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कंफ्युसेस मंदिर , भवन और समाधि

2017-08-15 15:36:00
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प्राचीन चीन का दार्शनिक कंफ्युसेस विश्व में सर्वमान्य महान प्राचीन दार्शनिकों में से एक थे । वह चीन के कंफ्युसेस शास्त्र के संस्थापक थे , चीन के पिछले दो हजार वर्ष लम्बे प्राचीन इतिहास में विभिन्न राजवंशों ने कंफ्युसेस और उस के शास्त्र का समर्थन किया और जोरदार से प्रसार किया था , जिस से कंफ्युसेस शास्त्र का चीन के सामंती समाज में वैचारिक जगत पर आधिकारिक स्थान रहा । कंफ्युसेस के जन्म स्थान यानी पूर्वी चीन के शानतुंग प्रांत के छ्यु फू नगर में उस के निवास , मंदिर और समाधि अब तक अच्छी तरह सुरक्षित रहे हैं ।

कंफ्युसेस के जन्म स्थान में मुख्यतः कंफ्युसेस मंदिर , कंफ्युसेस भवन तथा कंफ्युसेस समाधि तीन भाग सुरक्षित हैं , जो चीन के सुप्रसिद्ध एतिहासिक धरोहर माने जाते हैं ।

कंफ्युसेस मंदिर चीन का प्रथम मंदिर माना जाता है , पिछले दो हजार से ज्यादा सालों में इस मंदिर में नियमित रूप से कंफ्युसेस की पूजा की जाती आई है । ईसापूर्व 478 में कंफ्युसेस के निधन के दूसरे साल बाद तत्कालीन लु राज्य के राजा ने उस के पुराने निवास को मंदिर के रूप में पुनर्निर्मित किया , जिस में कंफ्युसेस के वस्त्र तथा पूजा पात्र सुरक्षित किए गए । उस समय से हर साल मंदिर में कंफ्युसेस की पूजा की जाने लगी । प्रारंभिक समय में मंदिर में मात्र तीन कमरे थे , जब जब कंफ्युसेस शास्त्र की प्रतिष्ठा चीन के इतिहास में अधिकृत संस्कृति के रूप में उन्नत होती जा रही थी , तब तब सामंती सम्राटों के आदेश से मंदिर का विस्तार किया जा रहा । कालांतर में कंफ्युसेस मंदिर ने एक विशाल निर्माण समूह का आकार ले लिया । 18 वीं शताब्दी के शुरू में चीन के छिंग राजवंश के सम्राट युङ जङ ने मंदिर का बड़े पैमाने पर पुनर्निमाण करने का आदेश दिया , और मंदिर का जो विस्तार हुआ था , वह आज तक सुरक्षित रहा ।

कंफ्युसेस मंदिर उत्तर दक्षिण में एक हजार मीटर लम्बा है , उस का क्षेत्रफल एक लाख वर्ग मीटर तथा मंदिर में तकरीबन पांच सौ कमरे हैं । मंदिर का पैमाना पेइचिंग के पुराना शाही प्रासाद के बाद चीन का दूसरा बड़ा प्राचीन निर्माण समूह है , जो चीन के प्राचीन काल के मंदिर स्थापत्य कला की आदर्श मिसाल मानी गई है ।

कंफ्युसेस मंदिर सामंती समाज के सर्वोच्च स्थापत्य स्तर पर निर्मित हुआ था , यानी उस की संरचना तत्कालीन शाही प्रासाद की बराबर होती थी , मंदिर के सभी मुख्य भवन बीचोंबीच उत्तर दक्षिण की दिशा में एक लाइन पर खड़े थे , शेष अतिरिक्त भवन इस लाइन के दोनों तरफ बनाये गए थे । पूरे मंदिर की संरचना आलीशान और सुनियोजित थी । कंफ्युसेस मंदिर का मुख्य भवन नौ मंजिला है और बाहर से अन्दर तक नौ प्रांगन हैं तथा सब से बड़े भवन के नौ कमरे हैं । सिन्गल अंक में नौ सब से ज्यादा है , इसलिए चीन के प्राचीन सामंती समाज में नौ के अंक पर सिर्फ सम्राट का अधिकार था , सम्राट को छोड़ कर अगर किसी व्यक्ति को इस अंक का प्रयोग करने का दुस्साहस हुआ , तो इस का सिर बध किया जाता था । लेकिन इस का केवल एक अपवाद था , यानी कंफ्येसस मंदिर , इस मंदिर में नौ वाले अंक का प्रयोग हुआ , इस के अलावा मंदिर के मुख्य भवन के आगे पांच द्वार बनाये गए , यह भी सम्राट का अधिकार था , क्योंकि प्राचीन सामंती समाज में केवल शाही भवनों के आगे पांच द्वार खोले जाने की अनुमति थी , पेइचिंग के पुराना शाही प्रासाद में मुख्य भवनों के आगे पांच द्वार खोले गए थे । इस से जाहिर है कि कंफ्युसेस मंदिर में सम्राट को प्रदत्त होने वाले समान अधिकार का उपभोग हुआ था ।

कंफ्युसेस मंदिर का मुख्य भवन ताछङ भवन है , जो तीस मीटर ऊंचा और पचास मीटर चौड़ा है । भवन की बाहरी छत पर सुनहरे रंग की चमकीली खपरेल बिछाई गई है , देखने में यह भवन बेहद आलीशान और विशाल नजर आया है , वह इतना शानदार और भव्य है , जो पेइचिंग के पुराना शाही प्रासाद के मुख्य भवन थाई ह भवन के तूल्य है । ताछङ भवन चीन के तीन शानदार प्राचीन भवनों में एक है ।भवन के भीतर दस ऊंचे ऊंचे प्रस्तर स्तंभ खड़े हैं , जो ऊंचाई में छै मीटर और व्यास में एक मीटर चौड़ा है । स्तंभ पर तराश हुए चित्र है , जो उच्च कोटि की कलाकृति है , दसों स्तंभों पर के तराश हुए चित्र विविध और बहुत सुन्दर है , वे चीन की प्राचीन प्रस्तर तराश कला की उत्तम कृति माने जाते हैं । पेइचिंग के पुराना शाही प्रासाद में निर्मित प्रस्तर स्तंभ भी उस के सानी नहीं है ।

कंफ्युसेस मंदिर में चीन के विभिन्न राजवंशों में बनाए गए दो हजार से अधिक शिलालेख सुरक्षित हैं , यह शिलालेख संग्रह चीन में इस किस्म के सब से बड़े शिलालेख समूहों में से एक है । यहां सुरक्षित शिलालेखों पर बड़ी संख्या में विभिन्न राजवंशों के सम्राटों की हस्तलिपी है , ऐसे ही शिलालेख पचास से ज्यादा सुरक्षित है , इस से अनुमान लगाया जा सकता है कि सामंती समाज में कंफ्युसेस का स्थान कितना ऊंचा था ।

कंफ्युसेस निवास भवन मंदिर के पड़ोस में स्थित है , वहां कंफ्युसेस की संतान रहती थी । वह चीन में मिन राजवंश औक छिंग राजवंश म���ं निर्मित शाही भवन के बाद दूसरा बड़ा निवास भवन है ।

कंफ्युसेस भवन का निर्माण ईस्वी 12 और 13 वीं शताब्दी में चीन के सुन और चिन राजवंशों के समय में शुरू हुआ , वह शतप्रतिशत सामंती कुलीन उद्यान की विशेष शैली में है , कंफ्युसेस भवन करीब पचास हजार वर्ग मीटर की भूमि को घेर लेता है , निवास भवन में विभिन्न प्रकार के पांच सौ कमरे हैं । भवन की संरचना की ठेठ विशेषता है , अग्रिम भाग के विभिन्न मकानों में दैनिक कार्य निपटता था और पिछवाड़ा भाग के मकान रहन सहन का स्थान था । इस भाग के विशाल भवन की वास्तु शैली मिन और छिंग राजवंशों के सरकारी कार्यालय की शैली से मिलती जुलती है । कंफ्युसेस भवन में बड़ी मात्रा में एतिहासिक दस्तावेज तथा विभिन्न राजवंशों के वैशभूषा और आभूषण तथा औजार जैसे ऊंचा एतिहासिक महत्व रखने वाली सांस्कृतिक अवशेष सुरक्षित हैं ।

कंफ्युसेस समाधि क्षेत्र कंफ्युसेस और उस की संतानों की अपना विशेष समाधि स्थान है , जो आज तक विश्व में सुरक्षित सब से पुराना और सब से बड़ा वंशागत कब्रस्थान है । कंफ्युसेस समाधि करीब दो हजार पांच सौ साल पुरानी है , जो दो वर्ग किलोमीटर भूमि को घेर लेती है , समाधि क्षेत्र में कंफ्युसेस खानदान के एक लाख से ज्यादा समाधियां हैं । इस स्थान में चीन के हान राजवंश (ईसा पूर्व 206 से ईसा 220 ) से अब तक पांच हजार से ज्यादा समाधि स्तंभ और समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के वक्त पत्थरों पर खोदे गए आलेख सुरक्षित हैं ।

कंफ्युसेस समाधि चीन के विभिन्न एतिहासिक कालों के राजनीति , अर्थव्यवस्था , संस्कृति के विकास की स्थितियों तथा अंतिम संस्कार की विभिन्न प्रथाओं पर अनुसंधान में अपरिहार्य भूमिका अदा कर सकती है।

कंफ्युसेस मंदिर , कंफ्युसेस समाधि तथा कंफ्युसेस भवन तीनों विश्वविख्यात और समृद्ध विषय युक्त सांस्कृतिक धरोहर हैं , इस के साथ बड़ी मात्रा में प्राकृतिक अवशेष भी प्राप्त है । इन तीनों स्थानों में 17 हजार प्राचीन वृक्ष उगे मिलते हैं , वे इस एतिहासिक स्थान के लम्बे इतिहास का साक्षी है और प्राचीन काल के मौसम व पारिस्थितिकी पर अनुसंधान की मूल्यवान सामग्री हैं ।

कंफ्युसेस मंदिर , कंफ्युसेस भवन और कंफ्युसेस समाधि अपनी विशालता , लम्बे पुराने इतिहास , असाधारण सांस्कृतिक महत्व तथा समृद्ध एतिहासिक धरोहर तथा वैज्ञानिक कलात्मक मूल्य से विश्व में मशहूर है और वर्ष 1994 में उन्हें संयुक्त राष्ट्र युनेस्को की एतिहासिक धरोहर समिति द्वारा विश्व सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया गया।

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