने 9 बार सरकार का पुनःगठन किया, जिस ने परिस्थिति के प्रति जापान सरकार की समझ और नीति के कार्यान्वयन पर भारी असर पड़ा था। तीसरा, चीन के पास विश्व में सबसे बड़े पैमाने वाला औद्योगिक तंत्र है। चीन वैश्विक उद्योग चेन और सप्लाई चेन का अहम भाग बन चुका है। अमेरिका की एपल कंपनी की ही मिसाल लें, तो एपल कंपनी के 200 सप्लाई उपक्रमों में करीब 31.5 चीन से आये हैं।

हालांकि चीन और जापान के तेज़ पुनरुत्थान की प्रक्रिया में दोनों को अमेरिका का दबाव मिला है, फिर भी दोनों देशों के भाग्य बिलकुल अलग होंगे। चीन में विकास की जड़ कभी नहीं हिलती है। जब चीन परिस्थिति को सही ढंग से समझकर अपने काम को अच्छी तरह अंजाम देता है, तो चीन की विशाल आर्थिक जहाज अवश्य ही विविधतापूर्ण कठिनाईयों को दूर कर साहसी से आगे चलती रह सकेगी।

(श्याओयांग)

शेयर

सबसे लोकप्रिय

Related stories