ह्वामाओ गांव : बना समृद्धि का प्रतीक

2017-11-24 09:41:20
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मुझे दक्षिण पश्चिम चीन के क्वईचो प्रांत में मेरी लोंग मार्च यात्रा के दौरान ह्वामाओ गांव का दौरा करने का मौका मिला। यह गांव ज़ुनी काउंटी में स्थित है, और हाल के वर्षों में गरीबी की दलदल से बाहर आया है।

इस गांव में आकर मुझे स्वच्छ और सुव्यवस्थित सड़कें, बढ़िया और सुन्दर घर, सफेद बादल, हरे पहाड़, ताजा हवा के साथ-साथ सीधे-साधे स्थानीय लोगों का आदर सत्कार देखने को मिला, जिससे मैं बहुत प्रभावित हुआ, और बेहद शांति का एहसास हुआ। इस गांव के सुंदर दृश्य हर किसी को मोहित कर सकते हैं।

जब मेरी यहां एक स्थानीय व्यक्ति से बात हो रही थी, तो उसने बताया कि पहले इस गांव को हुआंगमाओ थियन कहा जाता था, जिसका अर्थ था विरान जगह या निर्जन स्थान। बाद में, उन्होंने नाम बदलकर ह्वामाओ रखा दिया, जो समृद्धि का प्रतीक है और यह वाकई नजर आता है।

उस व्यक्ति की बात मुझे एकदम सही लगी। यह गांव समृद्धि का प्रतीक बन गया है। यहां पक्की सड़के हैं, पक्के घर हैं, स्थानीय लोग स्व-रोजगार कर रहे हैं। यहां बहुत कुछ देखने को मिलता है, जो इस गांव को एक आधुनिक व आदर्श गांव बनाते हैं।

यहां पर यह देखना बिलकुल अजीब नहीं लगता है कि कई ग्रामीणवासियों ने अपने घरों को होटल, मनोरंजन घर, रेस्त्रां, कैफे आदि बना दिये हैं। ये सब उनकी कमाई का जरिया बनता जा रहा है।

हाल के वर्षों में, स्थानीय सरकार ने कुशल आधुनिक कृषि विकसित करने और ग्रामीण पर्यटन को तलाशने के लिए स्थानीय मार्गदर्शन के जरिए गरीबी उन्मूलन और गरीबों को समर्थन देने के लिए कई सुधारत्मक कदम उठाये हैं।

साल 2015 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इसी गांव का दौरा किया, और यहां के ग्रीन हाउस, वित्तीय केंद्रों, हॉटल, दुकानों आदि का दौरा किया और जाना कि गरीबी उन्मूलन की परियोजनाएं किस तरह चल रही हैं। उन्होंने यहां ग्रामीणों से बात करते हुए कहा कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) केंद्रीय समिति किसानों, विशेष रूप से गरीबों की बहुत परवाह करती है और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न नीतियां बनाई हैं।

यह गांव पर्यटन की दृष्टि से बेहद खास बन गया है। यहां पर्यटक आते हैं और नया व ताजा अनुभव प्राप्त करते हैं। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य इस गांव को ग्रामीण पर्यटन के लिए खास बनाता है, साथ ही यह गांव का चीनी मिट्टी के बर्तनों के लिए भी जाना जाता है, जिसका करीब 400 साल पुराना इतिहास है।

(अखिल पाराशर)

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