चीन में अधिक सुधार और खुलेपन से वैश्विक विकास में नई जीवन शक्ति का संचार : अजित राणाडे

2018-04-11 17:07:59
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दक्षिण चीन के हाईनान प्रांत के बोआओ एशिया मंच में भाग लेने आए भारत के आदित्य बिड़ला ग्रुप के मुख्य अर्थशास्त्री अजित राणाडे ने 10 अप्रैल को सीआरआई संवाददाता के साथ हुए एक खास साक्षात्कार में कहा कि इस वर्ष चीन में सुधार और खुलेपन की 40वीं वर्षगांठ है, चीन के और अधिक सुधार और खुलेपन से ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाभ मिलेगा और वैश्विक विकास की वृद्धि में नई जीवन शक्ति संचार होगी।

भारतीय अर्थशास्त्री अजित राणाडे (दायं से दूसरा) बोआओ एशिया मंच में उपस्थित हुए

भारतीय अर्थशास्त्री अजित राणाडे (दायं से दूसरा) बोआओ एशिया मंच में उपस्थित हुए

अजित ने कहा कि बोआओ एशिया मंच भू-मंडलीकरण चुनौतियों के मुकाबले में अहम भूमिका निभा रहा है। यह मंच विभिन्न देशों के बीच आपसी आदान-प्रदान और एक दूसरे से सीखने का बेहतरीन पुल बन गया है। यहां राजनीतिक, आर्थिक, व्यापारिक और मीडिया जगतों के श्रेष्ठ प्रतिनिधियों और सुयोग्य व्यक्तियों ने एकत्र होकर खुले और मुक्त वातावरण में विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने भू-मंडलीकरण, विश्व व्यापार और जलवायु परिवर्तन आदि महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।

इस वर्ष बोआओ एशिया मंच की स्थापना की 17वीं वर्षगांठ है। यह अजित की मंच में पांचवीं बार भागीदारी है। उन्होंने कहा कि बोआओ एशिया मंच में लोग न केवल वर्तमान एशिया के विकास पर नज़र डालते हैं, बल्कि पिछले 50 सालों और आने वाले 50 सालों में वैश्विक वातावरण में एशिया के विकास पर ध्यान केंद्रित करते हैं। वर्तमान में एशिया विश्व विकास का केंद्र बन रहा है। जापान और दक्षिण कोरिया अब विकसित देश बन चुके हैं, वहीं पिछले 40 सालों में सुधार और खुलेपन किए जाने के बाद चीन विश्व में दूसरा बड़ा आर्थिक समुदाय बन चुका है। न केवल आर्थिक क्षेत्र में, बल्कि विज्ञान तकनीक और नवाचार आदि क्षेत्रों में एशिया ने पर्याप्त तरक्की की है। इस तरह बोआओ एशिया मंच एशियाई मंच ही नहीं, वह एक अंतरराष्ट्रीय मंच भी है, लेकिन इस मंच में एशिया फिर भी केंद्र बिंदू है।

अजित राणाडे ने कहा कि इस वर्ष बोआओ एशिया मंच के वार्षिक सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने अपने भाषण में कई महत्वपूर्ण संकेत दिये। उन्होंने कहा कि चीन सुधार और खुलेपन का और विस्तार करेगा, व्यापारिक भू-मंडलीकरण और व्यापार मुक्ति को आगे बढ़ाएगा। इस पर अजित ने खास ध्यान दिया। उनका कहना है कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने अपने भाषण में सुधार और खुलेपन को और मजबूत करने को कहा, जाहिर है कि आने वाले दिनों में चीन 2.0 वाले उच्च स्तरीय सुधार और खुलेपन पर जोर देगा। इसके प्रति मैं आशाप्रद हूँ। 5 साल पहले, राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने“बेल्ट एंड रोड”पहल प्रस्तुत किया। पिछले 5 सालों में इसके तटीय देशों में अलग-अलग महत्वपूर्ण परियोजनाओं का कार्यान्वयन किया जा रहा है, जिनसे विभिन्न देशों के अधिकाधिक लोगों को लाभ मिला और मिलेगा। इसने विश्व आर्थिक वृद्धि में भी एक नई जीवन शक्ति का संचार भी किया है।

भारतीय अर्थशास्त्री अजित राणाडे बोआओ एशिया मंच में अपना विचार व्यक्त करते हुए

भारतीय अर्थशास्त्री अजित राणाडे बोआओ एशिया मंच में अपना विचार व्यक्त करते हुए

अजित राणाडे कई बार चीन आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि चीन एक महान देश है, हर बार चीन आने पर वे कुछ न कुछ सिखते हैं। पड़ोसी देश होने के नाते भारत बहुत नज़दीक से चीन के विकास को देखता है। चीन की जनसंख्या बहुत बड़ी है, लेकिन इस देश में बड़े पैमाने पर विकास और आर्थिक सुधार किया जा रहा है, वे इसके प्रशंसक हैं।

अजित ने यह भी कहा कि चीन और भारत की स्थिति मिलती-जुलती है। एशिया में सबसे बड़े दो आर्थिक समुदायों और नवोदित आर्थिक समुदायों के रूप में भारत और चीन दोनों ही प्राचीन सभ्यता और संस्कृति वाले देश हैं। उनके विचार में भारत-चीन संबंध में न केवल आर्थिक संबंध पर जोर दिया जाना चाहिए, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों पर भी जोर दिया जाना चाहिए। चीन का विकास एक आदर्श मिसाल है, जो भारत के लिए सीखने योग्य है, खास कर आधारभूत संस्थापन, विज्ञान, तकनीक और रोज़गार संवर्द्धन आदि क्षेत्रों में।

अजित राणाडे ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि 21वीं सदी में भारत-चीन संबंध जीवन शक्ति से ओतप्रोत होगा। विश्व में बड़े देशों के नाते भारत और चीन की जनसंख्या दुनिया का 40 प्रतिशत हिस्सा है। इधर के सालों में दोनों देशों की आर्थिक वृद्धि भी तेज़ गति से आगे बढ़ रही है। उन्हें विश्वास है कि चीन और भारत के बीच सहयोग से विश्व शांति और विकास में जरूर बड़ा योगदान दिया जाएगा।

(श्याओ थांग)

 

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