ल्यांगच्याहो (भाग 2)

2018-07-02 16:38:58
Comment
शेयर
शेयर Close
Messenger Messenger Pinterest LinkedIn

ल्यांग च्यहो (भाग2)

ल्यांग च्यहो (भाग2)

 मैं वहां जाकर एक किसान बना। वहां मैंने सात साल बिताये।”

महासचिव शी चिनफिंग की ल्यांच्याहो में अपने शिक्षित युवा जीवन की कहानी बताई। जन नेता के आरंभिक आदर्श की खोज करें। गांव ल्यांच्याहो में हुए ज़मीन-आसमान के बदलाव को रिकॉर्ड करें। और आगे बढ़ाने का विश्वास प्रोत्साहित करें।

यह कहानी 6 भागों में प्रस्तुत की जाएगी ।यह है दूसरा भाग ।

अपने दिल के भीतर शी चिनफिंग हमेशा अपने को येनएन वासी समझते हैं ।

14 अगस्त 2004 को तत्कालीन च च्यांग प्रांत की सीपीसी समिति के सचिव शी चिनफिंग ने श्येनएन रेडियो और टीवी स्टेशन के साथ एक विशेष साक्षात्कार में यह पूछे जाने पर कि क्या अपने को एक शतप्रतिशत येनएन वासी समझते हैं ,जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि मैं सचमुच अपने को येनएन वासी समझता हूं ,क्योंकि वहां पर मेरे जीवन का एक अहम पड़ाव है। मेरे कई बुनियादी विचार और कई बुनियादी विशेषताएं येनएन में बनी थीं। सो स्वभावतः मैं अपने को येनएन वासी समझता हूं।

22 दिसंबर 1968 को अध्यक्ष माओ त्सेतुंग ने शिक्षित नौजवानों से अपील की कि वे गांव जाकर किसानों से शिक्षा प्राप्त करें। यह बहुत जरूरी है। देशभर में 1 करोड़ 70 लाख शिक्षित युवा अध्यक्ष माओ की अपील के तहत शहर से रवाना होकर गांव चले गये और अविस्मर्णीय जीवन यात्रा शुरू की।

शी चिनफिंग उन बड़ी संख्या वाले प्रवासी युवाओं में से एक थे। उनका प्रस्थान स्थल पेइचिंग और गंतव्य पवित्र क्रांतिकारी स्थान येनएन था।

13 जनवरी 1969 को पेइचिंग रेलवे स्टेशन में भीड़भाड़ नज़र आ रही थी। प्रशिक्षित युवाओं की विशेष रेलगाड़ी पहले दक्षिण की ओर हनान प्रांत चली गयी, फिर लोंगहाई रेलवे लाइन से पश्चिम की ओर गयी और शीएन पहुंचने के बाद उत्तर की ओर चली और थुंग छुएं पहुंची। थुंग छुएं में नाश्ता करने के बाद शिक्षित युवा ट्रक से येनएन रवाना हो गये।

16 जनवरी को शी चिनफिंग अपने साथियों के साथ येनछुएं काउंटी के वेन एन यी कम्यून पहुंचे। फिर वे सितारों की तरह वेन एन यी कम्यून की विभिन्न उत्पादन टीमों में भेजे गये थे।

शी चिनफिंग समेत 15 युवा ल्यांग च्याहो भेजे गये। उनमें से शी चिनफिंग की आयु सब से कम थी। तत्कालीन ल्यांग च्याहो सीपीसी शाखा के सचिव ल्यांग यूमिंग को याद है कि शी चिनफिंग ने एक भूरे रंग वाला संदूक लिया हुआ था, जिसमें पुस्तकें भरी हुई थीं। शिक्षित युवाओं का सामान उठाने के समय गांव के एक नौजवान ने भूरे रंग का संदूक चुना। रास्ते में वह पीछे रह गया। आराम के समय उसने दूसरा बड़ा संदूक उठाने की कोशिश की ,तब उसने पाया कि वह भूरे रंग का संदूक भारी था। ल्यांग च्याहो पहुंचकर लोगों को पता चला है कि शी चिनफिंग वास्तव में दो संदूक लाये हैं। भूरे रंग के संदूक के अलावा और एक चमड़े वाला संदूक भी था, जिसमें पुस्तकें भरीं थीं।

 

गोरा, लंबा और पतला, शी चिनफिंग के प्रति लोगों का प्रारंभिक अनुभव

ल्यांग च्याहो में 60 से अधिक परिवार थे और 200 से अधिक आबादी थी। एक नदी गांव को बीच से पार करती थी। गांव के किसान नदी के दोनों किनारे पर स्थित पहाड़ पर बने याओतुंग यानी गुफा में रहते थे। गुफा के बाहर पीली मिट्टी वाले पहाड़ दिखते थे। अँधेरा होने के बाद गुफा में दीये की रोशनी खिड़की से बाहर निकलती थी, पर जो देखा जा सकता था, उसका क्षेत्रफल सौ वर्गमीटर से कम था।

उस समय शी चिनफिंग ने बताया कि यह ऊपरी गुफ़ा मानव के जीवन जैसा था ।

शहर से आये 15 शिक्षित युवा दो समूहों में बांटे गये। वे अस्थाई तौर पर ल्यांग च्याहो के यूथ कम्यूनिस्ट लीग शाखा के सचिव च्यांग छिंगयुएं के घर के एक गुफा में रहते थे।

ग्रामीण जीवन शुरु हुआ।

गांववासी पेइचिंग से आये शिक्षित युवाओं को गौर से देखते थे, जबकि शिक्षित युवा भी गांववासियों को ताकते थे।

वर्ष 1969 का वसंत त्योहार जल्दी ही आ गया। शिक्षित युवाओं का येनएन वासियों ने जोशपूर्ण सत्कार किया। उन्होंने स्थानीय विशेषता वाले ब्रैज्ड मीट यानी शोरबे वाला मीट, तला हुआ चिकन, पकौड़ी और स्पेयररिब स्वादिष्ट खाने का लुत्फ उठाया। खाने के साथ चावल से बनी वाईन भी उपलब्ध थी। पदार्थों के अभाव के युग में यह खाना भव्य कहा जा सकता था। शिक्षित युवाओं को हैरानी हुई कि उत्तर शैनशी में इतना अच्छा खाना भी मिलता था।

 

कम समय की खुशियों के बाद ल्यांग च्याहो का सच्चा पहलू दिखायी दिया।

चीनी पंचाग का पहला आधा महीना बीतने के बाद गांव के कुछ लोग  अपने घर के द्वार पर ताला लगाकर रवाना हो गये।

हर साल इस समय में कई गांववासी भीख मांगने के लिए बाहर चले जाते थे। येन छुएं काउंटी में लगभग आधे गांवों में कुछ लोग भीखारी वाला जीवन जीने के लिए बाहर जाते थे, जिनमें कुछ उत्पादन टीमों के नायक भी शामिल थे।

वर्ष 2004 में शी चिनफिंग ने येनएन रेडियो और टीवी स्टेशन के साथ हुई बातचीत में याद करते हुए कहा कि उस समय लोग उनके बारे में अक्सर एक बात का उल्लेख करते थे कि एक बार उन्होंने ब्रेड से कुत्ता खिलाया। असली बात ऐसी थी कि बैग ठीक ठाक करने के समय शी चिनफिंग ने पाया कि पेइचिंग से लाया आधा ब्रेड खराब हो गया, तो कुत्ते को खिलाया। गांववासियों ने पहले ब्रेड नहीं देखा था और नहीं खाया था। शी चिनफिंग से सुना था कि वही ब्रेड था। तो उनको धक्का लगा कि ऐसी अच्छी चीज कैसे कुत्ते को खिलायी गयी। सो कुछ लोग कहने लगे कि शिक्षित युवा अनाज बर्बाद करते थे। एक के बाद एक यह अफ़वाह पूरी काउंटी में फैल गयी।

मैंने पीली मिट्टी का बेटा शीर्षक आलेख में शी चिनफिंग ने ल्यांग च्याहो जीवन का सिंहावलोकन किया था। उन्होंने कहा कि उस समय मैं छोटा था और एकता सवाल पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। दूसरे लोग रोज़ पहाड़ पर जाकर काम करते थे, मैं तो मनमानी करता था। मुझे लेकर किसानों का अनुभव अच्छा नहीं था।

शी चिनफिंग ने जो एकता की बात कही ,जिसको उनके पिता शी चोंगशुन बड़ा ध्यान देते थे। शी चिनफिंग ने कहा कि मेरे पिता अक्सर मुझे एकता का महत्व समझाते थे और हमसे बचपन से ही एकता पर ध्यान देने के साथ दूसरो को एकतापूर्ण करने की मांग करते थे। लोगों के बीच सिर्फ़ अपना ख्याल रखना ठीक नहीं है।

ऐसी एकता की अवधारणा का पालन करते हुए शी चिनफिंग किसानों और गांववासियों के बीच पिघल गये। उन्होंने जनता में जड़ जमाई। दूसरे को एकता में निपुर्ण करना उनके नेतृत्व का एक स्पष्ट लाभ है।

लगता था कि वे एक दूसरे आदमी में परिवर्तित हुए हैं। शी चिनफिंग ने पेइचिंग के युवा और गांव के युवा के बीच मौजूद फासला पाटने की बड़ी कोशिश की।

शी चिनफिंग के लिए ल्यांग च्याहो में सब से बड़ी परेशानी बात पिस्सू थी। शी चिनफिंग को स्किन एलर्जी थी। पिस्सू के डसने के बाद स्किन में सूजन हो जाती थी, जो बड़ी परेशानी होती थी। शी चिनफिंग और उनके  साथियों ने पिस्सू का मुकाबला करने की बड़ी मशक्कत की। दो साल के बाद शी चिनफिंग इससे अभ्यस्त हो गये। चाहे पिस्सू कितना भी काटता था ,वे आराम से सो जाते थे।

गांववासियों की नज़र में शी चिनफिंग का ज्ञान और अनुभव काफी ज्यादा था और चरित्र सौम्य था। वे बहुत ईमानदार थे। उनकी बात उग्र नहीं थी और संरक्षणवादी भी नहीं थी।

शी चिनफिंग गांव के युवाओं से परिचित हो गये। उन्होंने अपने जूते को गरीब साथी को दे दिया और युवाओं के लिए बाल काटने लगे। उन्होंने गांव के युवाओं को तैराना भी सिखाया। उन्होंने कई दोस्त बनाये।

किसानों ने दिल से शी चिनफिंग को स्वीकार किया। शी चिनफिंग गांववासियो के लिए बाहरी दुनिया का पता लगाने का एक माध्यम और आँख भी हैं।

(वेइतुंग) 

शेयर

सबसे लोकप्रिय

Related stories