ल्यांगच्याहो (भाग 4)

2018-07-04 19:43:34
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ल्यांगचाहो - भाग 4

ल्यांगचाहो पहुंचते समय शी चिनफिंग ने कुछ समय अपने खर्चे पर किसानों के घर खाना खाया । लेकिन किसान उनके लिए कार्न मोमो और बीन पाउडर मोमो आदि बनाते थे, जिन्हें आम तौर पर किसान नहीं खा पाते थे। खाना खाते समय किसानों के बच्चे पास खड़े होकर उन्हें खाते हुए देखते थे।

गांव में जीवन और पेइचिंग के जीवन में बहुत भारी अंतर था। लेकिन गांव में शिक्षित युवा युवाओं का जीवन भी स्थानीय किसानों से बेहतर होता था। ल्यांगचाहो में हर महीने किसानों को सिर्फ़ 10 किलोग्राम अनाज मिलता था, जो शिक्षित युवाओं के राशन का करीब आधा होता था। भर पेट खाने के लिए किसानों को पत्तियां और सॉसिसल(Sowthistle) आदि चीजें खानी पड़ती थी।

बाद में शिक्षित युवा खुद खाना पकाने लगे, उस समय उन्हें पता चला कि खाना पकाना एक आसान बात नहीं है। पहला लकड़ी की समस्या थी। पहाड़ पर कुछ नहीं था, पेड़ नहीं थे, यहां तक कि झाड़ी भी नहीं थी। ऐसे में लोग लकड़ी कहां से लाएं।

स्थानीय किसान दैनिक जीवन में तो लकड़ी इकट्ठा करने की कोशिश करते थे। बाढ़ आते समय उन्होंने नदियों के बाढ़ से नीचे आने कुछ लकड़ियां को पकड़ने की कोशिश की। इसके अलावा किसानों को चट्टानों पर चढ़कर झाड़ी काटकर लानी होती थी। कई लोग इन खतरनाक चट्टानों से नीचे गिरकर घायल हुए, जबकि कुछ की मौत भी हो गई।

शिक्षित युवा चट्टान पर नहीं चढ़ सकते थे। उन्होंने पर्वत से कुछ घास लाने की कोशिश की। लेकिन स्टोव में डालने के कुछ ही मिनट में घास तुरंत जली गयी। शिक्षित युवा बहुत मुश्किल से खाना पका सकते थे। इसलिए भूख लगना इन युवाओं के लिए सामान्य बात थी।

उनके जीवन में सुधार करने के लिए गांव के नेताओं ने कभी कभार गेहूं का आटा बनाकर शिक्षित युवाओं को दिया और उन्हें बड़ी मदद दी। किसान गोंग जंगफू को याद है कि एक बार शी चिनफिंग सफेद मोमो को लेकर पर्वत पर चढ़े। दोपहर को जब उन्होंने किसान को उबली हुई मक्के की रोटी (steamed corn bread) खाते हुए देख उनसे सफेद मोमो खाया नहीं गया। उन्होंने सफ़ेद मोमो महिला किसानों को दे दिया और खुद कुछ भी नहीं खाया।

ल्यांगचाहो में शी चिनफिंग ने एक बार सफ़ेद चावल भी खाया था। वह ल्यांगचाहो गांव में रहने के सात साल में पहला मौका था कि उन्हें सफेद चावल खाने को मिला। उस समय चीन के उत्तरी शैनशी प्रांत में चावल बहुत दुर्लभ खाना था। नये साल में भी लोग चावल नहीं खा पाते थे। अब तक शी चिनफिंग को याद है कि सफ़ेद चावल किसान ली यींगथांग द्वारा दिया गया था।

ली यींगथांग थोंगछ्वान में मज़दूर थे, जो शी चिनफिंग से बहुत परिचित थे। एक बार उन्होंने अपनी मां से शी चिनफिंग के लिए सफ़ेद चावल पकवाया।

शी चिनफिंग ल्यांगचाहो के किसानों से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने कहा,”जब मुझे भूख लगती, तो किसान मेरे लिए खाना बनाते थे। जब मेरे कपड़े गंदे हुए, तो किसानों ने मेरे कपड़े धोए। जब मेरी पैंट फटी तो किसानों ने उसे सिलने में मदद दी।”

ग्रामीण समाज सरल और सादा है। गांव में नैतिकता का मापदंड भी सरल व स्पष्ट है। यानी श्रम और मेहनत से लोगों को सम्मान मिलता है।

ल्यांगचाहो में शी चिनफिंग ज्यादातर बांध बनाने का काम करते थे। उस समय गांव में बड़ी मशीनरी नहीं थी, इसलिए बाँध बनाना मानव जाति का बहुत कठोर श्रम माना जाता था। लोग मिट्टी को परत से परत में रखते थे, फिर किसी भारी पत्थर से मिट्टी को मज़बूत करते थे।

उस समय श्रम करने में कोई रक्षा कदम नहीं था। फ़ार्म में काम करते समय दस्ताने का प्रयोग भी नहीं किया जाता था। शी चिनफिंग ने सीधे से हाथ से फ़ार्म टूल्स पकड़कर मेहनत से काम किया। केवल एक दिन में ही हाथों पर छाले पड़ गए। पर दूसरे दिन भी उन्होंने काम जारी रखा। छाले फट गये, और खून बहने लगा। लेकिन चाहे काम व वातावरण कितना भी मुश्किल क्यों न था, शी चिनफिंग हमेशा मेहनत से काम करते थे। गांव में रहने वाले सभी लोगों ने चिनफिंग का उच्च मूल्यांकन किया।

ताबा, जो पीली भूमि पर कृषि में एक विशेष फ़ार्म वर्क है, आम तौर पर सर्दी के दिनों में चलाया जाता है। पर उस समय यह काम सबसे मुश्किल था। किसान ल्यांग योछांग की याद में चीनी पंचांग के अनुसार फ़रवरी या मार्च में शेनपेई में बर्फ़ अभी अभी पिघली थी। शी चिनफिंग नंगे पैरों से बहुत ठंडे पानी में खड़े होकर खेती का काम करते थे।

सभी लोगों ने मेहनती शी चिनफिंग की खूब प्रशंसा की।

उस समय शी चिनफिंग एक तरफ ग्रामीण क्षेत्रों में अभ्यास करते थे, दूसरी तरफ किताबें पढ़ते थे।

ल्यांगचाहो - भाग 4

ल्यांगच्याहो लोगों की नज़र में शी चिनफिंग हमेशा बहुत मोटी किताबें पढ़ते थे। भोजन करते समय वे पढ़ते थे, पहाड़ पर भेड़ चराते वक्त भी वे पढ़ते थे। हर मौके पर वे किताब पढ़ने की कोशिश करते थे। उस समय बिजली के अभाव से अंधेरे के बाद ल्यांगच्याहो के लोग जल्द ही सो जाते थे। केवल शी चिनफिंग के कमरे से कमज़ोर रोशनी निकलती थी।

शी चिनफिंग ने रूस की बहुत किताबें पढ़ी हैं। उन्होंने याद करते हुए कहा कि रूस की प्रसिद्ध किताबों ने हमारी पीढ़ी वाले लोगों पर गहरा प्रभाव डाला। मैंने ल्यांगच्याहो में चेर्नीशेवस्की (Chernyshevski) द्वारा लिखित 《क्या करें?》नामक पुस्तक पढ़ी । इस पुस्तक के मुख्य पात्र राहमेतोव (Rahmetov) अपनी दृढ़ता को मजबूत करने के लिये यहां तक कि कील वाले बिस्तर पर सोते थे। उस समय हमें लगता था कि केवल ऐसे करके अपनी दृढ़ता को मजबूत कर सकते थे। इसलिये हम वर्षा व बर्फबारी में भी बाहर जाकर काम करते थे। और कुएं के पास ठंडे पानी से स्नान करते थे। ये सभी इस पुस्तक के प्रभाव से हुए हैं।

जब शी चिनफिंग गांव में रहते थे, तो वे इधर-उधर किताबें ढूंढ़ते थे। येनछ्वान में एक स्थानीय साहित्य अख़बार पहाड़ी फूल भी वे पढ़ते थे। पहाड़ी फूल के माध्यम से वे प्रसिद्ध लेखक लू याओ से मिले। दोनों ने देर रात तक बातचीत की। लू याओ ने बाद में आश्चर्य से कहा कि हालांकि शी चिनफिंग की उम्र उनकी उम्र से चार साल कम है, लेकिन शी का ज्ञान बहुत समृद्ध , और आदर्श भी ज्यादा ऊँचे हैं।

ल्यांगच्याहो में दो या तीन साल रहने के बाद शी चिनफिंग अच्छी तरह से येनछ्वान भाषा बोल सकते थे। ग्रामीण लोगों से सीखकर वे खेती के सभी काम करते सकते थे। अगर कोई समस्या हो, तो वे अन्य लोगों से पूछते थे। धीरे धीरे वे कृषि कार्य में माहिर बन गये।

उन के अलावा शी चिनफिंग को अपने आप ऊनी धागा बनाना, कपड़े का सुधार करना, और रज़ाई बनाना आदि काम भी आते थे।

ल्यांगच्याहो ने शी चिनफिंग को बहुत स्थानीय ज्ञान सिखाया, और शी चिनफिंग ने भी ल्यांच्याहो को बहुत बाहरी ज्ञान दिया।

ल्यांच्याहो में रहने वाला एक किसान बहुत खराब था। एक बार उसे चोरी करते समय पकड़ा गया। उस समय सामान्य नियम के अनुसार सभी किसानों को बुलाकर एक बैठक आयोजित कर उसकी आलोचना की गयी। लेकिन शी चिनफिंग ने उसे नहीं डांटा। इस के विपरीत शी ने धैर्य के साथ उसे शिक्षा दी, और उससे अपनी गलती सुधारने का आग्रह किया। इस किसान ने शी की बात मान ली।

शी चिनफिंग की कार्रवाई के प्रति ल्यांगच्याहो के लोग खूब प्रशंसा करते थे। उन्होंने दिल से कहा कि पेइचिंग से आया लड़का बहुत सक्षम है। क्योंकि लोगों की नज़र में वह खराब किसान धीरे धीरे बेहतर बन गया। वह सक्रिय रूप से गांव के श्रम में भाग लेने लगा, और एक अच्छा किसान बना। बाद में शी चिनफिंग ने इस बात की चर्चा में कहा कि उसने केवल छोटी गलती की, उसे सुधारा जा सकता था। इसलिये मेरी सलाह पर उसने खुद को सुधारा।

धीरे धीरे शी चिनफिंग का घर ल्यांगच्याहो गांव का केंद्र बन गया। लोग उनके घर में आते जाते थे, उनके साथ बातचीत करते थे। और शी चिनफिंग ने किसानों को इतिहास व बाहरी बातें बतायी। वे सचमुच ल्यांच्याहो के एक सदस्य बन गये।

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