भारतीय फिल्मों का चीन में बढ़ता बाज़ार

2018-07-10 11:32:30
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पिछले कुछ समय से चीन में हिन्दी फ़िल्मों का चलन बढ़ा है और चीनी लोगों को हिन्दी फिल्में पसंद भी आई हैं। ऐसे में भारतीय फिल्म निर्माताओं वितरकों का चीन आना लाज़िमी है। 9 जुलाई को इसी सिलसिले में चीन की राजधानी पेइचिंग में फिल्मों के ऑनलाइन बाज़ार के लिये भारत में बनी फिल्मों के लिये बाज़ार तलाशने आए थे, राहुल मुंजाल, जो कि स्काईरा ग्रुप के मालिक हैं ने बताया कि चीन भारतीय फिल्मों के लिये एक विशाल बाज़ार हो सकता है, क्योंकि इस समय पूरे चीन में करीब 45 हज़ार स्क्रीन हैं जिससे भारतीय फिल्मों की पहुंच चीन के दूर दराज़ के इलाकों में भी आसानी से हो सकती है, आज के दौर में फिल्मों के प्रचार का तरीका बहुत हद तक बदल गया है, अब लोगों के हाथों में मोबाइल फोन और सस्ते इंटरनेट के कारण फिल्मों का प्रचार और उनका ट्रेलर जन तक पहुंचाना बहुत आसान हो गया है। राहुल मुंजाल के साथ चीन में भारतीय व्यवसायी पूरन जसवानी भी इस काम में हिस्सा ले रहे हैं, पूरन ने बताया कि भारत में ढेर सारी सामाजिक फिल्में बनती हैं और इंसानी भावनाएं हर जगह एक जैसी होती हैं, अबतक चीन में रिलीज़ भारतीय फिल्मों की सफलता ने बताया है कि चीन में भारतीय फिल्मों का बाज़ार मौजूद है, पूरे चीन और भारत के बीच रिश्तों को मज़बूत करने में अपने व्यवसाय के ज़रिये भी बहुत सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, हाल ही में पूरन पूर्व क्रिकेटर रॉबिन सिंह के साथ चीन में क्रिकेट एकेडमी की शुरुआत भी करना चाहते हैं।

राहुल ने बातों के दौरान बताया वो चीन में हिन्दी फिल्मों के लिये डिजिटल, सैटेलाइट और थियेटर में रिलीज़ को लेकर यहां बाज़ार तलाशने आए हैं, इससे चीन के लोगों को भारतीय फिल्मों का मनोरंजन तो मिलेगा ही साथ ही चीन में रहने वाले भारतीयों के साथ पूरे भारतीय उप महाद्वीप, अफ्रीकी उप महाद्वीप, खाड़ी देश के लोग, पूर्वी यूरोप और बाल्कन देश के लोगों को भी हिन्दी फिल्में देखने को मिलेंगी क्योंकि ये लोग विदेशों में भारतीय फिल्मों के बड़े ग्राहक हैं। राहुल का कहना है कि अभी तक हिन्दी फिल्मों को चीन में मिले सकारात्मक नतीजों से वो बहुत आशावान हैं कि यहां पर भविष्य में लगने वाली हिन्दी फिल्मों को अच्छी सफलता मिलेगी।

दो देशों के संबंधों को बेहतर बनाने में कलाकारों के साथ ही व्यापारी वर्ग बहुत सकारात्मक भूमिका निभाता है, ठीक ऐसे ही चीन और भारत के संबंधों में भी व्यापारिक, सांस्कृतिक और मानवीय आवाजाही बढ़ने से संबंधों में और गर्माहट आएगी जो दोनों देशों के सकारात्मक उत्थान और प्रगति में सहायक सिद्ध होगा।

पंकज श्रीवास्तव

 

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