शी चिनफिंग नरेंद्र मोदी से मिले

2018-06-10 08:46:14
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चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 9 जून को छिंगताओ में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।

मुलाकात के शुरु में शी चिनफिंग ने सर्वप्रथम एक महीने पहले उनके और मोदी के बीच वूहान में हुई अनौपचारिक वार्ता का उच्च मूल्यांकन करते हुए कहा कि वह बहुत सफलतापूर्ण और सार्थक मुलाकात थी। हमने अंतर्राष्ट्रीय परिस्थिति और चीन-भारत संबंधों में अहम मुद्दों को लेकर गहन रूप से विचार विमर्श किया और महत्वपूर्ण आम सहमतियां बनाईं। इस महीने दोनों देशों के नागरिकों और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने हमारे बीच हुई अनौपचारिक वार्ता का सक्रिय आंकलन किया। विश्वास है कि समय के चलते अनौपचारिक वार्ता का आधुनिक और ऐतिसाहिक अर्थ ज्यादा से ज्यादा स्पष्ट दिखाई देगा। चीन भारत के साथ मिलकर वूहान भेंटवार्ता को नयी शुरुआत बनाकर द्विपक्षीय राजनीतिक आपसी विश्वास को लगातार आगे बढ़ाएगा, आपसी लाभ वाले सहयोग को व्यापक तौर पर करेगा, ताकि चीन-भारत संबंधों के विकास को और बेहतर, और तेज़, और स्थिर रूप से आगे बढ़ाया जा सके।

शी चिनफिंग ने बल देते हुए कहा कि चीन और भारत ने वूहान भेंटवार्ता में मिली आम सहमतियों के ठोस रूप से कार्यान्वयन के क्षेत्रों में कई उपलब्धियां हासिल कीं। दोनों पक्षों को इसके आगे कार्यान्वयन करने का लगातार प्रयास करना चाहिए, रणनीतिक संपर्क कायम रखते हुए आर्थिक व्यापारिक सहयोग और मानविकी मेलजोल को आगे बढ़ाना चाहिए, अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मामलों में समन्वय और सहयोग को मज़बूत करना चाहिए। 

 शी चिनफिंग ने कहा कि शांगहाई सहयोग संगठन यानी एससीओ के औपचारिक सदस्य के रूप में भारत पहली बार शिखर सम्मेलन में भाग ले रहा है। चीन भारत समेत अन्य सदस्य देशों के साथ मिलकर“शांगहाई भावना”का प्रचार प्रसार करते हुए एससीओ के स्वस्थ और स्थिर विकास को आगे बढ़ना चाहता है।

मोदी ने कहा कि कुछ समय पूर्व राष्ट्रपति शी के बीच वूहान में हुई अनौपचारिक वार्ता बहुत सफल हुई, जो बहुत महत्वपूर्ण है, इससे भारत-चीन संबंध के विकास को लेकर मेरा विश्वास और मज़बूत हो गया है, यह अनौपचारिक वार्ता भारत-चीन संबंधों के इतिहास में मील का पत्थर ज़रूर बनेगी। भारत-चीन सहयोग विश्व की शांति और समृद्धि के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। भातर वूहान अनौपचारिक वार्ता के आधार पर दोनों देशों के संबंधों के विकास को लगातार आगे बढ़ाना चाहता है। नए सदस्य के रूप में भारत एससीओ में सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है और छिंगताओ शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन का समर्थन भी करता है।

शी चिनफिंग और मोदी मुलाकात के बाद संबंधित द्विपक्षीय सहयोग दस्तावेज़ों के हस्ताक्षर के साक्षी बने। 

(श्याओ थांग)

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