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मंगोलियाई परंपरागत चिकित्सा पद्धति

2017-08-15 16:40:32
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मंगोलियाई परंपरागत चिकित्सा पद्धति का परिचय

मंगोलियाई जाति ने अपने दीर्घकाल के जीवन में मंगोलियाई परंपरागत चिकित्सा पद्धति का विकास किया जिस का पुराना इतिहास है और जिसमें समृद्ध विषय हैं । मंगोलियाई परंपरागत चिकित्सा पद्धति मंगोलियाई लोगों के रोगों के इलाज करने में प्राप्त अनुभवों का निष्कर्ष है जिसकी अपनी जातीय व क्षेत्रीय विशेषता है । मंगोलियाई परंपरागत चिकित्सा पद्धति के अनुसार रोगों के इलाज में दवा का कम प्रयोग किया जाता है , इसतरह रोगी भी सस्ते में इलाज करवा सकते हैं ।

मंगोलियाई परंपरागत चिकित्सा पद्धति का बुनियादी सिद्धांत

मंगोलियाई परंपरागत चिकित्सा पद्धति के अनुसार शरीर में रोग तब होता है, जब शरीर में मौजूद होई , हिरा और बादागन इन तीन तत्वों में से किसी में असंतुलन आ जाता है । होई तो अनुष्य की जीवन शक्ति का स्रोत है । मनुष्य के विचार , बोली , चलन तथा आंतों की क्षमता सब होई से नियंत्रित होती है । अगर होई में कमजोरी हो तो आंतों में भी कमज़ोरी पैदा हो जाएगी और रोगी को सिर दर्द और याददाश्त की कमजोरी आदि से ग्रस्त होना पड़ेगा । हिरा का मतलब है आग और गर्मी । मनुष्य के शरीर में तापमान तथा बुद्धि की उन्नति आदि के लिए हिरा जिम्मेदार है । हिरा के हद से ज्यादा उत्तेजित होने पर रोगियों के मुंह में कड़वापन आने या सिर दर्द आदि का गर्मी का रोग पैदा हो जाता है । बादागन तो मनुष्य के शरीर में एक तरह का कफ़ होता है जिसकी विशेषता सर्दी है । बादागन की कमज़ोरी होने पर मनुष्य सर्दी का रोग लग जाता है और पसीना , आंसू आदि में भी बढ़ोतरी हो जाती है ।

मंगोलियाई परंपरागत चिकित्सा पद्धति में उपचार

खून का निकाला जाना

मंगोलियाई परंपरागत चिकित्सा पद्धति के अनुसार कुछ रोगों के इलाज में नाड़ियों को काटकर खून निकालने के जरिये रोगों को दूर किया जा सकता है । ऐसा उपचार खून और हिरा की कमज़ोरी से पैदा गर्मी के रोगों के इलाज में कारगर साबित हुआ है । ऐसे उपचार से बुखार , खारिश और दाग आदि गर्मी के रोगों का इलाज किया जा सकता है । खून के निकालने के उपचार की अपनाने से पहले काफी तैयारियां करने की जरूरत होती है ।

उलटा कप रखने और सूईयां लगाने से

ऐसा उपचार अपनाते समय रोगी के शरीर केकिसी अंग पर उलटा कप रखने के बाद उसी अंग पर सूई से त्वचा में छेद किया जाता है , फिर इसी अंग पर कप रखकर खराब खून को बाहर निकाला जाता है । ऐसा करने से रोग को दूर किया जा सकता है । पर ऐसा उपचार आम तौर पर शरीर की नरम और रोमरहित त्वचा पर किया जाता है । ऐसा उपचार करने में रोग का जल्दी इलाज किया जा सकता है और रोगी को दर्द भी नहीं होता और इसमें कोई खतरा भी नहीं है ।

धुएं के जरिये उपचार

मंगोलियाई चिकित्सा पद्धति में धुएं का प्रयोग भी किया जाता है । मंगोलियाई चिकित्सा पद्धति में आम तौर पर जड़ी बूटियों से बनी दवा को जलाया जाता है और दवा को जलाने से पैदा धुएं से रोगों को दूर किया जाता है । ऐसे उपचार की कई शाखाएं भी शामिल ��ैं ।

दही से उपचार

मंगोलियाई चिकित्सा पद्धति के मुताबिक घोड़ी के दूध से बनी दही से भी रोग को दूर किया जा सकता है । ऐसी दही पीने से रोगियों को पुनः स्वस्थ बनाया जा सकता है और इस उपचार को विशेष तौर पर चोट से पैदा बेहोशी और हृदय दर्द आदि रोगों के इलाज में कारगर बताया जाता है । अनुसंधान के मुताबिक घोड़ी के दूध से बनी दही में शरीर के लिए बहुत सी लाभदायक चीज़ें हैं जैसे चीनी , प्रोटीन , वसा और विटामिन आदि । ऐसे दही में बहुत विटामिन सी होने के साथ साथ अमीनो एसिड, लेक्टिक एसिड, एंज़ाइम तथा अन्य बहुत से खनिज तत्व भी शामिल हैं जो सब शरीर के लिए बहुत जरूरी हैं ।

मंगोलियाई हड्डी का इलाज

मंगोलियाई चिकित्सा पद्धति में हड्डी का इलाज करने की अपनी पद्धति है जिससे मंगोलियाई जाति की विशेषता प्राप्त अनुभव एवं कौशल से हड्डियों के टूटने तथा शरीर के नाजुक अंगों में आई चोटों का इलाज किया जा सकता है । गोलियाई हड्डी के इलाज में भी मालिश करना , दवा स्नान करना तथा अभ्यास करना आदि सिलसिलेवार कौशल शामिल हैं जिससे शरीर में जहरीली चीज़ों को बाहर निकाला जा सकता है और रोगी को स्वस्थ बनाया जा सकता है ।

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