महाकवि ली पाई और उन की कविता
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महाकवि ली पाई और उन की कविता

 

ली पाई चीन के थांग राजवंश के महान कवि थे । चरित्र में स्वच्छंद , स्वतंत्र ,उदार व स्वाभिमान होने के कारण उन्होंने चीनी साहित्य सृजन इतिहास में सर्वाधिक रोमानी अध्याय जोडा ,जिस से थांग राजवंश के स्वर्ण काल में चीनी बुद्धिजीवियों की मानसिक दुनिया को पर्याप्त रूप से प्रतिबिंबित किया गया ।

ली पाई का जन्म वर्ष 701 में हुआ । उन के जन्मस्थान पर अब भी विवाद होता है , लेकिन उन के पितामह का गृहस्था आधुनिक चीन के कांसू प्रांत में था । ली पाई की कविताओं से पता चल सकता है कि वे एक धनी परिवार की संतान थे और छोटी आयु में अच्छी शिक्षा मिली । बीस वर्ष की आयु में उन्होंने चीन के विभिन्न स्थानों की यात्रा शुरू की ।इस के दौरान उन्होंने बडी संख्या में कविताएं लिखीं और साहित्य मंच में असाधारण प्रतिभा का परिचय कर  बड़ा नाम कमाया ।

 ज्ञान के अध्ययन के आधार पर सरकारी पद के लिए परीक्षा में भाग लेना और सरकारी औहदा पाना प्राचीन चीनी बुद्धिजीवियों की समान आकांक्षा थी । ऐसी आकांक्षा लिए ली पाई थांग राजवंश की राजधानी छांगआन पहुंचे । उस की असाधारण प्रसिद्धि और और कुछ माने जाने व्यक्तियों की सिफारिश से वर्ष 742 में ली पाई को दरबारी लेखन संस्था में एक पद मिला ।

 ली पाई एक स्वाभिमान और स्वच्छंद कवि थे ।उन को थांग राजवंश में फैल रहे भ्रष्टाचार पर बड़ा असंतोष था । वे राजनीति में अधिक भूमिका निभाना चाहते थे । पर तत्कालीन बादशाह उन्हें सिर्फ एक कवि के रूप में देखते थे और उन पर सच्चा विश्वास नहीं रखते थे । वे उच्च दरबारी पदाधिकारियों के लांछन और आलोचना के निशाना बने , और निराश होकर ली पाई थांग राजवंश की राजधानी छोडकर देश के विभिन्न स्थानों में घूमने और कविता लिखने का जीवन फिर बिताने लगे ।

 ली पाई ने अपने जीवन के अधिकांश समय को यात्रा में बिताया ।इस लिए उन्होंने सुंदर प्रकृति के बारे में बड़ी मात्रा में कविताएं लिखीं ।अब तक ली पाई की 900 से ज्यादा कविताएं सुरक्षित हैं ।ली पाई की अनोखी काव्य शैली ने चीनी साहित्य पर पर दूरगामी प्रभाव डाला । उन की अद्भुत कल्पना शक्ति उड़ान का पर रखे पाठकों को अलौकिक लोक में ले जा सकती है । उन्हों ने कविता में अत्युति और उपमा से जो वाक्य लिखे थे , वे चीन में सदियों से लोगों की जबान पर रहे हैं ।