साइकिल पर दुनिया का चक्कर लगाने के मिशन पर एक भारतीय

2017-11-06 16:35:38
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साइकिल पर दुनिया का चक्कर लगाने के मिशन पर एक भारतीय

भारत के पश्चिम राज्य महाराष्ट्र के 26 वर्षीय ज्ञानेश्वर येवतकर महात्मा गांधी के विचारों व सिद्धांतों को दुनिया में फैलाने के उद्देश्य से अकेले ही दुनिया का चक्कर लगाने का प्रयास कर रहे हैं।

भारत के पश्चिम राज्य महाराष्ट्र के 26 वर्षीय ज्ञानेश्वर येवतकर महात्मा गांधी के विचारों व सिद्धांतों को दुनिया में फैलाने के उद्देश्य से अकेले ही दुनिया का चक्कर लगाने का प्रयास कर रहे हैं। वे साइकिल से ही दुनिया का चक्कर लगाने के मिशन पर हैं।

सीआरआई हिन्दी विभाग को दिए एक खास इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उन्हें विश्व भ्रमण शुरू किये 1 साल का समय हो गया है, और म्यांमार, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया, सिंगापूर समेत 11 देशों का दौरा कर चुके हैं। वे अभी तक करीब 15 हजार किलोमीटर साइकिल चला चुके हैं।

महाराष्ट्र के वर्धा जिले के ज्ञानेश्वर ने बताया कि विश्व भ्रमण पर निकलने से पहले भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से एक पत्र भी प्राप्त किया था जिसमें विदेश स्थित सभी संबंधित भारतीय दूतावासों, उच्चायागों, व कौंसलावासों को यथासंभव मदद हेतु आवश्यक कार्यवाही का निर्देश दिया गया था।

उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि दो देशों के बाद उनके सभी पैसे खत्म हो गये थे। स्थानीय लोगों से मदद लेकर उन्होंने अपनी आगे की यात्रा जारी रखी। इंडोनेशिया में उनका कैमरा और बाकि का सामान चोरी हो गया था। जब थाईलैंड में एक अवारा कुत्ते ने उन्हें काट लिया था, तो वहां एक स्थानीय परिवार ने उनका इलाज करवाया और देखभाल की। उन्होंने बताया कि उनका कई बार जंगली जानवरों से सामना हो चुका है, आंधी-तुफान का सामना कर चुके हैं, और कई-कई किलोमीटर तक कोई गांव या शहर न होने की वजह से कई दिनों तक भूखे पेट सफर किया है।

ज्ञानेश्वर ने कहा कि अपने इस सफर में उन्हें कई तरह के अनुभव हासिल हुए हैं। शांगहाई से पेइचिंग तक करीब 1200 किलोमीटर की यात्रा करने में एक महीने का समय लगा, और इस बीच उन्हें चीन में स्थानीय लोगों का प्यार और सुखद अनुभव प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि भाषा का ज्ञान न होने के बावजूद भी स्थानीय लोगों से आदान-प्रदान कर लेते हैं, और स्थानीय लोग खुशी-खुशी उनकी मदद करते हैं।

उन्होंने बताया कि उनकी आगे की योजना चीन के बाद जापान जाना है, उसके बाद लातिन अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, मध्य एशिया जाएंगे। उनके मिशन का आखिरी पड़ाव पाकिस्तान होगा।

(अखिल पाराशर)

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