चीन का माहौल काम करने के अनुकूल - रंगराजन

2017-09-23 20:14:18
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चीन का माहौल काम करने के अनुकूल - रंगराजन

चीन का माहौल काम करने के अनुकूल - रंगराजन

चीन में पिछले दस वर्षों से रहने वाले रंगराजन बीस वर्षों तक इंफोसिस में चीन के सीईओ के तौर पर काम कर चुके हैं, अब वो ज़ेटा वी टेक्नॉलजी सॉल्यूशन के नाम से अपना खुद का व्यवसाय शुरु कर चुके हैं। शांगहाई के यांगपू जिले में इनका कार्यालय है, चीन में अपने नए वेंचर का कार्यालय खोलने पर रंगराजन कहते हैं कि चीन में आईटी क्षेत्र में बहुत ज्यादा इन्नोवेशन हो रहे हैं, यहां का मज़बूत आधारभूत ढांचा और सरकार की तरफ़ से बेहतर माहौल मुहैया कराया जाना ही वो कारण है जिससे चीन में काम करने का एक बेहतर माहौल तैयार है।

 

चीन में तकनीक के क्षेत्र में चाहे वो अलीबाबा हो, टेंसेन्स हो या फिर बाईदू इन सभी में बहुत नई नई खोज हो रही हैं, वहीं भारत में सॉफ्टवेयर का तेज़ विकास हुआ है जो आईटी के क्षेत्र में चीन के लिये बहुत उपयोगी है।

एक बार चीन के तत्कालीन प्रधानमंत्री ज़ू रोंगजी भारत में इंफोसिस के कार्यालय में गए थे और उन्होंने वहां पर कहा था कि चीन का कम्प्यूटर हार्डवेयर बहुत बेहतर है वहीं भारत का सॉफ्टवेयर बढ़िया है तो दोनों को साथ में काम करना चाहिए जिससे हम आपस में मिलकर एक साथ आगे बढ़ सकें। रंगराजन ने बताया कि चीन की कम्प्यूटर टेक्नॉलजी, इंटरनेट, मोबाइल फोन और आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस की कंपनियां अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ना चाहती हैं इसलिये उन्हें बेहतर तकनीक और सॉफ्टवेयर की ज़रूरत है और यहां पर भारत उसका बेहतर सहयोगी बन सकता है। दोनों ही देशों को आपसी सहयोग को और आगे बढ़ाना चाहिए जिससे भविष्य में और तरक्की कर सकें।

रंगराजन ने ये भी बताया कि ये सहयोग दो तरफ़ा होने से दोनों के विकास के साथ साथ लोग भी एक दूसरे को अच्छे से जान पाएंगे, सहयोग इसलिये भी ज़रूरी है क्योंकि भारत और चीन की कुल आबादी दुनियाभर की आबादी का 38 फीसदी है इसलिये साथ काम करने से हमारा भविष्य उज्जवल होगा।  

चीन की तरक्की में सरकार की भूमिका की बात करते हुए रंगराजन ने बताया कि पेइचिंग, शांगहाई जैसे पहले स्तर के शहरों को अगर छोड़ दिया जाए तो चीन में दूसरे स्तर के करीब सत्तर शहर ऐसे हैं जिनका आधारभूत ढांचा भारत के पहले स्तर के शहरों से भी बहुत आगे है। चीन में सरकार ने कर्मचारियों को एक अनुशासित वर्क फोर्स के रूप में ढाला है, साथ ही निर्माण क्षेत्र में लोगों के लिये काम करने का एक बहुत बेहतर माहौल भी तैयार किया है जिसकी वजह से चीन बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

पर्यटन, निर्माण क्षेत्र और आधारभूत ढांचे में चीनी कंपनियों को भारत में निवेश करना चाहिए जिससे तेज़ी से विकास करने में भारत को मदद मिले वहीं भारत भी फार्मा क्षेत्र, सॉफ्टवेयर, खाद्य क्षेत्र और मनोरंजन में भारत चीन में निर्यात कर बेहतर प्रदर्शन कर सकता है क्योंकि चीनी लोगों को भारतीय मनोरंजन पसंद आता है।

 वहीं युवाओं को भी बड़े स्तर पर एक दूसरे देश में आवाजाही करना चाहिए जिससे हम दोनों देश एक दूसरे को बेहतर तरीके से जान सकें, इसके लिये हर वर्ष करीब तीन लाख भारतीय विद्यार्थियों को चीन में आकर उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहिए, और चीन को भी इतने ही विद्यार्थी भारत भेजना चाहिए। फिलहाल भारत के तीस हज़ार विद्यार्थी चीन में पढ़ाई कर रहे हैं। रंगराजन को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में आपसी व्यापार और मानव स्तर पर एक दूसरे देश में आम लोगों की आवाजाही बढ़ेगी जिससे दोनों देशों में होने वाले सहयोग में बढ़ावा होगा जिससे भारत और चीन को समान रूप से लाभ पहुंचेगा।

 

पंकज श्रीवास्तव 

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