चीन में मनाया गया प्रवासी भारतीय दिवस

2018-01-10 10:59:30
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पेइचिंग में एक भारतीय समुदाय की अध्यक्ष प्राची गुप्ता ने भाषण देते हुए

इन दिनों भारत और भारत से बाहर अनेक देशों में प्रवासी भारतीय दिवस मनाया गया है। प्रवासी भारतीय दिवस भारत सरकार द्वारा हर साल 9 जनवरी को मनाया जाता है। इसी दिन भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से स्वदेश वापस आये थे। इस दिवस को मनाने की शुरुवात सन् 2003 से हुई थी। प्रवासी भारतीय दिवस मनाने की संकल्पना स्वर्गीय लक्ष्मीमल सिंघवी के दिमाग की उपज थी।

चीन में भी यह दिवस मनाया गया। मंगलवार को चीन स्थित भारतीय दूतावास और कौंसलावासों में प्रवासी भारतीय दिवस का आयोजन हुआ, और काफी संख्या में भारतवंशी एकत्र हुए। भारत के नये राजदूत गौतम बंबावाले ने प्रवासी भारतीय दिवस को संबोधित किया, और सभा में उपस्थितजनों से कहा कि आज का यह प्रवासी भारतीय दिवस हम महात्‍मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका से स्‍वदेश वापस लौटेने और अपने आपको देशसेवा के लिए समर्पित करने के 103 वर्ष पूरे होने की खुशी में मना रहे हैं।

राजदूत गौतम बंबावाले ने यह भी कहा कि प्रवासी भारतीयों ने विदेशों में भारतीय संस्कृति, लोकाचार, और मूल्य को प्रसारित करने में भरपूर योगदान दिया है। भारत सरकार प्रवासी भारतीयों को प्राथमिकता देने के लिए तत्परता, संवेदनशीलता, और शीघ्रता पर अत्यन्त जोर देती है।

वहीं, भारतीय समुदाय की अध्यक्ष प्राची गुप्ता ने भी सभा को संबोधित किया, और कहा कि हम भारतीय चीन में रहकर अपनी जड़ो से जुड़े हुए हैं, और अपनी संस्कृति को फैलाने का प्रयत्न करते हैं। उन्होंने वसुधैव कुटुम्बकम का विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हम एक वैश्विक परिवार का हिस्सा हैं, और अपनी जिम्मेदारियां बखूभी निभाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हमें अपने देश की प्रगति में अहम योगदान देना चाहिए, विशेषकर शिक्षा के क्षेत्र में। शिक्षा के माध्यम से देश तरक्की की राह पर तेज गति से दौड़ेगा।

इसके अलावा, भारतीय दूतावास के सांस्कृतिक केंद्र ने प्रवासी भारतीय दिवस से संबंधित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन किया।

बता दें कि इस दिवस को मनाने के पीछे आशय अप्रवासी भारतीयों की भारत के प्रति सोच, भावना की अभिव्यक्ति, देशवासियों के साथ सकारात्मक बातचीत के लिए एक मंच उपलब्ध कराना है। विश्व के सभी देशों में अप्रवासी भारतीयों का नेटवर्क बनाना तथा युवा पीढ़ी को अप्रवासियों से जोड़ना है। विदेशों में रह रहे भारतीय श्रमजीवियों के जीवन में आने वाली कठिनाईयां सुनना त‍था उन्हें दूर करने का प्रयत्न करना।

(अखिल पाराशर)

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