चीनी भूमि ने बढ़ाए भारतीय आईटी विशेषज्ञ की सफलता के आयाम

2017-09-20 19:06:45
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चीनी भूमि ने बढ़ाए भारतीय आईटी विशेषज्ञ की सफलता के आयाम

चीनी भूमि ने बढ़ाए भारतीय आईटी विशेषज्ञ की सफलता के आयाम

सुजीत चटर्जी एक आईटी प्रोफेशनल हैं, उन्होंने टीसीएस में बतौर सीईओ (चीन) लंबे समय तक काम किया और फिर वो हांग कांग होते हुए चीन में आए। वर्ष 2003 में पंद्रह वर्ष पहले जब वो चीन आए थे तब उस समय चीनी लोग भारतीय कंपनियों के नाम के बारे में भी नहीं जानते थे। लेकिन बकौल सुजीत आज पंद्रह वर्षों के बाद आज हांगकांग, चीन और ताईवान के लगभग हर आईटी कंपनी में भारतीय आईटी क्षेत्र की मौजूदगी है।

इन पंद्रह वर्षों में चीन में हालात बहुत तेज़ी के साथ बदले हैं। भारत में इंजीनियरिंग करने के बाद निर्माण क्षेत्र में गोदरेज कंपनी में तीन साल तक काम करने वाले सुजीत ने जब एमबीए किया तो उसके बाद कैंपस सेलेक्शन में उन्होंने टीसीएस में पदार्पण किया। सुजीत को टीसीएस ने चीन के लिये सीईओ पद के लिये चुना। चीन आने के बाद सुजीत ने यहां की व्यवस्था को बहुत करीब से देखा, वो चीन की कार्यशैली से बहुत प्रभावित हैं और उन्होंने हमें बताया कि यहां पर कार्यकुशलता और गुणवत्ता पर बहुत ध्यान दिया जाता है और समयबद्ध तरीके से काम किया जाता है जिसके कारण आज चीन दुनिया में सबसे ज्यादा तरक्कीशुदा देश बन चुका है।

सुजीत के अनुसार जब वो चीन में नैसकॉम के चेयरपर्सन थे उस दौरान जब चीन के साथ आईटी के मुद्दे पर भारतीयों के साथ मीटिंग होती थी उस दौर में सिर्फ़ तीन से चार लोग भारत की तरफ़ से यहां पर आते थे लेकिन वर्ष 2017 में, सितंबर के तीसरे सप्ताह में ताल्यान में होने वाली एक ऐसी ही मीटिंग में भारत से 25 कंपनियां प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

चीन की इस कार्यकुशलता का लाभ उठाया जा सकता है, अगर भारत और चीन मिलकर इस दिशा में काम करें तो दोनों ही देशों की कुल आबादी दुनियाभर की आबादी का एक तिहाई बनता है, इसे बहुत हद तक लाभ पहुंचाया जा सकता है, चीन का हार्डवेयर और भारत का सॉफ्टवेयर मिलकर पूरी दुनिया में कमाल कर सकते हैं।

एक तरफ़ जहां पर भारत में प्रतिभा की कमी नहीं है तो वहीं चीन की मज़बूत आधारभूत संरचना और बड़ा बाज़ार दोनों मिलकर विश्व स्तर पर बेहतरीन काम कर सकते हैं। सुजीत चटर्जी ने हमें बताया कि पिछले तीन वर्षों में भारत में सरकार के स्तर पर काम में जो तेज़ी आई है उसे देखते हुए अगले तीन चार वर्षों में आईटी के क्षेत्र में देश की काया पलट होने की संभावना है।

जहां पर पहले भारत और चीन के बीच में सिर्फ़ बड़ी कंपनियों के बीच में ही समझौते हुआ करते थे वो समझौते अब मध्य स्तर की कंपनियों में भी होने लगे हैं लेकिन बावजूद इसके अभी बहुत बड़ी संभावनाएं इन दोनों देशों में मौजूद हैं, अगर भारत और चीन की दूसरे और तीसरे दर्जे की कंपनियों में भी आईटी के क्षेत्र में ऐसे ही साझा समझौते और काम होने लगे तो ये दोनों ही देशों के लिये एक सकारात्मक और बड़ा बदलाव होगा जिसका लाभ भी भारत और चीन को मिलेगा।

  बकौल सुजीत चीन और भारत के बीच आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस में आईटी सर्विस का दायरा बढ़ाने के लिये सुजीत ने इंफोसिस के पूर्व सीईओ, चीन रंगराजन के साथ मिलकर ज़ेटा वी टेक्नॉलजी सॉल्यूशन कंपनी खोली है जिससे छोटी और मंझोली आईटी कंपनियों को चीन की कंपनियों के साथ काम करने के लिये एक बेहतर मंच तैयार किया जा सके। इनका उद्देश्य आईटी के क्षेत्र में शुरुआती योजना बनाने के समय में कमी करना है जिससे कि कोई भी योजना जब बनाई जाए तो उसे लागू करने में बहुत कम समय लगे।

चीन की ज़बरदस्त आधारभूत संरचना, कार्यशैली, गुणवत्ता और समय पर काम करने की पाबंदी ने सुजीत को बहुत प्रभावित किया है जिसके चलते वो चाहते हैं कि भारतीय प्रतिभा को इस देश में बेहतर काम करने का माहौल मिलेगा।  भारत सरकार द्वारा शुरु की गई मेक इन इंडिया और स्टारर्ट अप इंडिया जैसी पहल  भारत सरकार की बेहतरीन योजना है जो सही दिशा में जा रही है, साथ ही हमें न सिर्फ़ चीन से बल्कि दुनिया के हर उस देश से सीखने की ज़रूरत है जहां से हमें कुछ बेहतर मिल सके। इसके साथ ही चीन और भारत में आपस में लोगों के स्तर पर बड़े पैमाने पर आना जाना बढ़ना चाहिए, जिससे आपसी समझ बढ़े।

 

पंकज श्रीवास्तव

 

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