दक्षिण-दक्षिण मानवाधिकार मंच पेइचिंग में उद्घाटित

2017-12-07 18:35:09
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पहला दक्षिण-दक्षिण मानवाधिकार मंच 7 दिसम्बर को पेइचिंग में उद्घाटित हुआ। 70 से अधिक देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के अधिकारियों और विद्वानों समेत 3 सौ से ज्यादा अतिथि इस दो दिवसीय मंच में भाग ले रहे हैं।

चीनी राज्य परिषद के न्यूज़ कार्यालय और विदेश मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में पहला दक्षिण-दक्षिण मानवाधिकार मंच 7 दिसम्बर को पेइचिंग में उद्घाटित हुआ। 70 से अधिक देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के अधिकारियों और विद्वानों समेत 3 सौ से ज्यादा अतिथि इस दो दिवसीय मंच में भाग ले रहे हैं।

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने मंच के आयोजन पर बधाई संदेश भेजकर बल देते हुए कहा कि वैश्विक मानवाधिकार कार्य का विकास व्यापक विकासमान देशों के समान प्रयास से अलग नहीं किया जा सकता। उन्हें आशा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय न्याय, युक्तियुक्त, खुले और समावेशी भावना के आधार पर विकासशील देशों की जनता की इच्छा का सम्मान करते हुए उनके अधिक संपूर्ण मानवाधिकार का उपभोग करने को आगे बढ़ाएगा, ताकि मानव जाति की समान समृद्धि साकार हो सके।

मौजूदा मंच की थीम है“मानव जाति के समान भाग्य वाले समुदाय की स्थापना:दक्षिण-दक्षिण मानवाधिकार मंच के विकास में नया मौका”। सूरीनाम के विदेश मंत्री यल्डिज दबोरा पोलक-बीहल ने उद्घाटन समारोह में भाषण देते हुए कहा कि दक्षिण-दक्षिण मानवाधिकार मंच ने दक्षिण-दक्षिण देशों के विकास और सहयोग के लिए अच्छा मौका दिया है। विकासशील देश इसके माध्यम से मानवाधिकार से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी राय पेश कर सकेंगे और अपनी चिंता व्यक्त कर सकेंगे, ताकि आपस में सहयोग और मज़बूत किया जा सके।

नीदरलैंड्स के एम्स्टर्डम वीरिए यूनिवर्सिटी के क्रॉस-सांस्कृतिक मानवाधिकार केंद्र के प्रधान टॉम ज़्वर्ट ने चीन में मानवाधिकार विकास की चर्चा करते हुए कहा कि चीन का मानवाधिकार विकास न केवल घरेलू क्षेत्र में किया जा रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में चीन ने अपना उल्लेखनीय योगदान दिया है। पिछले पाँच वर्षों में चीन अधिक से अधिक बड़ी भूमिका निभा रहा है। एक ज्यादा न्याय और सामंजस्यपूर्ण अंतरराष्ट्रीय परिस्थिति की स्थापना में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार व्यवस्था शामिल है। राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने इस वर्ष के शुरु में दावोस विश्व आर्थिक मंच के वार्षिक सम्मेलन में भाषण देते हुए कहा कि भूमंडलीय शासन व्यवस्था में प्रतिनिधित्व और सहनशीलता की कमी है, इस तरह मानव जाति के साझे भाग्य वाले समुदाय की स्थापना की जरूरत है। मुझे लगता है कि मानव जाति के साझा भाग्य वाले समुदाय की स्थापना में कई क्षेत्र शामिल हैं। हमें सभी लोगों की आवाज़े सुननी चाहिए, न केवल उत्तरी विकसित देशों, बल्कि सभी देशों और विभिन्न सामाजिक बुद्धि और ज्ञान स्वीकार करना चाहिए, खासकर दक्षिण देशों की बुद्धि और ज्ञान।

वहीं, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के विकास अधिकार मामले के विशेष रिपोर्टर साद अलफारगी ने कहा कि दक्षिण-दक्षिण देशों के बीच विकास क्षेत्र में सहयोग का विशाल भविष्य है। उम्मीद है कि मौजूदा मंच में व्यापक आम सहमतियां प्राप्त हो सकेंगी।  

गौरतलब है कि मौजूदा दो दिवसीय मंच में“मानव जाति के साझा भाग्य वाले समुदाय की स्थापना और भूमंडलीय मानवाधिकार प्रशासन को आगे बढ़ाना”,“समावेशी विकास और दक्षिण-दक्षिण मानवाधिकार की प्राप्ति”और“दक्षिण-दक्षिण देशों में शिक्षा अधिकार की गारंटी”समेत कुल छह शाखा मंच आयोजित किए जा रहे हैं।

(श्याओ थांग)

 

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