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अम्यी पर्वत और लेशान बुद्ध मुर्ति

2017-08-15 15:36:03
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अम्यी पर्वत का दूसरा नाम है महा आलोक पहाड़ , जो पश्चिमी चीन के सछवान प्रांत के मध्य दक्षिण तथा सछवान बेसिन व छिंगहाई--तिब्बत पठार के संगम भाग में स्थित है , पर्वत की सब से ऊंची चोटी का नाम है सहस्त्रों बुद्ध शिखर , जो समुद्र सतह से तीन हजार 99 मीटर ऊंचा है । अम्यी पर्वत अपने यहां अनोखा प्राकृतिक सौंदर्य मिलने तथा पौराणिक लोक जैसा बौध जगत का तीर्थ पहाड़ होने की वजह से विश्वविख्यात है । इस पहाड़ में सुन्दर प्राकृतिक दृश्यों तथा सदियों पुरानी एतिहासिक संस्कृति का अनूठा मिश्रण हुआ और एक दूसरे को ज्यादा श्रेष्ठ कर दिया गया है , इसलिए चीन में अम्यी की सराहना करने के लिए यह कहावत चलता आया है कि अम्यी का सौंदर्य पृथ्वी में बेजोड़ है ।

अम्यी पर्वत जहां स्थित है , वहां कई बहुत प्राकृतिक तत्व मिश्रित उपलब्ध है , पहाड़ी क्षेत्र में जीव जंतुयों की प्रचूरता होती है , दुर्लभ और विशेष किस्मों के जीव बेशुमार है , पूर्ण रूप में सुरक्षित अर्ध उष्ण प्रदेशीय वनस्पतियों की वन्य व्यवस्था होती है , 87 प्रतिशत की भूमि पर जंगल बिछी हुई है । अम्यी पर्वत में उच्च दर्जे की दो सौ 42 वन्य प्रजातियां हैं और तीन हजार दो सौ से अधिक किस्मों की वनस्पतियां है , जो चीन की वनस्पतियों की कुल किस्मों का दसवां भाग बनती है ।चीन की ऐसी सौ से अधिक किस्मों की वनस्पतियां हैं , जो मात्र अम्यी पर्वत में उगती है और जिन के नाम भी अम्यी से जुड़े कर रखे गए हैं । इस के अलावा अम्यी पर्वत में अनेक नस्लों के दुर्लभ और मूल्यवान जानवर रहते हैं , यहां जानवारों की नस्लें दो हजार तीन सौ से अधिक है , इसलिए अम्यी पहाड़ी क्षेत्र विश्व की जीव विकास व्यवस्था पर अनुसंधान के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है ।

अम्यी पर्वत चीन के बौध धर्म के चार प्रमुख तीर्थ पर्वतों में से एक है । बौध धर्म के प्रचार प्रसार तथा मंदिरों व मठों के जोरदार निर्माण व विकास से अम्यी पर्वत को और अधिक पौराणिक तथा दिव्य बनाया गया ।धार्मिक संस्कृति , खास कर बौध संस्कृति इतिहास में अम्यी क्षेत्र की संस्कृति के मुख्य स्थान पर सम्मानित रही । यहां के तमाम वास्तु निर्माणों , मुर्तियों , धार्मिक यंत्रों , रिति संस्कारों , संगीत व चित्रों में धार्मिक संस्कृति का गाढा वातावरण छाया रहा । अम्यी पर्वत पर बड़ी संख्या में मंदिर और मठ स्थापित हुए है , जिन में पोक्वो मठ , व्यानन्येन मठ समेत स्वर्णीय चोटी के आठ मंदिर सब से मशहूर हैं।

लेशान महा बुद्ध मुर्ति अम्यी पर्वत की पूर्वी तलहटी में खड़ी शियङ पहाड़ पर है , जो प्राचीन काल में महा मैत्रेय प्रतीमा और महा चातिन प्रतीमा के नाम से मशहूर था , इस मुर्ति खोदने का काम थांग राजवंश के खाईयुन काल के प्रथम वर्ष यानी वर्ष 713 में शुरू हुआ था , लगातार नब्बे सालों के बाद पूरा हो गया । मुर्ति नदी के तट पर खड़ी पहाड़ी चट्टान पर खोद कर बनायी गई है , जो अब तक विश्व में सुरक्षित पहाड़ी चट्टान पर खुदी सब से बड़ी मुर्ति है , वास्तव में वह समूचे एक पहाड़ को खोद कर बनायी गई है , इसलिए यह कहावत कि पहाड़ बुद्ध है , बुद्ध पहाड़ भी , सदियों से चला आया है । महा बुद्ध मुर्ति बैठने के आसन् में है , नदी के पूर्वी तट पर बैठी पश्चीम की ओर मुख करती है , मुर्ति शांति और गंभीर्य की मुद्रा में है , मुर्ति 71 मीटर ऊंची है और शरीर पर हरेक तराश रेखा बारीकी और सूक्ष्म है , कलात्मक शैली में पूरा बदन अनुपातित है , मुर्ति अद्भुत भव्य और महान् दिखती है । महा बुद्ध मुर्ति के उत्तर और दक्षिण में खड़ी चट्टानों पर थांग राजवंश में खुदी नब्बे बुद्धि मुर्तियां भी उपलब्ध हैं , जिन में भी श्रेष्ठ कला कृतियां मिलती हैं ।

अम्यी पर्वत और लेशान बुद्ध मुर्ति जिस पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है , विशेष भौगोलिक स्थान में होने के कारण वहां की भू-स्थिति विशेष और अनूठी है , प्राकृतिक दृश्य अनुपम और अनोखे है , पारिस्थितिकी का पर्यावरण अच्छी तरह सुरक्षित है , खास कर विश्व की जैव विकास व्यवस्थाओं के संगम व संक्रमण स्थान पर अवस्थित होने से प्रचूर मात्रा में जानवरों व वनस्पतियों का संसाधन उपलब्ध है , इन जानवरों व वनस्पतियों की स्पष्ट क्षेत्रीय विशेषता व्यक्त होती है , दुर्लभ जीव नस्लें समृद्ध होती हैं । पिछले दो हजार सालों में इस क्षेत्र में समृद्ध सांस्कृतिक विरासत सृजन कर संजोए हुई हैं ,जिन का प्रतिनिधित्व बौध धर्म करता है । अम्यी पर्वत के प्राकृतिक संसाधनों तथा सांस्कृतिक धरोहरों का इतिहास , सौंदर्य कला , वैज्ञानिक अनुसंधान तथा पर्यटन के लिए बहुत ऊंचा मूल्य होता है , जो मानव जाति का संयुक्त संपदा है ।

अम्यी पर्वत और लेशान महा बुद्ध मुर्ति वर्ष 1996 में विश्व सांस्कृतिक व प्राकृतिक विरासत के चयन मापदंड के अनुसार विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया है । विश्व विरासत कमेटी का मूल्यांकन इस प्रकार हैः ईसा पहली शताब्दी में सछवान प्रांत के अम्यी पर्वत की खूबसूरत चोटी पर चीन का प्रथम बौध मंदिर स्थापित हुआ । उस के आसपास दूसरे मंदिरों की स्थापना होने के साथ यह स्थान बौध धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक बन गया । कालांतर में यहां बड़ी मात्रा में सांस्कृतिक संपदा इक्ट्ठे हो गए , जिन में सब से मशहूर लेशान की महा बुद्ध मुर्ति है , वह आठवीं शताब्दी में लोगों द्वारा एक पहाड़ी चट्टान पर खोद कर बनायी गई थी , जो देखने में लगती है कि वह नीचे की ओर नजर झुका कर वहां से गुजरने वाली तीनों नदियों के संगम पर निगाह करती हो , यह मुर्ति 71 मीटर ऊंची है , जो विश्व में सब से ऊंची मुर्ति मानी जाती है । अम्यी पर्वत जीव जंतुओं की समृद्ध नस्लें तथा वनस्पतियों की प्रचूर किस्में उपलब्ध होने के कारण विश्व में भी प्रसिद्ध है , इस क्षेत्र में अर्ध उष्ण प्रदेश की वनस्पतियों को ले कर अर्ध उच्च पर्वतीय सुईदार पत्तों वाले पेड़ों तक की सभी किस्मों की जंगलें मिलती है , कुछ पेड़ों की उम्र हजार वर्ष से भी अधिक है ।

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