सूचना:चाइना मीडिया ग्रुप में भर्ती

मावांगत्वी में हान राजवंश की समाधि

2017-08-15 16:17:00
शेयर
शेयर Close
Messenger Messenger Pinterest LinkedIn

20 वीं शताब्दी के 70 वाले दशक में दक्षिण चीन के हुनान प्रांत की राजधानी छांगशा शहर के पास मावांगत्वी टीले पर हान राजवंश की समाधि की खुदाई में प्राप्त सांस्कृतिक अवशेष ने विश्व को आश्चर्यचकित कर दिया । इस समाधि में सुरक्षित महिला शव विश्व में पहली बार पायी नम मानव लाश है , जो आज से दो हजार से अधिक साल पहले दफनायी गई थी । यह शव इतना अच्छी तरह सुरक्षित हुई है कि उस का मुखड़ा सजीव और त्वच लचीला बना रहा है । इस के अलावा समाधि की खुदाई से बड़ी मात्रा में अच्छी तरह सुरक्षित अनमोल सांस्कृतिक अवशेष उपलब्ध हुए है , जो चीनी राष्ट्र की प्राचीन मूल्यवान खजाना माना जाता है ।

दक्षिण चीन के हुनान प्रांत की राजधानी छांगशा शहर के पूर्वी उपनगर में एक बड़ा आकार वाला प्राचीन कब्रस्तान कहा जाता था , जिस में मा नाम का एक स्थानीय राजा दफनाया गया था । इसलिए यहां का नाम भी मावांगत्वी यानी मा राजा का टीला पड़ा । इस के बारे में यह कथन भी प्रचलित था कि इस टीले के नीचे छांगशा के प्राचीन राजा की माता की शव दफनायी गयी है । 20 वीं शताब्दी के 70 वाले दशक में दूसरे काम के लिए टीले की खुदाई के दौरान संयोग से जमीन के नीचे के कब्र का पता चला और उस की शव की शिनाख्त भी हो गई । वर्ष 1971 में जब मावांगत्वी टीले पर तहखाने के लिए खुदाई का काम हो रहा था और खुदाई जमीन के दस मीटर तक पहुंची , तो अचानक भूमि में महीन और नरम गुंधा आटा जैसी सफेद मिट्टी की परत नजर आयी , मजदूरों ने इस्पाती ड्रेलिंग पाइप से नरम मिट्टी पर एक छेद बनाया , तो छेद से नीचे से एक प्रकार की सांस को घोटने वाली तेज गैस निकली , संयोग से किसी ने माचीस जलाया , जिस से वह गैस भी जली , जो नीले रंग में लाल लौं दे रही थी । आग बुझाने के लिए उस पर पानी फेरा दिया गया , पर छेद में से फट कर बाहर निकलने वाले प्रबल वायु से पानी को उल्टा दिशा में बहा कर दिया गया । अंत में मिट्टी भरे बोरा छेद पर डाल कर उसे सील कर दिया गया . तभी आज बुझ गई ।

विशेषज्ञों के सर्वेक्षण से पता चला कि इस जगह की भूमि के नीचे एक प्राचीन समाधि गड़ी हुई है । समाधि की खुदाई से पाया गया कि समाधि कक्ष में एक मीटर मोटी सफेद गारा मिट्टी बिछाई गई , इस के नीचे करीब पांच किलोग्राम कोक लकड़ी रखी हुई , जो चार ट्रकों को भर लदाया गया , कोक लकड़ी हटायी जाने के बाद ताबूत दिखा , जिस पर बांस की दसियों चटाइयां रखी गईं , जो शुरू शुरू में बड़ा ताजा रंग का दिखाई दे रहा था , लेकिन हवा में आने के सिर्फ दसेक मिनट बाद ही चटाई सड़ कर काला राख पड़ गई । समाधि में अन्दर बाहर चार ताबूत रखे गए थे , बाहर के सब से बड़ा वाला 7 मीटर लम्बा , 5 मीटर चौड़ा और 3 मीटर ऊंचा है ।

ताबूत खोला जाने पर उस में सुरक्षित सजीव महिला शव ने लोगों को आश्चर्य में डाला था , शव पूरे समूचे अंग में बनी रही है , मुखड़ा स्पष्ट आकृति में दिखता है , बाल चमकीला है , हाथ पांव की रेखाएं साफ है , त्वच नम और मांसपेशी लचीला है , घुटने और कुहानियां मुड़ सकती हैं । पोस्टमार्टम से शरीर के अन्दर इंद्रिएं अच्छी तरह सुरक्षित हैं , अन्ननली , आमाश्य और आंति में खरबूज के सौ से अधिक बीजे भी पाये गए , इस से जाहिर है कि वह महिला खरबूज खाते समय मर गयी थी , मृत्यु का समय गर्मियों के मौसम में था । ताबूत में एक मुहर प्राप्त है , जिस पर सिङच्वी अक्षर खुदे है । जांच परख से सिद्ध हुआ है कि यह कब्र ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी में बनाया गया था , उस में जो शव दफनाया गया , वह पश्चिम हान राजवंश के आरंभिक काल में छांगशा राज्य के वजीर लिछांग की पत्नी सिङच्वी का है ।

दो हजार से अधिक सालों से नहीं सड़े महिला शव की खोज ने पूरे विश्व को आश्चर्यचकित कर दिया । विशेषज्ञ , विद्वान , पर्यटक , फिल्म निर्माता तथा वैज्ञानिक सभी छांगशा में शव के दर्शन के लिए आ धमके । संबंधित विभागों के आंकड़ों के अनुसार खुदाई के बाद अल्पसमय के भीतर शहर में आने जाने वाली जन संख्या में पांच हजार की वृद्धि हुई । सिङच्वी की समाधि के दो साल बाद उस के निकट दो बड़े आकार वाले अन्य कब्रों का भी पता लगा , एक सिङच्वी के पति ,छांगशा के वजीर लीछांग का था और दूसरा उन के पुत्र का था । तीनों समाधि का नाम रखा मावांगत्वी टीले की हान समाधि । हान समाधि की खुदाई में प्रचूर मात्रा में सांस्कृतिक अवशेष उपलब्ध हुए हैं , जिन में वस्त्र , खाद्यपदार्थ , जड़ी बूटी , लाख के पात्र , लकड़ी की मुर्ति , वाद्ययंत्र , मिट्टी के बर्तन , रेशमी चित्र और बांस की फट्टियों पर लिखे आलेख शामिल हैं । इन अवशेषों का खासा उच्च कलात्मक और प्रयोगिक महत्व होता है , जो अनमोल है । समाधि में से प्राप्त 1400 से ज्यादा वस्त्र पश्चिम हान राजवंश ( ईसापूर्व 206 --ईस्वी 25 ) का रेशमी वस्त्र जखाना माना जाता हैं । उन में से दो रेशमी वस्त्र खास ध्यानाकर्षक है , जो हरेक एक मीटर लम्बा है , उस के बांह दो मीटर लम्बा है , पर वह मात्र 28 ग्राम भारी है । इस लम्बे वस्त्र को तह कर एक हथेली में पकड़ा जा सकता है , शरीर पर पहनने पर वह झोंगुर का पंख जितना हल्का है ,देखने में मानो कोहरा छाया हुआ हो । यह इस का साक्षी है कि उस समय , चीन की बुनाई तकनीक असाधारण ऊंचे स्तर पर पहुंची थी । खुदाई में प्राप्त बांस के फलकों पर खुदे आलेखों में विश्व के प्राचीनतम खगोल रचनाएं --- पंच ग्रहों की ज्योतिष तथा खगोल मौसम ज्योतिष के अलावा प्राचीनतम चीनी औषधि पुस्तक नसतंत्र शास्त्र तथा रोगनिदान की 52 नुस्खा शामिल हैं । मावांगत्वी के हान राजवंश की समाधि की खुदाई में भारी मात्रा में प्राप्त रेशमी कपड़ों पर लिखे आलेखों का चीन के अकादमिक अनुसंधान पर अत्यन्त बड़ा प्रभाव पड़ा है ।

छांगशा के मावांगत्वी टीले की खुदाई का चीन के पुरातत्व विज्ञान जगह पर दूगामी प्रभाव पड़ा है । विशेषज्ञों का मानना है कि इस का सब से ज्यादा मूल्य रखने वाला अवशेष अच्छी तरह सुरक्षित हुआ प्राचीन लोग का शव , वस्तुओं की सेट तथा रेशमी कपड़ों व बांस के फलकों पर लिखे प्राचीन आलेख हैं । तीनों प्रकार के अनमोल अवशेषों का एक साथ मिलना चीन के पुरातत्व खोज इतिहास में अभूतपूर्व है ,इसलिए छांगशा के मावांगत्वी टीले के हान राजवंश की समाधियों की खुदाई 20 वीं शताब्दी में चीन और विश्व के अहम पुरातत्व खोजों में से एक माना गया है ।

 

शेयर

सबसे लोकप्रिय

Related stories