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चोक्वोत्यान का पेइचिंग मानव अवशेष

2017-08-15 15:36:00
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चोक्वोत्यान का पेइचिंग मानव अवशेष स्थल पेइचिंग शहर के दक्षिण पश्चिम में 48 किलोमीटर दूर स्थित फांगशान डिस्ट्रेक्टर के चोक्वोत्यान गांव के लुङकु पहाड़ पर है । यह पहाड़ पहाड़ी क्षेत्र और मैदानी क्षेत्र के संगम पर खड़ा है , जिस के दक्षिण पूर्व में उत्तर चीन मैदान है और उत्तर पश्चिम में पहाड़ी क्षेत्र आरंभ होता है । चोक्वोत्यान गांव के निकट पहाड़ों का पत्थर बहुधा चूने का होता है , लम्बे अरसे से जल प्रवाह की शक्ति से पहाड़ों में बड़ी छोटी बहुत सी प्राकृतिक गुफाएं बन गई। लुङकु पहाड़ पर पूर्व पश्चिम की ओर एक सौ चालीस मीटर लम्बी एक गुफा उपलब्ध है ,जिसे गांववासी कपि मानव गुफा कहते हैं । इसी गुफा में वर्ष 1929 में प्रथम बार प्राचीन काल के मानव के अवशेषों का पता चला , जो आगे चल कर चोक्वोत्यान मानव के पहले अवशेष स्थल के नाम से मशहूर हो गया ।

चोक्वोत्यान मानव अवशेष स्थल उत्तर चीन क्षेत्र का अहम पुराना पाषाण युग का खंडहर है , जिस में चोक्वोत्यान का प्रथम मानव अवशेष स्थल पेइचिंग मानव का अवशेष स्थल के नाम से विश्वविख्यात है । इस अवशेष स्थल का पता सर्वप्रथम स्वीडन के विद्वान आंटेसन ने वर्ष 1921 में लगाया था , इस के बाद अनेक प्रसिद्ध विद्वानों ने उस का सर्वेक्षण किया । वर्ष 1927 में कनाडियन विद्वान डर्बोसन ने चोक्वोत्यान मानव अवशेष स्थल का औपचारिक रूप से दोहन किया और वहां मानव के तीन दांत पाये , जिस का नाम चीनी कपि मानव की पेइचिंग प्रजाति रखा गया । वर्ष 1929 में चीनी पुरातत्व विद्वान श्री फे वुन चुंग ने खुदाई में पेइचिंग मानव की एक खोपड़ी उपलब्ध की , इस सफलता ने दुनिया को आश्चर्यचकित कर दिया ।

चोक्वोत्यान मानव अवशेष स्थल का लगातार अस्सी सालों तक दोहन किया गया , वैज्ञानिक सर्वेक्षण काम आज भी जारी रहा है । पेइचिंग मानव अवशेष के प्रथम स्थल में चालीस मीटर के क्षेत्र का दोहन सर्वेक्षण कियाजा चुका है । पेइचिंग मानव अवशेष खंडहर की खुदाई में कपि मानव के जीवाश्म , प्रस्तर औजार व वस्तुएं , स्तनपोषी पशुओं के जीवाश्म और आग के प्रयोग के अवशेष स्थल जितने प्रचूर मात्रा में उपलब्ध हुए हैं , उतना ज्यादा समकालीन अन्य किसी अवशेष स्थलों में नहीं मिले हैं ।

चोक्वोत्यान के पेइचिंग मानव अवशेष स्थल में जो आग के प्रयोग का अवशेष मिला है , उस से मानव में आग का प्रयोग जानने का इतिहास लाखों वर्ष पूर्व बढ़ाया गया है । खंडहर में पांच भस्म परतों , तीन राख स्थलों और बड़ी मात्रा में आग से जल गई हड्डियों का पता चला है , भस्म परत छै मीटर तक मोटी पायी गई है । इस से जाहिर होता है कि पेइचिंग मानव आग का प्रयोग जानने के साथ उसे सुररक्षित करने का तरीका भी जानते थे ।

पेइचिंग मानव अवशेष स्थल में दर्जनों हजार प्रस्तर वस्तुएं मिली हैं , प्रस्तर वस्तुओं का कच्चा माल निकटस्थ स्थानों से उपलब्ध होता था । प्रस्तर वस्तुएं आम तौरपर छोटे आकार वाले औजार हैं , किस्में बहुत ज्यादा हैं , शुरूआती समय के औजार मोटा और अपरिष्कृत है , काटने और कूट मारने के लिए प्रयुक्त औजार प्रमुख हैं । मध्य काल के प्रस्तर औजार आकार में छोटा हो गया , तेज धार वाले औजारों का बड़ा विकास हुआ । उत्तर काल के प्रस्तर औजार और छोटे हो गए और प्रस्तर सुतारी इस काल का विशेष औजार है ।

अवशेष स्थल की खुदाई से प्राप्त चीजों से यह साबित होता है कि पेइचिंग मानव आज से 7--2 लाख वर्ष पहले चोक्वोत्यान क्षेत्र में रहते थे , उन का मुख्य जीविका वनस्पतियों को तोड़ बटोर करना था , साथ ही जीवनयापन के सहायक रूप में शिकार भी करना था । इस लम्बे समय का पूर्व काल आज से सात लाख से चार लाख साल तक था , मध्य काल की अवधि आज से चार लाख से तील लाख साल तक और उत्तर काल आज से तीन लाख से दो लाख साल तक का था । पेइचिंग मानव प्राचीन कपि मानव से बुद्धि वाले मानव में विकास के क्रम में पैदा हुए आदि- मानव था । यह सफल खोज जीव शास्त्र , इतिहास शास्त्र तथा मानव विकास इतिहास के अध्ययन में अत्यन्त बड़ा महत्व रखता है ।

पेइचिंग मानव का पता चलने तथा उस पर अनुसंधान किया जाने से 19 वीं शताब्दी में जावा मानव का पता चलने के बाद विज्ञान जगत में आधी सदी तक चल रहे इस विवाद का हल हो गया कि पांवों पर सीधे खड़ा होने वाल मानव कपि मानव है अथवा मानव है । तत्यों से सिद्ध होता है कि मानव के विकास इतिहास के प्रारंभिक काल में शरीरिक संरचना , सांस्कृतिक स्वरूप तथा सामाजिक संगठन की दृष्टि से पांवों पर सीधे खड़ा होने वाला मानव अस्तित्व में आ चुका था , वे दक्षिण कपि मानव के वंशज थे और पश्चात में पैदा हुए बुद्धि वाले मानव के पूर्वज थे । पांवों पर खड़े मानव कपि मानव से मानव में विकास के क्रम पर की एक अहम कड़ी था । अब तक भी पेइचिंग मानव पांवों पर सीधे खड़े मानव की आकृति की ठेठ मिसाल है ।

चोक्वोत्यान मानव अवशेष स्थल विश्व के समकालीन प्राचीन मानव अवशेषों में सब से समृद्ध , व्यवस्थित तथा मूल्यवान सामग्री रखने वाला स्थान है । विश्व सांस्कृतिक विरासत चयन मापदंड के अनुसार चोक्वोत्यान का पेइचिंग मानव अवशेष स्थल वर्ष 1987 के दिसम्बर माह में विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया । विश्व विरासत कमेटी ने इन शब्दों में इस का मूल्यांकन किया कि चोक्वोत्यान का पेइचिंग मानव अवशेष स्थल का वैज्ञानिक सर्वेक्षण काम अभी जारी रहा है । अब तब वैज्ञानिकों ने चीनी कपि मानव की श्रेणी में पेइचिंग मानव के अवशेषों का पता चला है , वे प्लाईस्टोसन युग के मध्य काल में रहते थे , वैज्ञानिक खोज में तरह तरह की जीवन वस्तुएं भी उपलब्ध हुई हैं , तथा ईसा पूर्व 18 हजार से 11 हजार वर्ष तक के नवोदित मानव के अवशेषों का भी पता चला है । चोक्वोत्यान का मानव अवशेष स्थल न केवल अति प्राचीन काल में एशिया महाद्वीप के मानव समाज का एक दुर्लभ एतिहासिक साक्षी है , साथ ही उस ने मानव के विकासक्रम पर प्रकाश भी डाला है ।

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