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कोरियाई परंपरागत चिकित्सा पद्धति

2017-08-15 16:41:38
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कोरियाई परंपरागत चिकित्सा पद्धति की आम स्थिति

कोरियाई परंपरागत चिकित्सा पद्धति कोरियाई जाति की अपनी संस्कृति के आधार पर चीनी हान जाति की परंपरागत चिकित्सा पद्धति के आधार पर विकसित हुई है , जिस में कोरियाई जाति के दीर्घकाल तक रोगों का इलाज करने के दौरान प्राप्त अनुभवों का सारांश है । कोरियाई जाति और हान जाति के बीच प्राचीन काल से ही घनिष्ठ आदान प्रदान चलता आया है और बेशक परंपरागत चिकित्सा पद्धति के क्षेत्र में भी यह आदान प्रदान बराबर होता रहा है । हान जाति की परंपरागत चिकित्सा पद्धति सीखने के साथ साथ कोरियाई चिकित्सकों ने अपनी जातीय संस्कृति के आधार पर स्थानीय चिकित्सा के अनुभवों का सारांश भी शामिल किया है । 19वीं शताब्दी में कोरियाई चिकित्सक ली ची मा ने पूर्वी चिकित्सा पद्धति शूशीपौयवान नामक पुस्तक प्रकाशित की जिसमें कोरियाई चिकित्सा पद्धति के सिद्धांत और उपचार के उपाय सब शामिल हैं । इसी तरह कोरियाई परंपरागत चिकित्सा पद्धति की अपनी एक व्यवस्था कायम हुई है ।

कोरियाई परंपरागत चिकित्सा पद्धति की दवाएं

कोरियाई परंपरागत चिकित्सा पद्धति की दवाओं में हान जाति की परंपरागत चिकित्सा पद्धति में उपयोगी दवाओं के अतिरिक्त कुछ स्थानीय दवाएं भी शामिल हैं ।

चूंकि कोरियाई परंपरागत चिकित्सा पद्धति में व्यापक तौर पर चीनी हान जाति की परंपरागत चिकित्सा पद्धति ही शामिल हैं , इसलिए कोरियाई परंपरागत चिकित्सा पद्धति में इस्तेमाल होने वाली बहुत सी दवाएं हान जाति की चिकित्सा पद्धति की दवाएं ही हैं । उदाहरण के लिए कोरियाई परंपरागत चिकित्सा पद्धति के सिश्यांग दवा ग्रंथ में दर्ज की गयी 271 किस्म की दवाएं , पूर्वी चिकित्सा पद्धति सिश्यांग चिनक्वेइ ग्रंथ में दर्ज की गयीं 1297 किस्म की दवाएं , हान चिकित्सा पद्धति के मार्गदर्शन में दर्ज की गयीं 1500 किस्म की दवाएं , पूर्वी चिकित्सा पद्धति ग्रंथ में दर्ज की गयीं 1400 किस्म की दवाएं तथा अन्य औषधि ग्रंथों में दर्ज 515 किस्म की दवाएं सब हान जाति की चिकित्सा पद्धति की उपयोगी दवाएं ही हैं ।

चीन की कोरियाई जाति के लोगों में दवा के रूप में स्थानीय जड़ी बूटियों का इस्तेमाल करने का लम्बा इतिहास रहा है । वर्ष 1949 में नये चीन की स्थापना के बाद कोरियाई जाति के लोगों के रहने वाले क्षेत्रों में परंपरागत दवाओं का भारी विकास किया जाने लगा है और इसमें उल्लेखनीय प्रगति भी सामने आयी है । उदाहरण के लिए बैलूनफूल(कोरियाई) को चिड़िया के साथ बनाकर खाने से महिलाओं के मासिक धर्म संबंधी रोगों का इलाज किया जा सकता है । नागदौन(एक कड़वी जड़ी-बूटी) से बनायी गयी दवा से महिलाओं के सर्दी के रोगों का इलाज किया जा सकता है । एक जड़ी बूटी डु-हो की जड़ से शराब के साथ मिलाकर बनायी गयी दवा से गठिया के रोग का इलाज किया जा सकता है और मक्का के फूल की शराब के साथ मिलाकर बनायी गयी दवा से जिगर की सूजन का इलाज किया जा सकता है । कोरियाई जाति की चिकित्सा पद्धति में ऐसी बहुत सी स्थानीय दवाएं हैं । इन के अलावा कुछ स्थानीय दवाएं ऐसी भी हैं जो सफेद बालों तथा त्वचा की अंदर-बाहर की चोट का इलाज करने में बहुत कारगर साबिह हुई हैं ।

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