चीन और अमेरिका के बीच व्यापारिक युद्ध न लड़ने से जनता को और ज्यादा सुख महसूस होगा

2018-05-20 11:25:38
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चीन और अमेरिका के बीच व्यापारिक युद्ध न लड़ने से जनता को और ज्यादा सुख महसूस होगा

चीन और अमेरिका के बीच व्यापारिक युद्ध न लड़ने से जनता को और ज्यादा सुख महसूस होगा

19 मई को चीन-अमेरिका आर्थिक व व्यापारिक वार्ता संपन्न हुई। दोनों ने संयुक्त वक्तव्य जारी कर इस बार की वार्ता की उपलब्धियां जारी कीं। ये उपलब्धियां आसानी से प्राप्त नहीं हुई हैं। हालांकि दोनों पक्षों की सभी मांग को पूरा नहीं किया गया है, लेकिन कम से कम यह सक्रिय, न्यायपूर्ण, उचित और रचनात्मक है, जो चीन-अमेरिका संबंध के स्वस्थ विकास और वैश्विक आर्थिक स्थिरता व समृद्धि को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।

समानता और आपसी लाभ, साझा उपभोग और विकास चीन-अमेरिका संयुक्त वक्तव्य का सार है। दोनों पक्षों ने व्यापारिक सौदे की सूची और रकम साफ-साफ नहीं बतायी। लेकिन वक्तव्य से हमें पता चला है कि चीन अमेरिका से मालों व सेवा को बड़े हद तक खरीदेगा, जिनमें अमेरिकी कृषि उत्पाद, तेल और स्वच्छ ऊर्जा व उच्च विज्ञान व तकनीक उत्पाद शामिल हैं। संयुक्त वक्तव्य चीन के समानता व आपसी लाभ के सिद्धांत को प्रतिबिंबित करता है और दोनों पक्षों की सबसे बड़ी सदिच्छा जाहिर हुई है।

हाल में चीन में विश्व में सबसे बड़े पैमाने वाला मध्यम वर्ग के लोग रहते हैं। 2020 में चीन में औसत प्रति व्यक्ति जीडीपी 10 लाख अमेरिकी डॉलर पार करेगा। समाज का प्रमुख अंतर्विरोध जनता के दिन ब दिन बढ़ने वाले सुन्दर जीवन की मांग और असंतुलित व अपूर्ण विकास के बीच का अंतर्विरोध है। इधर के सालों में ज्यादा से ज्यादा लोग विदेशों में माल खरीदने लगे हैं, जिससे उपभोक्ताओं के प्रति चीनियों की विविधतापूर्ण मांग प्रतिबिंबित होती है। अमेरिका के नारंगी, सोयाबीन, लाल वाइन और पिस्ता आदि ने चीनी उपभोक्ताओं द्वारा उच्च गुणवत्ता वाले कृषि उत्पादों की मांग को पूरा किया है, साथ ही अमेरिकी किसानों को भारी लाभ भी दिया है।

इस बार चीन और अमेरिका ने कृषि उत्पादों के आयात पर अनेक सहमतियां प्राप्त कीं। निसंदेह ये चीन और अमेरिका दोनों देशों की जनता के हितों की रक्षा करेंगी।

ऊर्जा को चीनी अर्थतंत्र का रक्त माना जाता है। विश्व की दूसरी आर्थिक इकाई होने के नाते चीन में तेज़ आर्थिक विकास और करीब 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा मांग से चीन में ऊर्जा की सप्लाई व मांग का अंतर्विरोध दिन ब दिन बड़ा होता जा रहा है। नीले आसमान की रक्षा करने के लिए चीन को भी स्वच्छ ऊर्जा के आयात का विस्तार करने की आवश्यकता है।

चीन-अमेरिका संयुक्त वक्तव्य के मुताबिक दोनों ने वार्ता में बौद्धिक संपदा के संरक्षण को बड़ा महत्व दिया है। चीन ने पेटेंट कानून आदि संबंधित कानूनों व नियमों का संशोधन करने का वादा किया। यह द्विपक्षीय हितों और बाजार नियमों से मेल खाने वाला आवश्यक विकल्प हैं। वास्तव में चीन में विज्ञान व तकनीक शक्ति के बढ़ने से चीन में बौद्धिक संपदा के संरक्षण की मांग भी बढ़ती रहती है।

इस साल बोआओ एशिया मंच में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने बौद्धिक संपदा के संरक्षण को मजबूत करने से खुलेपन का विस्तार के चार कदमों में एक बताया और चीनी राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा ब्यूरो का पुनःगठन करने की बात भी कही। निसंदेह बौद्धिक संपदा का संरक्षण समान है। अमेरिका सरकार को भी चीनी बौद्धिक संपदा के संरक्षण को मज़बूत करना चाहिए। सिर्फ समानता से रक्षा करने से साझी जीत व विकास किया जा सकेगा।

खुशी की बात यह है कि इस बार चीन और अमेरिका ने उच्च विज्ञान व तकनीक उत्पादों के क्षेत्र में भी व्यापारिक सहयोग पर मतैक्य प्राप्त किया। यह चीन-अमेरिका व्यापारिक संतुलन के लिए अच्छी बात है।

वाशिंगटन से रवाना होते समय चीनी उप प्रधानमंत्री ल्यू ह ने कहा कि इस बात चीन-अमेरिका आर्थिक व व्यापारिक वार्ता की सबसे बड़ी उपलब्धि है कि दोनों पक्ष सहमत हुए हैं कि वे व्यापारिक युद्ध नहीं लड़ेंगे और एक दूसरे पर टैरिफ़ बढ़ाने की कार्यवाई बंद करेंगे।

आगामी 15 सालों में अनुमान है कि चीन 240 खरब अमेरिकी डॉलर के मालों का आयात करता रहेगा। यह अमेरिका समेत विभिन्न देशों को और ज्यादा मौके दे सकेगा। निसंदेह चीन और अमेरिका के आर्थिक व व्यापारिक क्षेत्रों में जटिल समस्याएं हैं। संयुक्त वक्तव्य का कार्यान्वयन करने के लिए दोनों को बाजार नियम के मुताबिक आगे बढ़ना चाहिए। दोनों को बार-बार बातचीत करनी चाहिए और दोनों देशों की जनता को सबसे अधिक सुखमय अनुभव देने की आवश्यकता है।

 (श्याओयांग)

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