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लीच्यांग प्राचीन नगर

2017-08-15 15:36:00
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लीच्यांग का प्राचीन नगर दक्षिण पश्चिम चीन के युन्नान प्रांत की लीच्यांग नासी जातीय स्वायत्त काऊंटी में स्थित है , जिस का निर्माण सुङ राजवंश के अंत और युन राजवंश के शुरू में ( 13वीं शताब्दी ) हुआ । प्राचीन नगर युन्नान --क्वोचो पठार और समुद्र सतह से 2400 मीटर ऊंचाई पर आबाद है, नगर का कुल क्षेत्रफल 3.8 वर्ग किलोमीटर है और प्राचीन काल में मशहूर खुला हाट और अहम कस्बा था । प्राचीन नगर में अब 6200 से अधिक परिवार रहते हैं , जिन की जन संख्या 25 हजार है । लीच्यांग प्राचीन नगर के अधिकांश निवासी नासी जाति के हैं । नगर के तीस प्रतिशत के लोग कांस्य व चांदी का शिल्प काम , चमड़े का प्रोसेसिंग काम , कताई बुनाई और मदिरा बनाने का परम्परागत कारगीरी काम और व्यापार का काम करते हैं ।

लीच्यांग प्राचीन नगर में सड़कें पहाड़ी ढलानों और पानी के किनारे किनारे लाल रंग के ब्रेसिया पत्थरों से बिछाई गई है , ऐसी सड़कें इतनी साफ हैं कि बारिश में कीचड़ नहीं बनती है और सूखे में धूल नहीं उड़ती है , पत्थरों पर की रेखाएं और तस्वीरें प्राकृतिक और सुन्दर है , जो प्राचीन नगर के समग्र वातावरण से मेल खाते हैं । लीच्यांग प्राचीन नगर के केन्द्र में स्थित चतुर्कोणी सड़क नगर की प्राचीन सड़क का प्रतीक है ।

लीच्यांग प्राचीन नगर के भीतर बहती युह नदी और उस की शाखाओं पर 354 पुल बनाए गए हैं , यानी औसतन हर किलोमीटर पर 93 पुल आते हैं । पुल विविध आकार प्रकार में हैं , जिन में स्वछ्वी पुल , महा पत्थर पुल , सहस्त्र पुल , दक्षिणी द्वार पुल , माआन पुल और रनसो पुल बहुत मशहूर है , जो सभी मिन और छिंग राजवंशों में ( 14वीं शताब्दी --19वीं शताब्दी ) बनाए गए थे । शहर के केन्द्र में चतुर्कोणी सड़क के पूर्व में एक सौ मीटर दूर खड़ा महा पत्थर पुल सब से ज्यादा अनूठा और विशेष है ।

लीच्यांग प्रांचीन नगर का मुफू भवन शुरू में लीच्यांग के अल्पसंख्यक जाति के वंशगत जागीरदार मुश का दफतर था ।यह प्राचीन भवन युन राजवंश ( ईसा 1271--1368) के काल में निर्मित था , वर्ष 1998 में उस का पुनर्निर्माण किया जाने के बाद प्राचीन नगर संग्रहालय में रूपांतरित हो गया । मुफू भवन 46 मू यानी 3 हैक्टर से ज्यादा भू भाग पर आबाद है , उस में बड़े छोटे 162 कमरे हैं ।भवन में विभिन्न एतिहासिक कालों के सम्राटों द्वारा प्रदत्त 11 प्रशस्ति तख्ते सुरक्षित हैं , जिस से मुश खानदान का शानदार इतिहास प्रतिबिंबत हुआ था ।

प्राचीन नगर के भीतर स्थित फुक्वो मठ का वुफङ मंडप मिन राजवंश के वानली काल के 29वें वर्ष (ईसा 1601) में बनाया गय़ा था । यह मंडप 21 मीटर ऊंचा है ,मंडप आकार प्रकार में उड़ती हुए पांच अमर पक्षी सरीखी है , इसलिए मंडप का नाम वुफङ अर्थात पंच अमर पक्षी मंडप रखा गया । मंडप की भीतरी छतों पर बहुत सी उत्तम रंगीन तस्वीरें अलंकृत हैं । पंच अमर पक्षी मंडप की वास्तु कला में हान , तिब्बत तथा नासी जातियों की शैलियों का मिश्रण हुआ है , जो प्राचीन चीन स्थापत्य की दुर्लभ आदर्श और मूल्यवान मिसाल माना जाता है ।

लीच्यांग नगर के उत्तर में आठ किलोमीटर दूर बसा हुआ पाईशा रिहाइशी वास्तु समूह सुङ और युन राजवंशों के काल में ( 10 वीं शताब्दी से 14वीं शत्बादी तक) लीच्यांग क्षेत्र का राजनीतिक , आर्थिक व सांस्कृतिक केन्द्र रहा था । पाईशा रिहाइशी मकान समूह उत्तर दक्षिण की धुरी पर वितरित हुआ है , बीचोंबीच एक सीढिनुमा चौक अवस्थित है , उत्तर की ओर से चस्मे का पानी बहता हुआ चौक में आता है और चार गलियां चौक से प्रस्थान हो कर चारों दिशाओं में बढ़ जाती दिखती हैं , जो देखने में बहुत अद्भुत और अनोखे है । पाईशा रिहाइशी वास्तु समूह के निमाण व विस्तार से आगे चल कर ली च्यांग नगर का ��धार तैयार बन गया था ।

लीच्यांग प्राचीन नगर का सुह रिहाइशी वास्तु समूह नगर के उत्तर पश्चिम में चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है , वह प्राचीन नगर के निकटस्थ एक छोटा हाट कस्बा है , सुह वास्तु समूह के अन्दर नागरिक मकान बड़े सुन्दर ढंग में विन्यासित हुए है , आकार प्रकार में वह लीच्यांग नगर की चतुर्कोणी सड़क जैसा है । छिंगलुङ नदी का पानी कस्बे के केन्द्र से कलकल बहते गुजरता है , नदी पर खड़ा छिंगलुङ पुल मिन राजवंश( ईसा 1368--1644) के काल में बनाया गया था , यह पुल लीच्यांग क्षेत्र का सब से बड़ा प्रस्तर मेहराब पुल है ।

लीच्यांग प्राचीन नगर का इतिहास लम्बा पुराना है और नगर का निर्माण प्राकृतिक रूप लिए हुए परिशुद्ध है । नगर की संरचना सुयोजित और सुढंग है , नगर में पहाड़ी शहर का नजारा मिलने के साथ जल क्षेत्र का दृश्य भी प्राप्त होता है । लीच्यांग नगर के रिहाइशी मकानों में हान , पाई , ई और तिब्बत जातियों की शैली के साथ नासी जाति की विशेष शैली गृहित है । वे चीन के स्थापत्य इतिहास और संस्कृति के अध्ययन के लिए अहम सामग्री है । लीच्यांग प्राचीन नगर में समृद्ध जातीय संस्कृति निहित है , नासी जाति के विकास व प्रगति का इतिहास अभिव्यक्त है , वह मानवी संस्कृति के विकास के लिए महत्वपूर्ण एतिहासिक सामग्री है ।

लीच्यांग प्राचीन नगर उच्च स्तरीय बहुमुखी मूल्य रखने वाला प्रसिद्ध एतिहासिक व सांस्कृतिक शहर है , उस में केन्द्रिक रूप से स्थानीय एतिहास , संस्कृति और जातीय रिति रिवाज अभिव्यक्त होता है , तत्कालीन सामाजिक प्रगति प्रतिबिंबित है । प्राचीन नगर में सुयोजित शहरी संरचना , जीवंट जल व्यवस्था ,एकीकृत वास्तु समूह , उचित अनुपात वाला रिहाइशी मकान , मनमोहक पर्यावरण तथा अपनी अलग पहचान वाली जातीय कला ने अपने को चीन के अन्य एतिहासिक शहरों से अलग कर विशेष बना दिया है । प्राचीन नगर के निर्माण में प्रकृति पर प्राथमिकता , व्यवहारिक प्रयोग पर बल तथा परिशुद्धता व समावेश पर महत्व देने का विचार व्यक्त हुआ है , जिस से विशेष एतिहासिक स्थिति में शहरी निर्माण के लिए मानव की सृजन भावना और प्रगतिशीलता जाहिर हुई है । लीच्यांग प्राचीन नगर ऐसी अल्पसंख्यक जाति बहुल परम्परागत बस्ती है , जिस का अपनी विशेष महत्व होता है , वह मानव के शहरी निर्माण इतिहास व जातियों के विकास इतिहास के अध्ययन के लिए मूल्यवान सामग्री प्रदान कर सकता है , वह अमोल सांस्कृतिक धरोहर है , वह चीन और विश्व का दुर्लभ सांस्कृतिक खजाना है ,जो विश्व विरासत सूची में शामिल होने के योग्य है।

लीच्यांग प्राचीन नगर में प्राकृतिक सौंदर्य व मानव निर्मित सौंदर्य तथा कला व आर्थिक प्रयोग का एकीकृत मेल मिलाप है । वर्ष 1997 के दिसम्बर माह में वह सांस्कृतिक विरासत चयन मापदंड के अनुसार विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया । विश्व विरासत कमेटी ने इस का यो मूल्यांकन किया कि प्राचीन लीच्यांग नगर अहम आर्थिक व सामरिक महत्व वाले स्थान तथा दुर्गम भू स्थिति को बड़ी कुशलता से एक सूत्र में जोड़ कर ठोस और अच्छी तरह प्राचीन व परिशुद्ध दृश्य को सुरक्षित कर देता है और पुनः अभिव्यक्त कर देता है । प्राचीन नगर के वास्तु निर्माण अनेक राज्यकालों से गुजर कर भारी परिवर्तनों से अच्छी तरह सुरक्षित रहे हैं , विभिन्न जातियों की विशेष संस्कृतियों का समावेश कर उस का नाम बहुत दूर मशहूर हो गया है । लीच्यांग में प्राचीन जल आपूर्ति व्यवस्था है , यह सुव्यवस्थित और उम्दा बेमिसाल जल सप्लाई जाल आज भी प्रयोग में कारगर होता है ।

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