ल्यांगच्याहो (भाग 3)

2018-07-03 11:11:59
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ल्यांगच्याहो (भाग 3)

साल 1974 के जनवरी में पीली मिट्टी पठार में सर्दियों के दिनों चीनी पारंपरिक त्योहार वसंतोत्सव आने वाला था। ल्यांच्याहो के गांववासी तैयारियों में व्यस्त थे।

उस समय शी चिनफिंग अभी-अभी कम्युनिस्ट पार्टी के अधीन स्थानीय उत्पादन दल की समिति के महासचिव बने। वे ल्यांगच्याहो में सुधार लाने के बारे में सोच रहे थे।  

एक दिन शी चिनफिंग समाचार पत्र पढ़ रहे थे। 8 जनवरी को जन दैनिक अख़बार में प्रकाशित सछ्वान प्रांत में मीथेन गैस से जुड़ी दो रिपोर्टों पर उनकी नज़र गई। उन्होंने सोचा कि अगर हमारे यहां मीथेन गैस से खाना पकाया जाए और रोशनी लायी जाए, तो कितना अच्छा होगा।

ल्यांगच्याहो दूरस्थल पर स्थित है, कोयले की प्राप्ति के लिए 50 किलोमीटर दूर स्थित कोयले की खान तक जाना पड़ता था। लम्बे समय में स्थानीय लोग पेड़ों को काटकर, उनकी लकड़ियों को जलाकर खाना पकाते थे, जिससे मिट्टी के अभाव की स्थिति पैदा हुई और कृषि विकास पर कुप्रभाव पड़ा। अगर मीथेन गैस का प्रयोग किया जाए, तो ग्रामीण ऊर्जा मुद्दे को दूर किया जा सकेगा और उत्पादन क्षमता भी बढ़ेगी। गांव में शौचालय साफ़ कर सार्वजनिक स्वास्थ्य स्तर भी उन्नत होगा। इसके साथ ही कृषि उर्वरक मामले का भी निपटारा किया जा सकेगा और अनाज की उत्पादन क्षमता भी उन्नत होगी। मीथेन गैस, ग्रामीण क्षेत्र में उत्पादन और जीवन से जुड़े मामलों के निपटारा करने की एक चाबी है।      

मीथेन गैस से सुनहरे भविष्य के प्रति शी चिनफिंग को प्रेरणा मिली। लेकिन उन्होंने शांत होकर यह सोचा कि दक्षिण पश्चिमी चीन स्थित सछ्वान प्रांत और उत्तर पश्चिमी भाग में स्थित उत्तरी शानशी प्रांत के बीच मौसम का बड़ा फर्क है। सछ्वान की यह चाबी उत्तरी शानशी के ताले के लिए अनुकूल है कि नहीं?

इस सवाल के जवाब की प्राप्ति के लिए शी चिनफिंग ने खुद सछ्वान जाने का फैसला किया। उन्होंने पैदल ही 40 किलोमीटर दूर स्थित कांउटी शहर जाकर मीथेन गैस के विकास से जुड़े अपने सुझाव और सछ्वान में सीखने वाली योजना को सीपीसी कांउटी शाखा समिति के महासचिव के सामने प्रस्तुत की। उन्हें पुष्टि मिली। वसंतोतस्व के बाद शी चिनफिंग दूसरों से पैसे उधार लेकर अन्य दो सहकर्मियों के साथ सछ्वान गए।

ल्यांगच्याहो (भाग 3)

उस समय सछ्वान प्रांत में मीथेन गैस विकास दल के उप प्रभारी यांग छाओ, जो नए चीन की स्थापना के पूर्व यानआन शहर में आठ सालों तक कार्यरत थे, ने शी चिनफिंग समेत तीनों लोगों का हार्दिक स्वागत किया और विस्तृत रूप से सछ्वान प्रांत में मीथेन गैस की स्थिति से अवगत करवाया। इसके साथ ही उन्हें छंगतू के उपनगर स्थित कांउटी में मीथेन गैस वैज्ञानिक अनुसंधान इकाई में निरीक्षण दौरा करने का बंदोबस्त किया। 

निरीक्षण दौरे से शी चिनफिंग को पक्का विश्वास हो गया और सछ्वान से वापस लौटने के बाद उन्होंने ल्यांगच्याहो में मीथेन गैस के विकास करने का निर्णय लिया।

लेकिन उनके सामने एक के बाद एक सवाल सामने आये, जो कल्पना से कहीं ज्यादा थे।

सर्वप्रथम, परीक्षण टंकी कहां स्थापित की जाए?गांववासियों के घर के आँगन में मिट्टी बहुत नर्म थी, जो मीथेन गैस की टंकी खोदने के लिए असमर्थ थी। गांव के भीतर और बाहर की पगडंडी छोटी ही नहीं, टेढ़ी-मेढ़ी थी, जो टंकी की स्थापना के लिए प्रयोगात्मक सीमेंट, पत्थर और रेत के परिवहन के लिए असमर्थ थी, तो सामग्रियों का परिवहन कैसे किया जाए?गांववासी विकेंद्रित तौर पर रहते थे, मीथेन गैस टंकी की स्थापना किये जाने के बाद गैस को उनके घर पहुंचायी जा सके?सबसे गंभीर सवाल यह था कि मीथेन गैस टंकी के आवरण के लिए खास पत्थर की आवश्यकता है, लेकिन इस प्रकार के पत्थर ल्यांगच्याहो में नहीं थे……

सवाल ज्यादा है, इनका समाधान करना वास्तिवक कदम उठाना चाहिए। शी चिनफिंग कुछ युवा गांववासियों को बुलाकर 15 किमी. की दूरी पर पत्थर खोदने गए। एक-एक थैली के पत्थर को पीठ पर लाद कर वापस लाते थे। उन्होंने अनुभवी गुरु से सीखकर चूना पत्थर बनाने वाला एक छोटा कारखाना स्थापित किया......

मन में पक्का विश्वास होने के चलते शी चिनफिंग व्यस्त रहे। लेकिन गांव में अलग आवाज़ निकली:

टंकी की खुदाई में व्यस्त रहे शी चिनफिंग के सामने किसी ने कहा:ज्यादा काम न करो। सछ्वान गर्म है और हमारे यहां ठंडा है। मीथेन गैस हमारे यहां नहीं हो सकती।

लेकिन शी चिनफिंग को विश्वास था कि वास्तविक स्थिति से तथ्य साबित होगी, टंकी की स्थापना किये जाने के बाद सब कुछ ठीक हो जाएगा।

शी चिनफिंग के दृढ़ विकल्प और कठोर प्रयास से जुलाई 1974 के मध्य में 8 घनमीटर वाली मीथेन गैस टंकी स्थापित हो चुकी थी। लेकिन शी को खुशी नहीं मिली। क्यों?क्योंकि गैस परिवहन पाइप जोड़ने के बाद मीथेन गैस नहीं आयी।

सवाल कहां पर था?क्या गैस परिवहन पाइप में कुछ रूकावट थी?शी चिनफिंग ने एक लोहे के डंडे को पाइप में घुसाया, और कुछ क्षण बाद गैस निकलने की आवाज़ आई। शी चिनफिंग ने मीथेन गैस स्टोव को खोला और माचिस से गैस जलाई।

सफल हुआ। यह खबर शीघ्र ही सारे गांव में फैल गई, फिर कम्युन तक, फिर कांउटी तक...... लोग चारों ओर से ल्यांगच्याहो आए, इस पवित्र आग, स्वच्छ आग देखने के लिए।  

मीथेन गैस के परीक्षण में सफलता मिली। यानआन शहर की सीपीसी शाखा समिति और यानछ्वान कांउटी की सीपीसी शाखा समिति ने इस पर महत्व दिया। यानछान कांउटी की सीपीसी शाखा समिति ने वर्ष 1977 में पूरी कांउटी में मीथेन गैस का प्रयोग करने की योजना बनाई और ज्ञान सीखने के लिए खास तौर पर एक औपचारिक परीक्षण दल सछ्वान भेजा।  

ल्यांगच्याहो (भाग 3)

“दस हज़ार किताब पढ़ने के बाद दस हज़ार ली (एक किमी. दो ली) का रास्ता चलना है।”सछ्वान की यात्रा से स्थानीय रीति रिवाज़ ने शी चिनफिंग पर गहरी छाप छोड़ी। वे स्थानीय रीति रिवाज़ जानने में संलग्न रहे। परीक्षण दल में ह यिनक्वेइ नाम का युवा, जो पेइचिंग से सहायता के लिए उत्तर शानशी आए, ने भाव विभोर होकर कहा कि शी चिनफिंग सीखने और सोचने को पसंद करने वाले व्यक्ति हैं, जो ज्ञान और कार्रवाई के मिलन वाले भी हैं।  

यानछाव कांउटी में वापस लौटने के बाद कांउटी सीपीसी समिति ने परीक्षण दल की रिपोर्ट सुनी और शीघ्र ही पूरी कांउटी में मीथेन गैस के निर्माण को आगे बढ़ाने का फैसला किया। विभिन्न प्रशिक्षण कक्षाएं खोली गईं। शी चिनफिंग प्रमुख शिक्षक के रूप में तकनीक सीखाते थे।

अगस्त 1975 में ल्यांगच्याहो में कुल 34 मीथेन गैस की टंकियां स्थापित हुईं, गांव में 43 परिवारों में रोशनी देने और खाना पकाने की मुश्किलों को दूर किया गया।

 बड़े काम में छोटे से ब्योरे पर ख्याल रखना है। मीथेन गैस के निर्माण वाले अनुभव से शी चिनफिंग पर बड़ा प्रभाव पड़ा। 

15 साल बाद, शी चिनफिंग, जो फू च्येन प्रांत के नींग-द क्षेत्र की सीपीसी समिति के महासचिव थे, ने याद करते हुए कहा कि उत्तरी शानशी प्रांत के यानछ्वान कांउटी स्थित ल्यांगच्याहो गांव में कार्यरत समय मैंने पूरे गांव में मीथेन गैस के प्रयाग वाली वैज्ञानिक तकनीकी कार्रवाई की, उस दौरान हमने वैज्ञानिक तकनीकी प्रगति का मीठा फल खाया। गांववासियों के चहरे पर मुस्कुराहट आज भी मेरी नज़र में उभरती है। तथ्यों से जाहिर है कि वैज्ञानिक तकनीकी स्तर उन्नत होकर उत्पादन और जीवन मुद्दे का समाधान किया जा सकेगा। हम नागरिकों का समर्थन भी प्राप्त कर सकेंगे।  

30 साल बाद, तत्काल चच्यांग प्रांत की सीपीसी समिति के महासचिव रहे शी चिनफिंग ने एक बार छुनआन कांउटी का निरीक्षण दौरा किया। उन्होंने खास तौर पर कांउटी के दक्षिण पश्चिमी भाग स्थित श्याच्यांग गांव में मीथेन गैस की स्थिति जानने गए। खुद पर मज़ाक करते हुए उन्होंने कहा कि वे मीथेन गैस के निर्माण वाले पेशेवर व्यक्ति हैं। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों से मीथेन गैस के निर्माण को अच्छी तरह करने की मांग की, ताकि नागरिकों को सही मायने में लाभ मिलेगा।

आज, ल्यांगच्याहो गांव में बिजली आ गई है। लेकिन एक प्रतीक, एक इतिहास के रूप में शी चिनफिंग द्वारा निर्मित पहली मीथेन गैस टंकी सुरक्षित रही है, इसके पास एक पत्थर वाला स्मारक रखा, जिस पर “शानशी प्रांत में पहली मीथेन गैस टंकी”शब्द लिखा गया है। उस समय मीथेन गैस टंकी की स्थापना के लिए पगडंडी से बड़े रास्ते तक विस्तार किया गया, जो आज तक प्रयोग किया जा रहा है और स्थानीय गांववासियों को लाभ मिलता है।

 

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