चीनी धरती पर हकीकत में बदलते भारतीयों के सपने

2017-09-15 08:11:59
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चीनी धरती पर हकीकत में बदलते भारतीयों के सपने

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अगर हम ये कहें कि सपने आपको ज़मीन से आसमान पर पहुंचा सकते हैं तो शायद आप इस बात पर यकीन नहीं करें, लेकिन अजूबे इसी धरती पर हुए हैं और उन्हें इंसानों ने ही संभव कर दिखाया है, इसके लिये ज़रूरत होती है तो सिर्फ़ जुनून और कुछ कर गुज़रने की तमन्ना की। ऐसे ही एक शख्स हैं पाचा रॉयचौधरी, आंध्र प्रदेश के गुंटूर से शांगहाई तक का उनका सफ़र किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है।

रॉय ने स्कूल के दिनों से ही फैशन डिज़ाइनर बनने का सपना देखा था, जिसे पूरा करने के लिये वो बैंगलोर आए, वहां पर उन्होंने एक गार्मेंट कंपनी में काम करना शुरु किया, कुछ वर्ष वहां काम करने के बाद वो दिल्ली आए जहां पर उन्होंने इस क्षेत्र से जुड़ा कुछ और काम सीखा, दिल्ली में ही उन्होंने गार्मेंट इंडस्ट्री की सारी बारीकियां सीखीं, इसके बाद उन्हें हांगकांग में काम मिला और फिर वो चीन आ गए जहां पर उन्होंने चच्यांग और च्यांगसू प्रांत में अपना अधिकतर समय बिताया, जैसा कि हमारे बड़े बुज़ुर्ग कहते हैं कि आप एक अंजान राही से भी कुछ सीख सकते हैं, यही काम रॉय ने किया, वो जहां भी गए वहां से उन्होंने कुछ न कुछ सीखा ज़रूर, पढ़ाई के मुकाबले उन्होंने ज़िन्दगी से बहुत कुछ सीखा, मृदुल स्वभाव के रॉय अपनी सफलता का श्रेय अपने उच्चाधिकारी और सहकर्मियों को देते हैं। वर्ष 2003 में हांगकांग आने कुछ समय के बाद उन्होंने 14 वर्ष पहले अपना आशियाना शांगहाई में बनाया और दूसरों के लिये काम करना छोड़कर खुद की "ऐप्परल एंड एक्सेसरीज़" नाम की कंपनी खोली और आज वो गार्मेंट इंडस्ट्री के सफल व्यापारी हैं।

चीनी धरती पर हकीकत में बदलते भारतीयों के सपने

चीनी धरती पर हकीकत में बदलते भारतीयों के सपने

  रॉय अपने कपड़े के व्यापार के साथ साथ शांगहाई में नेशनल एग्ज़ीबीशन सेंटर के पास एकमात्र ऐसे मॉल जहां पर सिर्फ़ रेस्त्रां है में एक रेस्त्रां खोला है जिसका नाम "मिस्टर डोसाज़" है। ये रेस्त्रां उन्होंने अपनी पत्नी के लिये खोला है, दरअसल इस रेस्त्रां को रॉय और उनकी पत्नी रूपा दोनों मिलकर चलाते हैं, एक तरफ़ जहां रॉय को स्वादिष्ट खाना खाने का शौक है तो वहीं मानव संसाधन विषय में स्नातकोत्तर पास रॉय की पत्नी रूपा एक बेहतर शेफ़ भी हैं, पहले ये दोनों पति पत्नी अपने घर में भारतीयों को बुलाकर पार्टी करते जिसमें ये अपने हाथों से तैयार व्यंजन उन्हें खिलाते, दोस्तों से मिली तारीफ़ पर इन्होंने एक सपना बुना और उस सपने पर काम शुरु कर दिया जिसकी तामीर एक रेस्त्रां के रूप में हुई।

चीनी धरती पर हकीकत में बदलते भारतीयों के सपने

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विदेशों में भारतीय खाने की छवि सिर्फ़ करी यानी शोरबे और रोटी की है, रॉय विदेशियों के मन से ये छवि तोड़ना चाहते हैं, साथ ही इनकी सोच मेक डोनाल्ड्स और सब-वे जैसे रेस्त्रां स्थापित करने की है। ये कैरी अवे (carry away) जैसा रेस्त्रां खोलना चाहते हैं। इसलिये उन्होंने कुछ फ्यूज़न(fusion) वाले व्यंजनों को भी अपनी खाने की सूची में जोड़ा है मसलन भारतीय डोसा और मेक्सिकन टैको को उन्होंने डोसा टैकोज़ का नाम दिया जिसमें बेस डोसे का और उसमें फिलिंग मैक्सिकन टैको ही रहेगी, इसका आकार ज्यादा बड़ा नहीं है।

चीनी धरती पर हकीकत में बदलते भारतीयों के सपने

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इसके अलावा इनके खाने की सूची में मैक एंड चीज़ डोसा, तोफू डोसा, समोसा, सछ्वान इडली के साथ रॉय दक्षिण अफ़्रीका के सुप्रसिद्ध स्ट्रीट फूड बनी चाओ डिश को भी अपने रेस्त्रां में जोड़ना चाहते हैं। बनी चाओ में ब्रेड के अंदर ही करी भरकर पेश की जाती है जिसे आप रास्ते पर चलते हुए भी खा सकते हैं।

भारतीय व्यंजनों के साथ नई सोच और इस सोच के साथ रॉय एक रेस्त्रां श्रृंखला शुरु करना चाहते हैं जिससे विदेशों में भारतीय व्यंजन एक नए रूप में लोगों के सामने आए।

पाचा रॉय चौधरी की सफलता को देखकर निश्चित रूप से सीखा जा सकता है कि आप अपना लक्ष्य तय करें, रास्ते में आने वाली रुकावटें खुद ब खुद दूर हो जाएंगी।

 

पंकज श्रीवास्तव  

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