चीन : मोदी और शी के बीच 'अनौपचारिक बैठक'

2018-04-27 12:42:02
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चीन : मोदी और शी के बीच 'अनौपचारिक बैठक'


(लेखक- अखिल पाराशर)

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच चीन के हूपेइ प्रांत के वूहान शहर में 27 से 28 अप्रैल को एक 'अनौपचारिक बैठक' होने जा रही है।

माना जा रहा है कि पिछले साल दोनों देशों के संबंधों में आई खटास को दूर करने की दिशा में ही इस बैठक का आयोजन किया जा रहा है। यह एक अनौपचारिक शिखर सम्मेलन है। दोनों नेता अनौपचारिक माहौल में बैठक करेंगे, बैठक का एजेंडा खुला होगा। दोनों देशों के नेता मौजूदा विश्व परिस्थिति में आये बड़े बदलाव पर रणनीतिक संपर्क करेंगे और चीन-भारत संबंधों के भावी विकास में समग्र, दीर्घकालिक और रणनीतिक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।

भले ही प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा की घोषणा अचानक हुई हो लेकिन इसकी तैयारियां काफी पहले से चल रही थीं। इस अनौपचारिक बैठक की खबर ने कुछ लोगों को हैरानी में डाल दिया है कि प्रधानमंत्री मोदी को जब जून महीने में छिंगताओ शहर में होने जा रहे शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए चीन जाना ही है तो अभी क्यों जा रहे हैं। वैसे तो इस बैठक में किसी भी रूटीन मुद्दे पर चर्चा नहीं की जाएगी, लेकिन फिर भी यह बैठक प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी दोनों के लिए ही बराबर महत्व रखती है।

दोनों देशों के नेताओं के बीच मुलाकात चीन-भारत संबंध के विकास के लिए लाभदायक होगा। शी चिनफिंग और नरेंद्र मोदी की अनौपचारिक बैठक में दोनों देशों के नेताओं के पारस्परिक विश्वास को मजबूत किया जाएगा, विश्व परिस्थिति और चीन-भारत संबंधों पर रणनीतिक फैसला किया जाएगा, चीन-भारत संबंधों की मुख्य दिशा का मार्गदर्शन किया जाएगा। इससे न सिर्फ दोनों देशों और उनकी जनता को कल्याण पहुंचेगा, बल्कि क्षेत्रीय और विश्व शांति व विकास पर महत्वपूर्ण सकारात्मक असर पड़ेगा।

बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता होगी और कई वैश्विक मुद्दे भी चर्चा का विषय बनेंगे। देखा जाए तो यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया में वैश्वीकरण की प्रक्रिया में मनमानी बढ़ने के साथ संरक्षणवाद जोर पकड़ रहा है। उम्मीद है कि इस बैठक में संरक्षणवाद को लेकर जोखिम पर चर्चा की जाएगी और दुनिया को काफी सकारात्मक चीजें सुनने को मिलेंगी। हालांकि, बैठक में किसी भी तरह का समझौता होने के आसार न के बराबर ही माने जा रहे हैं।

इतिहास के पन्ने पलट कर देखें तो अनौपचारिक यात्रा हमेशा से औपचारिक यात्रा से ज़्यादा कामयाब रही हैं। इसमें प्रेस कॉन्फ़्रेस की कोई बाध्यता नहीं रहती है। ऐसी बैठकों के लिए ज़मीन पहले ही तैयार की जाती है। इस बैठक के दौरान दोनों देशों के नेता भविष्य के संबंधों के लिए एक मिसाल पेश करेंगे, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे के हितों और चिंताओं के प्रति संवेदनशील हों। दोनों पक्षों को लगता है कि इस तरह की मिसाल पेश करने के लिए नेताओं के बीच अनौपचारिक लेकिन मुद्दे पर केंद्रित वार्ता की जरूरत है।

(लेखक चाइना मीडिया ग्रुप, बीजिंग में पत्रकार हैं)

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